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Chandigarh News: परीक्षा में पहनावे संबंधी पूछे सवालों से चकराए विद्यार्थी
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चंडीगढ़। सीईटी परीक्षा 153 सेंटरों पर आयोजित की गई। इसमें 100 प्रश्न पूछे गए। इनमें कुछ ऐसे प्रश्न थे जिन्हें देखकर विद्यार्थी चकरा गए। यह प्रश्न पहनावे से संबंधित थे। अधिकतर विद्यार्थी यमुनानगर, कैथल और अंबाला तक के थे। इन इलाकों में हरियाणवी पहनावा कम पहना जाता है। यहां तो हरियाणवी भाषा भी पूरे तरीके से नहीं बोली जाती है।
शाम की शिफ्ट में हुए पेपर में प्रश्न पूछा गया था कि हरियाणा में दाहिने हाथ के अंगूठे में पहने जाने वाली शीशे से जड़ी अंगूठी का नाम क्या है। इसके लिए 5 विकल्प थे। इसमें आरसी, अनंत, पोंचे, कांगनी और अप्रयासित शामिल थे। इसी प्रकार एक प्रश्न था कि हरियाणवी दुल्हनों द्वारा पहने जाने वाला कौनसा पारंपरिक आभूषण सोने की लड़ी से जुड़े गोलाकार गहने से बना होता है। इसमें भी 5 विकल्पों में बोरला, कोका, नथ, अप्रयासित और उपरोक्त में से कोई नहीं शामिल थे।
एक प्रश्न था कि हरियाणा में पुरुषों द्वारा गले में पहने जाने वाले ऊनी मफलर का क्या नाम है। इसके विकल्प कमरी, गुलाबंद, चादर, मिरजई और अप्रयासित थे। विद्यार्थी प्रदीप, अभय, राजन और नीतिन ने कहा कि उनके एरिया में गले में डाले जाने वाले ऊन के कपड़े को मफलर ही कहा जाता है। आजकल आभूषण भी पारंपरिक नहीं पहने जाते। आजकल की युवा पीढ़ी ज्यादातर आर्टिफिशियल आभूषण पहनते और देखते बड़ी हुई है। शीशे से जड़ी अंगूठी तो उन्होंने कभी देखी ही नहीं।
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शाम की शिफ्ट में हुए पेपर में प्रश्न पूछा गया था कि हरियाणा में दाहिने हाथ के अंगूठे में पहने जाने वाली शीशे से जड़ी अंगूठी का नाम क्या है। इसके लिए 5 विकल्प थे। इसमें आरसी, अनंत, पोंचे, कांगनी और अप्रयासित शामिल थे। इसी प्रकार एक प्रश्न था कि हरियाणवी दुल्हनों द्वारा पहने जाने वाला कौनसा पारंपरिक आभूषण सोने की लड़ी से जुड़े गोलाकार गहने से बना होता है। इसमें भी 5 विकल्पों में बोरला, कोका, नथ, अप्रयासित और उपरोक्त में से कोई नहीं शामिल थे।
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एक प्रश्न था कि हरियाणा में पुरुषों द्वारा गले में पहने जाने वाले ऊनी मफलर का क्या नाम है। इसके विकल्प कमरी, गुलाबंद, चादर, मिरजई और अप्रयासित थे। विद्यार्थी प्रदीप, अभय, राजन और नीतिन ने कहा कि उनके एरिया में गले में डाले जाने वाले ऊन के कपड़े को मफलर ही कहा जाता है। आजकल आभूषण भी पारंपरिक नहीं पहने जाते। आजकल की युवा पीढ़ी ज्यादातर आर्टिफिशियल आभूषण पहनते और देखते बड़ी हुई है। शीशे से जड़ी अंगूठी तो उन्होंने कभी देखी ही नहीं।
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