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पंजाब में जलने लगी पराली: अमृतसर के अटारी गांव में आग लगाता दिखा किसान, काम नहीं आ रहे जागरूकता अभियान
Sat, 30 Sep 2023 01:29 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 30 Sep 2023 01:29 PM IST
सार
पंजाब में लगभग 31 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है। इससे लगभग 16 मिलियन टन धान का भूसा (गैर-बासमती) उत्पन्न होने की उम्मीद है। सरकार इसका प्रबंधन इन-सीटू (फसल अवशेषों को खेतों में मिलाना) और एक्स-सीटू (पराली को ईंधन के रूप में उपयोग करना) तरीकों से करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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अमृतसर में पराली जलाता किसान।
- फोटो : ANI
विस्तार
पंजाब मे पराली जलाने का सिलसिला तेज हो गया है। अमृतसर के अटारी गांव में पराली जलाने का मामला सामने आया है। इससे पहले दादुआना और गहरी मंडी गांव में भी पराली जलाने का मामला सामने आया था।
ये हाल तब है जब पराली को जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक्शन प्लान बनाया हुआ है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने कहा कि पंजाब में पराली जलाने के केसों को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है जबकि छह जिलों में पराली जलाने को पूरी तरह से खत्म करना है।
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इन जिलों में होशियारपुर, मालेरकोटला, पठानकोट, रूपनगर, एसएएस नगर (मोहाली) और एसबीएस नगर शामिल हैं। राज्य में लगभग 31 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है। इससे लगभग 16 मिलियन टन धान का भूसा (गैर-बासमती) उत्पन्न होने की उम्मीद है। जिसका प्रबंधन इन-सीटू (फसल अवशेषों को खेतों में मिलाना) और एक्स-सीटू (पराली को ईंधन के रूप में उपयोग करना) तरीकों से किया जाएगा। धान की पराली का उपयोग औद्योगिक और ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं में करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सीएक्यूएम ने कहा कि बड़ी मात्रा में भूसे का उपयोग पशु चारे के रूप में भी किया जाएगा।
सरकार की अपील भी बेअसर
सरकार पराली जलाने की घटनाओं को कम करने में जुटी है। यही वजह है कि विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। पंजाब सरकार किसानों को बड़े पैमाने पर पर्यावरण अनुकूल कृषि उपकरण उपलब्ध करवा रही है। इनकी सहायता से धान की पराली को जलाए बिना गेहूं की बुआई संभव है। सरकार बार-बार किसानों से अपील करती है कि पराली को खेत में ही मिला देना चाहिए। सरकार ने आदेश जारी किया है कि जो किसान अपने खेतों में पराली को आग नहीं लगाएंगे, उन किसानों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।
पराली न जलाने के प्रति स्कूलों-कॉलेजों में जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। ग्राम स्तर पर कैंप लगाकर अधिक से अधिक किसानों को सरफेस सीडर मशीन के बारे में बताया जा रहा है ताकि किसान इस मशीन की मदद से बिना पराली जलाए धान गेहूं की बुआई कर सकें। वहीं आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर सरकारी कर्मचारी अपने खेतों में पराली जलाते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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#WATCH पंजाब: आज अमृतसर के अटारी गांव में एक खेत में पराली जलती देखी गई। pic.twitter.com/ekxHQ5Z1C2
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 30, 2023
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ये हाल तब है जब पराली को जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक्शन प्लान बनाया हुआ है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने कहा कि पंजाब में पराली जलाने के केसों को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है जबकि छह जिलों में पराली जलाने को पूरी तरह से खत्म करना है।
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इन जिलों में होशियारपुर, मालेरकोटला, पठानकोट, रूपनगर, एसएएस नगर (मोहाली) और एसबीएस नगर शामिल हैं। राज्य में लगभग 31 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है। इससे लगभग 16 मिलियन टन धान का भूसा (गैर-बासमती) उत्पन्न होने की उम्मीद है। जिसका प्रबंधन इन-सीटू (फसल अवशेषों को खेतों में मिलाना) और एक्स-सीटू (पराली को ईंधन के रूप में उपयोग करना) तरीकों से किया जाएगा। धान की पराली का उपयोग औद्योगिक और ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं में करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सीएक्यूएम ने कहा कि बड़ी मात्रा में भूसे का उपयोग पशु चारे के रूप में भी किया जाएगा।
सरकार की अपील भी बेअसर
सरकार पराली जलाने की घटनाओं को कम करने में जुटी है। यही वजह है कि विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। पंजाब सरकार किसानों को बड़े पैमाने पर पर्यावरण अनुकूल कृषि उपकरण उपलब्ध करवा रही है। इनकी सहायता से धान की पराली को जलाए बिना गेहूं की बुआई संभव है। सरकार बार-बार किसानों से अपील करती है कि पराली को खेत में ही मिला देना चाहिए। सरकार ने आदेश जारी किया है कि जो किसान अपने खेतों में पराली को आग नहीं लगाएंगे, उन किसानों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।
पराली न जलाने के प्रति स्कूलों-कॉलेजों में जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। ग्राम स्तर पर कैंप लगाकर अधिक से अधिक किसानों को सरफेस सीडर मशीन के बारे में बताया जा रहा है ताकि किसान इस मशीन की मदद से बिना पराली जलाए धान गेहूं की बुआई कर सकें। वहीं आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर सरकारी कर्मचारी अपने खेतों में पराली जलाते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।