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पंजाब-चंडीगढ़ में भी डॉक्टरों की हडताल का असर, मरीज रहे परेशान, और बढ़ सकती हैं मुसीबतें

Thu, 01 Aug 2019 02:09 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 01 Aug 2019 02:09 AM IST
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Strike Of Doctors Against NMC In Chandigarh And Punjab
बिना इलाज लौटे मरीज - फोटो : अमर उजाला

नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में हड़ताल का असर चंडीगढ़-पंजाब में भी देखने को मिली। बुधवार को चंडीगढ़ के अस्पतालों की ओपीडी ठप रही। शहर के डॉक्टर इस बिल का विरोध कर रहे हैं।

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लोकसभा में बिल के पारित किए जाने के विरोध में डॉक्टरों ने बुधवार को ओपीडी बंद रखी। इसके चलते दूरदराज से आए मरीजों को पूरे दिन दिक्कतों को सामना करना पड़ा। कई मरीज तो बिना इलाज के ही लौट गए।
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सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल व गवर्नमेंट मल्टी स्पेशियालिटी हॉस्पिटल सेक्टर-16 में ओपीडी ठप होने से मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। यहां दूर-दूर से आए मरीज बिना इलाज के ही लौट गए।
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वहीं, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में सुबह 9 बजे तक व्यवस्था ठीक थी लेकिन आईएमए मेंबर व जीएमएसएच के रेजीडेंट्स डॉक्टरों के वहां पहुंचने के बाद कॉलेज के सभी मेडिकल स्टूडेंट्स और सीनियर रेजीडेंट्स ओपीडी से बाहर आ गए। 

इसके बाद सभी ने निजी डॉक्टरों के साथ मिलकर कॉलेज परिसर में काम का बहिष्कार किया। इस संदर्भ में आईएमए प्रेसिडेंट डॉ राजेश धीर ने बताया कि नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पारित होने के विरोध में डॉक्टरों ने देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किया है।

इसके तहत बुधवार की सुबह 6 बजे से गुरुवार की सुबह 6 बजे तक की हड़ताल की गई है। अगर सरकार ने बिल में संशोधन नहीं किया तो विरोध प्रदर्शन और व्यापक स्तर पर होगा।

दोपहर तक मरीजों की लगी रहीं कतारें 
अस्पतालों में ओपीडी में आए नए मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा। वहीं, फॉलोअप मरीजों को सीनियर डॉक्टरों ने देखा। इसका असर पीजीआई की ओपीडी पर भी पड़ा। यहां सुबह से दोपहर बाद तक मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं। पीजीआई के रेजीडेंट्स डॉक्टरों ने ओपीडी में काम करते हुए इस हड़ताल का समर्थन किया है। 

इसके चलते यहां भी ओपीडी में अव्यवस्था का आलम बना रहा। आईएमए के आह्वान पर हड़ताल को हालांकि पीजीआई और जीएमएसएच के रेजीडेंट्स डॉक्टरों ने समर्थन दिया है, पर उन्होंने ओपीडी सेवाएं बाधित नहीं कीं लेकिन सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के मेडिकल स्टूडेंट्स ने हड़ताल का समर्थन करते हुए ओपीडी में काम नहीं किया। फिलहाल डॉक्टरों का कहना है कि इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित नहीं की गई हैं लेकिन जनता और डॉक्टरों के हित में अगर ये भी करना पड़ा तो किया जाएगा।

एक दिवसीय हड़ताल का असर लुधियाना में भी देखने को मिला। हड़ताल के दौरान डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाएं बंद रखकर नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के खिलाफ रोष जताया गया।

सिविल अस्पताल में भी डॉक्टरों ने दो घंटों तक हड़ताल जारी रखी। जिससे मरीज काफी परेशान नजर आए। गुरदासपुर में भी सिविल अस्पताल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले डॉक्टरों ने दो घंटे रोष प्रदर्शन किया। 

फाजिल्का में भी बुधवार सुबह 6 बजे से लेकर एक अगस्त सुबह 6 बजे तक ओपीडी ठप हैं। इस दौरान निजी अस्पतालों में तो ओपीडी पूरी तरह से बंद रही। जबकि सरकारी अस्पताल में ओपीडी सेवा जारी रही। उधर हड़ताल का पता न होने के कारण निजी अस्पतालों में पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी हुई।

बठिंडा में हड़ताल का असर देखने को मिला। सरकारी एवं प्राइवेट डॉक्टरों ने एक सुर में बिल को रद्द करने की मांग रखी। पीसीएमएस के अध्यक्ष डॉ गुरमेल सिंह, डॉ अंकित कुमार, डॉ अरुण बंसल और डॉ रवि ने बताया कि उक्त बिल लोग एवं डॉक्टर विरोधी है। जिस कारण पूरे देश के डॉक्टर इस बिल का विरोध कर रहे है। 

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