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एम्यूजमेंट पार्क घोटाले में आरोपी को नहीं किया पेश तो होगी सख्त कार्रवाई

Tue, 25 Feb 2020 02:12 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 25 Feb 2020 02:12 AM IST
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Strict action will be taken if the accused in the amusement park scam is not presented
चंडीगढ़। सारंगपुर के थीम-कम-एम्यूजमेंट पार्क घोटाले में सोमवार को सीबीआई अदालत में सुनवाई हुई।इस दौरान यूनिटेक कंपनी के आरोपी डायरेक्टर अजय चंद्रा को पेश करने के लिए तीसरी बार तिहाड़ जेल के सुपरिंटेंडेंट को प्रोडक्शन वारंट जारी किए गए। अदालत को बताया गया कि आरोपी डायरेक्टर को पेश नहीं किया जा सकता, क्योंकि आरोपी को अन्य मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में पेश किया जाना है। पिछली सुनवाई पर आरोपी को पेश न करने का कारण बताने को कहा गया था। सोमवार को अदालत ने आरोपी के खिलाफ समन और जेल सुपरिंटेंडेंट को वीडियो कान्फ्रेंसिंग से आरोपी को पेश करने के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई पर सुबह दस बजे अगर आरोपी अजय चंद्रा को पेश नहीं किया गया तो कानून के अनुसार जेल सुपरिंटेंडेंट के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को होगी।
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यूनिटेक कंपनी के अलावा यूटी प्रशासक के पूर्व एडवाइजर ललित शर्मा, पूर्व होम सेक्रेटरी कृष्ण मोहन और टूरिज्म के पूर्व डायरेक्टर विवेक अत्रे इस मामले में आरोपी हैं। तीनों पर नियमों के खिलाफ जाकर यूनिटेक कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप है। हालांकि तीनों को एक-एक लाख की गांरटी पर जमानत मिल चुकी है।
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बता दें कि सारंगपुर में 73.65 एकड़ में प्रस्तावित थीम-कम-एम्यूजमेंट पार्क मामले में साल 2010 में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी। इसके तहत मेसर्स यूनिटेक लिमिटेड को महज 5.5 करोड़ (फिक्सड एनुअल लाइसेंस फीस) के अलावा 1.1 फीसदी वार्षिक रेवेन्यू शेयरिंग पर अलॉटमेंट हुई। आरोप था कि जमीन की कीमत कम आंकी गई थी, जिसका फायदा संबंधित बिल्डर को देने की कोशिश की गई। इससे जुड़े दस्तावेज जान बूझकर नष्ट किए जाने का भी एफआईआर में जिक्र किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों पर वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर, कम रेट पर बोली लगाने वाले को जमीन अलॉट करने सहित रेवेन्यू शेयरिंग के मामले में डीएलएफ की ओर से 13 गुना अधिक रेट कोट किए जाने की बात लिखी गई थी। जांच के बाद सीबीआई ने 4 अक्टूबर 2010 को इन तीनों अफसरों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 201 और 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1)(डी)और 13 (2) के तहत केस दर्ज किया था।
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