बेमिसाल: इनसे है गणतंत्र...जनसेवा इनका मूलमंत्र, कोई गरीब बच्चों को पढ़ाता है तो कोई मुहैया करवाता है किताबें
पूरा देश 73वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। ऐसे में समाजसेवा में लगे कुछ खास लोगों की आज बात करेंगे। ये वह लोग हैं जो दूसरों की भलाई में जुटे हैं।
विस्तार
देशभर में बुधवार को 73वां गणतंत्र दिवस मनाया गया। हर साल गणतंत्र दिवस पर हम सभी ध्वजारोहण के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन करते हैं। असल में यह दिवस उन लोगों के सम्मान का दिन होता है जो समाज व देश के लिए कुछ विशेष कार्य करते हैं। अपने परिवार और कामकाज के बीच लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए जो दिल से काम करते हैं, असल में गण के तंत्र यही लोग हैं।
समय के साथ देशसेवा के मायने भी बदले हैं। अब केवल बॉर्डर पर खड़े होना ही देशसेवा नहीं, बल्कि समाज के लिए अपना योगदान देना भी देशसेवा है। ऐसे लोग जो किन्हीं कारणों से पिछड़ गए या परिस्थितियों के अनुसार आगे नहीं आ सके, उनके साथ खड़े होने वाले लोग संविधान रक्षक से कम नहीं हैं। लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी लाठी बनने वाले लोग असल मायने में आज के गणतंत्र हैं और संविधान के प्रहरी हैं। इन संविधान प्रहरियों का सम्मान करना और उनके काम को प्रोत्साहित करना भी हमारा मौलिक अधिकार है।
मौलिक अधिकारों की रक्षा अब फर्ज समझते हैं युवा
शहर के लोगों का मानना है कि इतने सालों में देश में एक बदलाव आया है। आज का युवा दूसरे के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना अपना फर्ज मानता है। समाज में हर व्यक्ति को उचित स्थान दिलाने और जरूरत के अनुसार मूलभूत सुविधाओं को पूरा करना युवाओं के लिए जैसे करिअर का रास्ता बन गया है। यही कारण है कि कानून की पढ़ाई और समाजसेवा के विषयों में युवा बढ़कर चढ़कर प्रवेश लेते हैं।
झांकियां देखकर होता है गर्व
शहर के युवाओं का कहना है कि राजपथ पर निकलने वाली झांकियों को देखकर गर्व होता है। देश में हो रहे बदलाव की छवि एक साथ एक जगह पर देखने को मिलती है। इस साल हम अपनी स्वतंत्रता का 75वां वर्ष भी मनाने जा रहे हैं। ऐसे में हमने अपने अधिकारों को ध्यान में रखकर जो विकास किया है वह हमारे लिए वास्तव में एक गर्व का पल है।
हर वर्ष अपने खर्च पर दो बेटियों का विवाह करवाता हूं
हर वर्ष दो गरीब कन्याओं का अपने खर्च पर विवाह करवाता हूं। ऐसी कन्याएं जिनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया है, उनका चुनाव करते हैं। इस सामाजिक कार्य से दिल को सुकून मिलता है। इसके अलावा जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई के लिए भी खर्च करते हैं। इस वर्ष नवंबर में पांच गरीब कन्याओं का विवाह करवाने का लक्ष्य है। -जेके बेदी, व्यवसायी, सेक्टर-40
लोगों के जरिए जरूरतमंदों को मुहैया करवाते हैं किताब
शहर में रद्दी से शिक्षा की मुहिम पर बड़े स्तर पर काम कर रहा हूं। खुड्डा लाहौरा में बुक बैंक (बड़ी लाइब्रेरी) बनाई है। लोगों से पुरानी किताबें एकत्रित करते हैं। स्कूलों से जरूरतमंदों बच्चों की सूची लेकर उन्हें किताबें और स्टेशनरी का का सामान उपलब्ध करवाते हैं। ऐसे ही कॉलेजों में भी शिविर लगाकर विद्यार्थियों को किताबें मुहैया करवाते हैं। कुछ समय पहले ही लाइब्रेरी ऑफ ऑनेस्टी प्रोजेक्ट शुरू किया है। - संदीप कुमार, निवासी खुड्डालाहौरा
झुग्गी के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देकर जगा रहे अलख
सेक्टर-26 की बारदाना कॉलोनी, मनीमाजरा व इससे सटी झुग्गी झोपड़ी के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देता हूं। इनमें अधिकतर वे हैं, जिनके अभिभावक काम की तलाश में पलायन कर शहर में आए हैं। आधार कार्ड नहीं होने या साल के मध्य में आने के कारण और जागरूकता के अभाव में ये बच्चे स्कूल जाने से वंचित रह जाते हैं। इन बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देने के बाद नए सत्र में नजदीकी सरकारी स्कूलों में इनका दाखिला भी करवाता हूं, जिससे इनके जीवन स्तर में सुधार आ सके। - कृष्ण राठी, निवासी मलोया
कोरोना ने अपनों को छीना, तीसरी लहर में दूसरों का सहारा बन रहीं वीनू पासी
कोरोना संक्रमण में 100 से ज्यादा लोगों के लिए प्रतिदिन खाना तैयार कर भेजती हूं। कोरोना की दूसरी लहर में जेठ की मौत हो गई थी। परिवार के कई अन्य सदस्यों को भी कोरोना ने छीन लिया। बेटी व उनके पति भी संक्रमित हो गए थे। उस समय खाने की काफी समस्या हो गई थी। तभी से मन बना लिया कि संक्रमितों को ऐसी समस्या से नहीं जूझने नहीं दूंगी। उम्र बेशक मेरी 63 साल हो लेकिन जज्बे में कभी कमी नहीं आई। -वीनू पासी, निवासी सेक्टर-40
जरूरतमंद बच्चों को ताइक्वांडो और कथक सिखाने में करती हूं मदद
जरूरतमंद बच्चों को ताइक्वांडो और कथक का प्रशिक्षण दिलवाने में मदद करती हूं। 200 से अधिक बच्चों के लिए कराटे की कक्षाएं चलवाई हैं। इससे कॉलोनियों के बच्चे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। सात बच्चे जिनको उन्होंने प्रशिक्षण दिया था, ट्राइसिटी के स्कूलों में बतौर कोच ट्रेनिंग दे रहे हैं। उनका लक्ष्य जरूरतमंद बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। जरूरतमंद बच्चे भी इससे उत्साहित होकर अपने साथ दूसरों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। - अमिता मारवाह, समाजसेवी, पंचकूला
देश की आजादी का महत्व बताकर विद्यार्थियों को करते हैं जागरुक
देश की आजादी का महत्व बताकर विद्यार्थियों और लोगों को जागरुक करते हैं। स्कूल, कॉलेज सहित अन्य सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर विद्यार्थियों को आजादी का महत्व बताते हैं। इससे बच्चे पढ़ाई के साथ जागरुक होकर अपने स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के बारे में अच्छी जानकारी जुटाते हैं। उनका उद्देश्य है कि देश के लिए जिन महापुरुषों ने अच्छा काम किया है। उसकी जानकारी विद्यार्थियों को होनी चाहिए। - जगदीश भगत सिंह, समाज सेवी, पंचकूला