जब बिना हथियार राम रहीम के डेरे में घुसी थी सीबीआई टीम, फिर ऐसे कसा डेरामुखी पर शिकंजा
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पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस में सीबीआई के लिए डेरामुखी पर शिकंजा कसना आसान नहीं था। सीबीआई जांच शुरू हो चुकी थी लेकिन डेरामुखी को इसकी परवाह नहीं थी। सीबीआई इस मामले में छत्रपति के बेटे अंशुल व अन्य गवाहों के बयान दर्ज करने का काम भी शुरू कर चुकी थी। अब सीबीआई इस जांच की जद में डेरामुखी को भी लेना चाहती थी।
लिहाजा सीबीआई ने डेरामुखी को नोटिस जारी कर नई दिल्ली सीबीआई मुख्यालय में जांच में शामिल होने के लिए बुलाया। मगर डेरामुखी ने इस नोटिस की कोई परवाह नहीं की और न ही जांच में शामिल होने सीबीआई मुख्यालय पहुंचे। सीबीआई ने इसके बाद दो और नोटिस डेरामुखी को भिजवाए। इसके बावजूद डेरामुखी जांच में शामिल नहीं हुए।
चूंकि बिना डेरामुखी के शामिल हुए सीबीआई जांच आगे बढ़ने में असमर्थ थी। लिहाजा सीबीआई को एक बड़ा जोखिम उठाना पड़ा। सीबीआई ने जांच अफसर के नेतृत्व में टीम को इस मर्डर केस में डेरामुखी गुरमीत सिंह से पूछताछ करने सिरसा भेजा। सिरसा के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में इस टीम को ठहराया गया और स्थानीय पुलिस द्वारा टीम को कड़ी सुरक्षा मुहैय्या करवाई गई।
मगर सीबीआई डेरे के भीतर प्रवेश करे, इससे पहले रेस्ट हाउस में ही एक विशेष मीटिंग रखी गई। जिसमें सीबीआई टीम सदस्यों समेत कुछ नेता और मुख्य डेरा अनुयायी शामिल रहे। मीटिंग में डेरा अनुयायियों ने सीबीआई पर दबाव बनाया कि सीबीआई बिना हथियारों के डेरे में जाएगी। इससे सीबीआई दबाव में तो थी, लेकिन इस मौके को छोड़ना भी नहीं चाहती थी।
लिहाजा सीबीआई ने बड़ा जोखिम उठाते हुए निहत्थे ही डेरे में प्रवेश करने का फैसला लिया। डेरे में प्रवेश होने के बाद सीबीआई टीम को एक बड़े हाल में काफी देर तक बिठाया गया और फिर डेरामुखी वहां पहुंचे। छत्रपति मर्डर केस से जुडे़ कई अहम सवालों की फेहरिस्त लेकर डेरामुखी के सामने पहुंची सीबीआई ने डेरामुखी के समक्ष सवाल दागने शुरू किए। लेकिन डेरामुखी ने बहुत ही सहजता से सीबीआई के हर सवाल का गोलमाल जवाब देते हुए अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को खारिज कर दिया और फिर हॉल से उठकर चले गए।