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बिना टांके के घुटना बदला...और चलने लगा मरीज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 15 Mar 2015 08:52 PM IST
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संगरूर निवासी 52 साल की मरीज बलजीत कौर अपने दोनों घुटनों का प्रत्यारोपन करा 24 घंटे के अंदर चलने फिरने लायक हो चुकी है। ऐसा हुआ है डॉ. जतिंदर सिंगला, सीनियर कंसलटेंट, आर्थोपेडिक्स, मायो हेल्थकेयर सुपरस्पेशियलटी अस्पताल द्वारा की गई स्टिचलैस नी रीप्लेसमेंट सर्जरी से।
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ट्राईसिटी की यह पहली सर्जरी है जिसमें मरीज के घुटना प्रत्यारोपन के बाद घुटनों पर स्टिचिस नहीं लगे हैं। ये मुमकिन हुआ है सेक्टर 69 गुरुद्वारा सिंह शहीदां के पास स्थित मायो हेल्थकेयर सुपर स्पेशियलटी अस्पताल में। मरीज बलजीत कौर के दोनों घुटनों का प्रत्यारोपन बुधवार शाम यानी 11 मार्च को किया गया था और वह वीरवार दोपहर 2 बजे अपने दम पर चलने घूमने लायक हो गईं थीं।
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डॉ. जतिंदर सिंगला ने बताया कि मरीज को ओस्टियोअर्थराइटिस की दिक्कत थी और वह पिछले छह सालों में चलने फिरने तक को मोहताज हो गईं थीं। क्योंकि यह स्टिचलैस नी रीप्लेसमेंट हैं इसलिए मरीज की रीक्वरी तेजी से होती है इसी वजह से मरीज सर्जरी उपरांत 24 घंटे की भीतर ही चलने घूमने लायक हो जाता है।
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क्या है स्टिचलैस नी रीप्लेसमेंट
सर्जरी के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. सिंगला ने बताया कि क्योंकि मरीज को ओस्टियोअर्थराइटिस की शिकायत रही है, जिस वजह से वह काफी दर्द में रहीं थीं इसी वजह से हमने इन पर स्टिचलैस नी रीप्लेसमेंट सर्जरी करने की सोची ताकि मरीज को कम से कम दर्द बर्दाश्त करना पड़े और रीक्वरी भी सबसे तेज रहे।
ये सर्जरी पहली बार ट्राईसिटी में हमने की है हालांकि दिल्ली इत्यादि में अस्पतालों में इस सर्जरी द्वारा बहुत कम केस ही हो पाए हैं।
इस सर्जरी स्पेशल मेडिकेटिड स्टिचिस स्किन के अंदर लगाए जाते हैं जो कि जल्द ही हील हो जाते हैं। बाहर टांके न लगने से मरीज को दर्द दूसरी नी रीप्लेसमेंट सर्जरी के मुकाबले में काफी कम होता है या यूं कहें नामात्र ही दर्द होता है।
प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत नहीं
क्योंकि स्किन पर टांके नहीं लगाए जाते तो टांकों की वजह से बने दागों को हटाने के लिए किसी प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है हालांकि बाकी सर्जरी में अकसर मरीज प्लास्टिक सर्जरी करवाते हैं।
सर्जरी के बारे में जानकारी देती बलजीत कौर ने बताया कि इतने सालों के बाद बिना दर्द के अपने पैरों पर चलने का एहसास काफी सुकूनदायक है। इससे पहले दर्द की वजह से मैं अपने घर के कामकाज तक नहीं कर पाती थी।
सर्जरी के फायदे
डॉ. सिंगला ने बताया कि 24 घंटे के अंदर मरीज चलने फिरने लायक, किसी तरह का रक्त रिसाव नहीं होता, बार बार मरहम पट्टी करवाने की जरूरत नहीं पड़ती, इंफे क्शन के आसार भी काफी कम हो जाते हैं, मरीज की रीक्वरी भी काफी तेजी से होती है।