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Chandigarh News: चार गवाहों के दर्ज हुए बयान, आईपीएस जैदी ने सीबीआई के जमानत कैंसिल के आवेदन का दिया जवाब

Tue, 26 Nov 2024 07:01 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 26 Nov 2024 07:01 AM IST
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Statements of four witnesses recorded, IPS Zaidi responded to CBI's bail cancellation application.
चंडीगढ़। हिमाचल के शिमला में पुलिस हिरासत के दौरान युवक की मौत होने पर दर्ज हत्या के मामले में सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान बचाव पक्ष के चार गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनसे अभी क्रॉस एग्जामिनेशन पूरा नहीं हो सका है। वहीं, इस मामले में आईपीएस सैयद जहूर हैदर जैदी की ओर से महिला अधिकारी गवाह को धमकाने के मामले में सीबीआई की ओर से जमानत याचिका कैंसिल करने के लिए कोर्ट में दायर आवेदन पर भी अपना जवाब दाखिल कर दिया है। इस पर 28 नवंबर को दोनों पक्षों के बीच बहस होगी और सीबीआई के आवेदन पर फैसला सुनाया जाएगा। इस मामले में आज फिर से सुनवाई होगी।
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धमकाने के आरोप पर बहस 28 को
कुछ दिन पहले सीबीआई ने कोर्ट में आवेदन किया था कि आरोपी आईपीएस ने एक महिला अधिकारी गवाह को धमकाया है, इसलिए उसकी जमानत याचिका खारिज की जाए। इस आवेदन पर आईपीएस जैदी के वकील ने सोमवार को कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है, लेकिन उस पर अभी फैसला 28 नवंबर को होने वाली बहस के बाद ही सुनाया जाएगा। वहीं, सोमवार को सुनवाई के दौरान डीआईजी गुरदेव चंद शर्मा, प्रकाश भारद्वाज, मुकेश कुमार और मदन कांत के बयान दर्ज किए गए हैं।
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पुलिस हिरासत में हो गई थी मौत
शिमला के कोटखाई में 4 जुलाई, 2017 को 16 वर्षीय एक छात्रा स्कूल से लौटते वक्त लापता हो गई थी। 6 जुलाई को कोटखाई के तांदी के जंगल में छात्रा का शव निर्वस्त्र हालत में मिला। पुलिस ने जांच में पाया कि छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या की गई थी। इस मामले की जांच के लिए शिमला के तत्कालीन आईजी सैयद जहूर हैदर जैदी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई। एसआईटी ने इस मामले में एक स्थानीय युवक सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक नेपाली युवक सूरज की कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई की जांच में पता लगा कि आरोपी सूरज की मौत पूछताछ के दौरान पुलिस प्रताड़ना के कारण हुई थी। इसके आधार पर सीबीआई ने आईजी जैदी सहित मामले से जुड़े नौ अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ हत्या की धारा 302, सुबूत खुर्द-बुर्द करने की धारा 201 सहित अन्य कई संगीन धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। वर्ष 2017 में इस मामले को शिमला जिला अदालत से चंडीगढ़ सीबीआई अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया था और यह मामला अभी विचाराधीन है।
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