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पंजाब की जेलों में सुरक्षा के लिए टास्क फोर्स गठन करने की तैयारी, 1000 खाली पोस्टें भी भरी जाएंगी

Wed, 03 Jul 2019 02:23 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 03 Jul 2019 02:23 PM IST
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special task force will appoint in punjab jails for security
फाइल फोटो
न्यू नाभा जेल में बेअदबी मामलों के आरोपी की हत्या और लुधियाना सेंट्रल जेल में हिंसा के बाद पंजाब का जेल विभाग एक बार फिर जेलों की पुख्ता सुरक्षा को लेकर हरकत में आ गया है। वह सभी कमियां जो अब तक विभाग के ध्यान में तो थीं, लेकिन जिनके बारे में ढिलाई बरती जा रही थी, लेकिन फिर से विचार शुरू हो गया है। सूबे के जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने एलान किया है कि जेलों की सुरक्षा के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा।
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जेल मंत्री ने माना है कि इस समय जेलों में स्टाफ के करीब 1000 पद खाली हैं। हालांकि जेल वार्डन के 400 पद भरने के लिए आवेदन मांगे गए हैं, लेकिन उसके बाद भी 700 पद खाली रह जाएंगे। उल्लेखनीय है कि राज्य की जेलों में कुल 2740 पद जेल वार्डन के हैं, जिनमें से 2040 पद ही भरे हुए हैं। इन कर्मचारियों पर जेलों में न सिर्फ साधारण कैदियों बल्कि गैंगस्टर और दुर्दांत कैदियों की निगरानी का भी जिम्मा है।
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जेल मंत्री का कहना है कि इन पदों को जल्दी भरा जाएगा लेकिन उससे पहले स्पेशल टास्क फोर्स का गठन जेलों में गंभीर अपराधों वाले कैदियों के लिए बने हाई सिक्योरिटी जोनों की सुरक्षा पुख्ता की जाएगी। इस बीच, केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के जेलों की सुरक्षा सीआरपीएफ के हवाले करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिए जाने के बाद भी फिलहाल इस फोर्स की नियुक्ति में और एक महीने का समय लग सकता है। वहीं, जेल विभाग को सीआरपीएफ की तैनाती से इन फोर्स पर होने वाला खर्च भी सताने लगा है, जो 24 करोड़ रुपये सालाना होगा।
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वित्तीय संकट से जूझ रहा है जेल विभाग

दूसरी ओर, जेलों में नशा और मोबाइल फोन की कैदियों तक पहुंच रोकने के लिए जेल विभाग पहले ही पैसे की कमी से परेशान है। जेल मंत्री ने बीते दिनों कैदियों तक अवैध सामान की पहुंच रोकने के लिए जेलों में बाडी स्कैनर लगाने का इरादा जाहिर किया था लेकिन इसके लिए राज्य सरकार से कोई वित्तीय मदद न मिलती देख, केंद्र सरकार के सहयोग मांगा गया है। फिलहाल जेल विभाग द्वारा कुछ चुनिंदा  जेलों में ही बॉडी स्कैनर लगाए जा सके हैं, क्योंकि एक बॉडी स्केनर की कीमत डेढ़ करोड़ से अधिक है और जेल विभाग इतनी बड़ी राशि का प्रबंध करने में असमर्थ है।
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