सोनिया की महम रैली इतनी महत्वपूर्ण क्यों?
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सियासीफिजा का रुख बदलने के लिए देशभर में विख्यात महम चौबीसी नेहरू-गांधी खानदान की चौथी शख्सियत की अगुवाई को तैयार है। चुनावी बेला पर दस्तूर भी है और मौका भी।
4 अक्टूबर को नेहरू-गांधी परिवार की बहू और कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी महम से प्रदेश में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत कर रही हैं।
बेशक, कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी चुनावी मौसम में चौबीसी की धरा पर आ रही हों, लेकिन उनके पूर्वज आजादी से पहले ही चौबीसी से जुड़े रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी चौबीसी से आजादी और सत्ता परिवर्तन की लड़ाई की हुंकार भरते रहे हैं।
24 साल पहले महम गोली कांड को हथियार बनाकर ही कांग्रेस ने देश व प्रदेश की गैर कांग्रेसी सरकार को सत्ता से बेदखल किया था।
महम, चौबीसी से परिवार का रहा राजनीतिक जुड़ाव
आजादी के पहले से ही इस परिवार का चौबीसी से राजनीतिक जुड़ाव रहा है। यहां के युवाओं को आजादी की लड़ाई में अहम योगदान रहा। 1938 में पंडित जवाहर लाल नेहरू महम आए और स्वतंत्रता सेनानियों से मिले।
आजादी के 35 साल बाद, 16 मई 1982 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भिवानी रोड स्थित राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल कैंपस में सभा को संबोधित किया था।
1990 में महम में हुए विधानसभा उपचुनाव में हिंसा हुई। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी राहुल गांधी को लेकर यहां आए। वे महम कांड में मारे गए पीड़ितों के घर पहुंचे। गोली कांड को संसद में उठाया। महम कांड बड़ा मुद्दा बना।
देश और प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और कांग्रेस सत्ता में आई। महम देशभर के सियासी पटल पर छा गया। अब 24 साल बाद एक बार फिर नेहरू-गांधी परिवार की बहू सोनिया गांधी चुनावी मौसम में महम आ रही हैं।
ये दिग्गज भी पहुंचे चबूतरे पर
पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल की कर्मस्थली रहे चौबीसी से वे तीन बार विधायक बने। देवीलाल ही महम के सियासी गढ़ में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर, नीतिश कुमार सहित सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव, तेलगूदेशम प्रमुख चंद्र बाबू नायडू और अकाली दल सुप्रीमो प्रकाश सिंह बादल को चबूतरे पर लेकर आए। पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह भी महम आए।
दिसंबर 2004 में राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख अजित सिंह, जनवरी 2005 में बसपा सुप्रीमो कुमारी मायावती पहुंचे। चुनाव प्रक्रिया में क्रांतिकारी सुधार लाने वाले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषन भी चबूतरे पर आम जन से रूबरू हुए थे।