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बांसुरी की धुन से गंजा ट्राइसिटी
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 26 Oct 2013 12:09 PM IST
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इंडियन नेशनल थियेटर की ओर से आयोजित चंडीगढ़ संगीत सम्मेलन के दौरान प्रतिष्ठित बांसुरी वादक बहनें सुचिष्मता और देबप्रिया चटर्जी ने अपनी प्रस्तुति से सबका दिल जीत लिया।
चंडीगढ़ के बाल भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में हिंदुस्तानी क्लासिकल वोकलिस्ट रंजनी रामचंद्रन की प्रस्तुति भी श्रोताओं को पसंद आई।
सुचिष्मता और देबप्रिया दोनों ही इलाहबाद के एक संगीत प्रेमी परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता राबिन और माता कृष्णा चटर्जी जाने-माने संगीतज्ञ हैं।
सुचिष्मता ने बताया कि दिवंगत पं. भोलानाथ प्रसन्ना के निर्देशन में उन्होंने बांसुरी वादन का शुरुआती ज्ञान लिया। फिर बांसुरी वादक पद्म विभूषण पं. हरिप्रसाद चौरसिया से तालीम ली।
उन्होंने वोकल और फ्लूट दोनों में टॉपर रहते हुए प्रयाग संगीत समिति इलाहबाद से ‘संगीत प्रभाकर’ और ‘संगीत प्रवीण’ की पढ़ाई पूरी की। अब वे ‘आकाशवाणी’ मुंबई से जुड़ी हुई हैं। वे अब तक अमेरिका, ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेेलिया, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम, हॉलैंड, लंदन, दुबई, श्रीलंका और मस्कट में प्रस्तुतियां दे चुकी हैं।
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इसी तरह रंजनी रामचंद्रन युवा पीढ़ी की बेजोड़ हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका हैं। उनकी माता विजया ने उन्हें छोटी उम्र में ही हिंदुस्तानी संगीत की प्रारंभिक शिक्षा देनी शुरू कर दी थी। बाद में उन्होंने वीणा सहस्त्रबुद्धे विद्या प्राप्त की।
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चंडीगढ़ के बाल भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में हिंदुस्तानी क्लासिकल वोकलिस्ट रंजनी रामचंद्रन की प्रस्तुति भी श्रोताओं को पसंद आई।
सुचिष्मता और देबप्रिया दोनों ही इलाहबाद के एक संगीत प्रेमी परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता राबिन और माता कृष्णा चटर्जी जाने-माने संगीतज्ञ हैं।
सुचिष्मता ने बताया कि दिवंगत पं. भोलानाथ प्रसन्ना के निर्देशन में उन्होंने बांसुरी वादन का शुरुआती ज्ञान लिया। फिर बांसुरी वादक पद्म विभूषण पं. हरिप्रसाद चौरसिया से तालीम ली।
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उन्होंने वोकल और फ्लूट दोनों में टॉपर रहते हुए प्रयाग संगीत समिति इलाहबाद से ‘संगीत प्रभाकर’ और ‘संगीत प्रवीण’ की पढ़ाई पूरी की। अब वे ‘आकाशवाणी’ मुंबई से जुड़ी हुई हैं। वे अब तक अमेरिका, ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेेलिया, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम, हॉलैंड, लंदन, दुबई, श्रीलंका और मस्कट में प्रस्तुतियां दे चुकी हैं।
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इसी तरह रंजनी रामचंद्रन युवा पीढ़ी की बेजोड़ हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका हैं। उनकी माता विजया ने उन्हें छोटी उम्र में ही हिंदुस्तानी संगीत की प्रारंभिक शिक्षा देनी शुरू कर दी थी। बाद में उन्होंने वीणा सहस्त्रबुद्धे विद्या प्राप्त की।