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दो मरीजों के लिए मसीहा बने सोलन के ज्ञानचंद
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चंडीगढ़। पीजीआई में पिछले दस दिन के भीतर तीसरे मृतक व्यक्ति का अंगदान किया गया। सोलन के नालागढ़ निवासी ज्ञानचंद एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पीजीआई में उनका इलाज हुआ, लेकिन वे कोमा से बाहर नहीं आ सके। इसके बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। परिजनों से अंगदान की स्वीकृति मिलने के बाद उनके अंग सुरक्षित निकाले गए और दूसरे मरीजों में ट्रांसप्लांट किए गए, जो पूरी तरह से सफल काम कर रहे हैं।
पीजीआई प्रशासन ने बताया कि 3 जनवरी को नालागढ़ निवासी ज्ञानचंद टू व्हीलर से अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी। इससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए, हादसे में उनके सिर में काफी चोटें आईं थीं। उन्हें स्थानीय सिविल अस्पताल में दाखिल कराया गया। यहां कोई सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया। पीजीआई के डाक्टरों ने भी भरपूर कोशिश की, लेकिन ज्ञानचंद कोमा से बाहर नहीं आ सके। पीजीआई के ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने ज्ञानचंद के परिजनों से बात कर अंगदान की बात कही। परिजन अंगदान के लिए तैयार हो गए। इस पर पीजीआई के डाक्टरों ने उनकी किडनी, पेनक्रियाज और कोर्निया सुरक्षित निकाल लिए हैं। किडनी और पेनक्रियाज जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट कर दिया गया है, जबकि कोर्निया को सुरक्षित रख लिया गया है।
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पीजीआई प्रशासन ने बताया कि 3 जनवरी को नालागढ़ निवासी ज्ञानचंद टू व्हीलर से अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी। इससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए, हादसे में उनके सिर में काफी चोटें आईं थीं। उन्हें स्थानीय सिविल अस्पताल में दाखिल कराया गया। यहां कोई सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया। पीजीआई के डाक्टरों ने भी भरपूर कोशिश की, लेकिन ज्ञानचंद कोमा से बाहर नहीं आ सके। पीजीआई के ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने ज्ञानचंद के परिजनों से बात कर अंगदान की बात कही। परिजन अंगदान के लिए तैयार हो गए। इस पर पीजीआई के डाक्टरों ने उनकी किडनी, पेनक्रियाज और कोर्निया सुरक्षित निकाल लिए हैं। किडनी और पेनक्रियाज जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट कर दिया गया है, जबकि कोर्निया को सुरक्षित रख लिया गया है।
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