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छोटे प्लॉट, बड़ी उड़ान: 68 फीट तक ऊंची होंगी इंडस्ट्रियल बिल्डिंग
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया में नए निर्माण और विस्तार की संभावनाएं बढ़ने जा रही हैं। मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित बदलाव के तहत एफएआर 0.75 से बढ़ाकर 2 और ग्राउंड कवरेज 60 फीसदी करने पर सहमति बन चुकी है। इसके साथ कुछ औद्योगिक भवनों की ऊंचाई 68 फीट तक हो सकेगी। इससे छोटे और बड़े प्लॉटों पर तीन-चार मंजिल तक निर्माण का रास्ता साफ होगा। स्टोरेज, वेयरहाउसिंग और आईटी से जुड़ी गतिविधियों को खास लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, उद्योगपतियों का कहना है कि इस बदलाव का पूरा लाभ तभी मिलेगा, जब एफएआर के लिए अतिरिक्त शुल्क न लिया जाए, पुराने भवनों में व्यावहारिक राहत मिले और औद्योगिक क्षेत्र में सहायक कारोबारी गतिविधियों का दायरा बढ़े।
प्रस्तावित संशोधन को प्रशासन की हेरिटेज कमेटी मंजूरी दे चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद पीएमओ की टास्क फोर्स ने चंडीगढ़ प्रशासन के साथ औद्योगिक क्षेत्र की जरूरतों और मौजूदा नियमों की समीक्षा की थी। पीएमओ की सहमति के बाद अब प्रशासक की अंतिम मंजूरी बाकी है। सीमित जमीन और कम एफएआर के कारण उद्योगों के पंचकूला और मोहाली जाने की आशंका जताई जाती रही है। नए प्रावधानों से चंडीगढ़ में ही विस्तार का अवसर मिलने की उम्मीद है।
छोटे प्लॉटों को ज्यादा फायदा, बड़े में एफएआर इस्तेमाल आसान
लघु उद्योग भारती चंडीगढ़ के अध्यक्ष अवि भसीन ने कहा कि दो कनाल से छोटे प्लॉटों पर एफएआर 2 से स्टॉक, कार्यालय और अन्य सेवाओं के लिए अतिरिक्त जगह मिलेगी। चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के वाइस प्रेसिडेंट नवीन मंगलानी ने बताया कि दो कनाल से छोटे प्लॉट आर्किटेक्चरल कंट्रोल एक्ट के तहत हैं, इसलिए मौजूदा भवन में एफएआर 2 का पूरा लाभ हर जगह नहीं मिल सकेगा। नया भवन बनाने पर इसका पूरा इस्तेमाल संभव होगा। दो कनाल से बड़े प्लॉट जोनिंग नियमों के तहत हैं, इसलिए वहां एफएआर 2 लागू करना आसान होगा।
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अतिरिक्त शुल्क न लगे, पुराने भवनों में राहत
मंगलानी ने एफएआर 2 के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं लेने की मांग की। उन्होंने बताया कि पंचकूला में एफएआर 2.5 और मोहाली में 3 है, जबकि चंडीगढ़ में अब तक 0.75 था। उद्योगपति वरिंदर सिंह सलूजा ने पुराने भवनों को मजबूत कर अतिरिक्त निर्माण की अनुमति देने की मांग की, ताकि उन्हें तोड़कर दोबारा बनाने का खर्च न उठाना पड़े। उद्योगपतियों ने ग्राउंड कवरेज 60 से बढ़ाकर 80 फीसदी करने और ओपन कोर्टयार्ड को जरूरत के अनुसार कवर करने की अनुमति भी मांगी है। इसके लिए अग्नि सुरक्षा और वेंटिलेशन समेत भवन नियमों का पालन जरूरी होगा।
बैंकिंग से सर्विस सेंटर तक की मांग
उद्योगपतियों ने बैंकिंग, रेस्टोरेंट, सर्विस सेंटर और अन्य जरूरी आउटलेट को शर्तों के साथ अनुमति देने की मांग की। उनके अनुसार इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 में नए प्रावधानों का सबसे ज्यादा लाभ मिल सकता है।
प्रस्तावित संशोधन को प्रशासन की हेरिटेज कमेटी मंजूरी दे चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद पीएमओ की टास्क फोर्स ने चंडीगढ़ प्रशासन के साथ औद्योगिक क्षेत्र की जरूरतों और मौजूदा नियमों की समीक्षा की थी। पीएमओ की सहमति के बाद अब प्रशासक की अंतिम मंजूरी बाकी है। सीमित जमीन और कम एफएआर के कारण उद्योगों के पंचकूला और मोहाली जाने की आशंका जताई जाती रही है। नए प्रावधानों से चंडीगढ़ में ही विस्तार का अवसर मिलने की उम्मीद है।
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छोटे प्लॉटों को ज्यादा फायदा, बड़े में एफएआर इस्तेमाल आसान
लघु उद्योग भारती चंडीगढ़ के अध्यक्ष अवि भसीन ने कहा कि दो कनाल से छोटे प्लॉटों पर एफएआर 2 से स्टॉक, कार्यालय और अन्य सेवाओं के लिए अतिरिक्त जगह मिलेगी। चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के वाइस प्रेसिडेंट नवीन मंगलानी ने बताया कि दो कनाल से छोटे प्लॉट आर्किटेक्चरल कंट्रोल एक्ट के तहत हैं, इसलिए मौजूदा भवन में एफएआर 2 का पूरा लाभ हर जगह नहीं मिल सकेगा। नया भवन बनाने पर इसका पूरा इस्तेमाल संभव होगा। दो कनाल से बड़े प्लॉट जोनिंग नियमों के तहत हैं, इसलिए वहां एफएआर 2 लागू करना आसान होगा।
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अतिरिक्त शुल्क न लगे, पुराने भवनों में राहत
मंगलानी ने एफएआर 2 के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं लेने की मांग की। उन्होंने बताया कि पंचकूला में एफएआर 2.5 और मोहाली में 3 है, जबकि चंडीगढ़ में अब तक 0.75 था। उद्योगपति वरिंदर सिंह सलूजा ने पुराने भवनों को मजबूत कर अतिरिक्त निर्माण की अनुमति देने की मांग की, ताकि उन्हें तोड़कर दोबारा बनाने का खर्च न उठाना पड़े। उद्योगपतियों ने ग्राउंड कवरेज 60 से बढ़ाकर 80 फीसदी करने और ओपन कोर्टयार्ड को जरूरत के अनुसार कवर करने की अनुमति भी मांगी है। इसके लिए अग्नि सुरक्षा और वेंटिलेशन समेत भवन नियमों का पालन जरूरी होगा।
बैंकिंग से सर्विस सेंटर तक की मांग
उद्योगपतियों ने बैंकिंग, रेस्टोरेंट, सर्विस सेंटर और अन्य जरूरी आउटलेट को शर्तों के साथ अनुमति देने की मांग की। उनके अनुसार इंडस्ट्रियल एरिया फेज-3 में नए प्रावधानों का सबसे ज्यादा लाभ मिल सकता है।