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लघु औद्योगिक इकाइयां और कारखाने सील
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Wed, 29 Jan 2014 01:24 AM IST
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर गमाडा की स्पेशल इन्फोर्समेंट टीम द्वारा जिला मोहाली के साथ लगते कई क्षेत्र में पेरीफेरी क्षेत्र में आने वाली औद्योगिक इकाईयों एवं लघु उद्योग और कारखानों को बंद करा दिया गया है अथवा सील किया गया है।
गमाडा की इस कार्रवाई से बड़ी संख्या में व्यवसायी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। उनके यहां काम करने वाले कर्मचारी भी बेकार हो गए हैं। अधिकारियों की मानें तो मिक्स लैंड यूज एवं रिहायशी क्षेत्रों में औद्योगिक इकाई एवं लघु उद्योग और कारखाने लगाने पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगा दी गई है।
हाईकोर्ट द्वारा एक मामले की सुनवाई के दौरान 22 जनवरी 2014 को गमाडा को आदेश जारी किए गए हैं कि पेरीफेरी के तहत रिहायशी क्षेत्रों में चल रहे सभी कारखानों को बंद कराया दिया जाए।
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इस पर कार्रवाई करते हुए गमाडा की टीम ने गांव बलौंगी, दाऊ, बड़ माजरा सहित साथ लगते क्षेत्रों में इन औद्योगिक इकाइयों को बंद कराने की कार्यवाही जारी रखते हुए मंगलवार को भी कई कारखानों को सील किया गया। यहां तक कि आटा चक्की, वैल्ंिडग के कारखानें भी सील किए।
अमरजीत सिंह गोगी नामक वैल्डिंग कारोबारी का कहना है कि उन्हें गत दिवस गमाडा की टीम ने चेतावनी दी थी कि वह अपना काम बंद कर दें, अन्यथा सील कर दिया जाएगा। इसके बाद उन्होंने गांव बलौंगी में पिछले 25 वर्षों से चल रहे अपने कारखाने से सभी मशीनें हटवा दीं हैं। पिछले दो दिन से उनका काम बंद है और वह बेरोजगार हो गए हैं। अब वह किसी अन्य स्थान पर कारोबार शुरू करने पर विचार करने पर विवश हैं।
गांव बलौंगी की आदर्श कालोनी में आटा चक्की चलाने वाले जसवंत सिंह एवं सुरजीत सिंह, वैल्डिंग की दुकान करने वाले सुखदर्शन सिंह काका की दुकान को भी सील कर दिया गया है। उनका कहना है कि उनका मूल व्यवसाय एवं आमदनी का स्रोत ही उनसे छिन गया है।
इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों की दुकानें अथवा कारखाने सील किए गए हैं। उनसे हलफनामा लेकर उनकी दुकानें खोली जाएंगी। इस हलफनामे में उन्हें लिखकर देना होगा कि वह भविष्य में रिहायशी क्षेत्र में मशीनें लगाकर कारखाना नहीं चलाऐंगे।
गमाडा स्टेेट ऑफिसर हरमेश कुमार खुल्लर के अनुसार हाइकोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार को है। गमाडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर उक्त कार्रवाई संबंधी जवाब दाखिल करेंगे।
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गमाडा की इस कार्रवाई से बड़ी संख्या में व्यवसायी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। उनके यहां काम करने वाले कर्मचारी भी बेकार हो गए हैं। अधिकारियों की मानें तो मिक्स लैंड यूज एवं रिहायशी क्षेत्रों में औद्योगिक इकाई एवं लघु उद्योग और कारखाने लगाने पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगा दी गई है।
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हाईकोर्ट द्वारा एक मामले की सुनवाई के दौरान 22 जनवरी 2014 को गमाडा को आदेश जारी किए गए हैं कि पेरीफेरी के तहत रिहायशी क्षेत्रों में चल रहे सभी कारखानों को बंद कराया दिया जाए।
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इस पर कार्रवाई करते हुए गमाडा की टीम ने गांव बलौंगी, दाऊ, बड़ माजरा सहित साथ लगते क्षेत्रों में इन औद्योगिक इकाइयों को बंद कराने की कार्यवाही जारी रखते हुए मंगलवार को भी कई कारखानों को सील किया गया। यहां तक कि आटा चक्की, वैल्ंिडग के कारखानें भी सील किए।
अमरजीत सिंह गोगी नामक वैल्डिंग कारोबारी का कहना है कि उन्हें गत दिवस गमाडा की टीम ने चेतावनी दी थी कि वह अपना काम बंद कर दें, अन्यथा सील कर दिया जाएगा। इसके बाद उन्होंने गांव बलौंगी में पिछले 25 वर्षों से चल रहे अपने कारखाने से सभी मशीनें हटवा दीं हैं। पिछले दो दिन से उनका काम बंद है और वह बेरोजगार हो गए हैं। अब वह किसी अन्य स्थान पर कारोबार शुरू करने पर विचार करने पर विवश हैं।
गांव बलौंगी की आदर्श कालोनी में आटा चक्की चलाने वाले जसवंत सिंह एवं सुरजीत सिंह, वैल्डिंग की दुकान करने वाले सुखदर्शन सिंह काका की दुकान को भी सील कर दिया गया है। उनका कहना है कि उनका मूल व्यवसाय एवं आमदनी का स्रोत ही उनसे छिन गया है।
इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों की दुकानें अथवा कारखाने सील किए गए हैं। उनसे हलफनामा लेकर उनकी दुकानें खोली जाएंगी। इस हलफनामे में उन्हें लिखकर देना होगा कि वह भविष्य में रिहायशी क्षेत्र में मशीनें लगाकर कारखाना नहीं चलाऐंगे।
गमाडा स्टेेट ऑफिसर हरमेश कुमार खुल्लर के अनुसार हाइकोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार को है। गमाडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर उक्त कार्रवाई संबंधी जवाब दाखिल करेंगे।