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किसानों का बड़ा एलान: 26 नवंबर को देशभर के राजभवनों तक करेंगे मार्च, 14 को दिल्ली में बड़ी बैठक
Tue, 25 Oct 2022 07:38 PM IST
ajay kumar
पीटीआई, चंडीगढ़
पीटीआई, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 25 Oct 2022 07:38 PM IST
सार
पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसानों ने नवंबर 2020 में दिल्ली की सीमाओं पर केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन किया था। किसानों की मांग पर केंद्र की मोदी सरकार ने नवंबर 2021 में कृषि कानूनों को वापस ले लिया था।
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किसान।
- फोटो : एएनआई
विस्तार
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन की दूसरी वर्षगांठ पर संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने मंगलवार को देशभर में 26 नवंबर को 'राजभवन मार्च' का आह्वान किया है। बता दें कि अब केंद्र सरकार तीन कृषि कानूनों को निरस्त कर चुकी है। संयुक्त किसान संगठन में कई किसान संगठन शामिल हैं। अपने एक बयान में संयुक्त किसान संगठन ने कहा कि वह देशभर के राजभवन मार्च और ज्ञापन को अंतिम रूप देने की खातिर 14 नवंबर को दिल्ली में एक बैठक का आयोजन करेगा।
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बता दें कि राजभवन तक देशव्यापी मार्च आयोजित करने का आह्वान एसकेएम समन्वय समिति और मसौदा समिति की एक ऑनलाइन बैठक में किया गया था। इस बैठक में किसान नेता हन्नान मोल्ला, दर्शन पाल, युद्धवीर सिंह, मेधा पाटकर, राजाराम सिंह, अतुल कुमार अंजन, सत्यवान, अशोक धवले, अविक साहा, सुखदेव सिंह, रमिंदर सिंह, विकास शिशिर और डॉ. सुनीलम शामिल थे।
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बैठक में निर्णय लिया गया कि एसकेएम के नेतृत्व वाले किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष के दो साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 26 नवंबर को देशभर के राजभवनों तक किसानों का बड़ा मार्च निकाला जाएगा। किसान नेताओं ने कहा कि विभिन्न राज्यों में राजभवन मार्च की तैयारी चल रही है।
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किसान संगठनों ने केंद्र सरकार द्वारा वन संरक्षण अधिनियम के नियमों में किए जा रहे बदलावों की निंदा की। उन्होंने 15 नवंबर को शहीद बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर अपने अधिकारों के लिए लड़ने वाले आदिवासी संगठनों के साथ एकजुटता बढ़ाने का भी फैसला किया।
पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसानों ने नवंबर 2020 में दिल्ली की सीमाओं पर केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन किया था। किसानों की मांग पर केंद्र की मोदी सरकार ने नवंबर 2021 में कृषि कानूनों को वापस ले लिया था।
कानूनों को वापस लेने के बावजूद किसानों ने धरनास्थल को खाली करने से मना कर दिया था। उन्होंने किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने, एमएसपी पर कानूनी गारंटी और आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की थी। केंद्र ने पिछले साल नौ दिसंबर को किसानों की अन्य लंबित मांगों पर विचार करने पर सहमति जताई थी। इसके बाद एसकेएम ने एक साल से अधिक समय से चल रहे आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा की थी।