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बच्चों में भी आम हुईं स्किन की बीमारियां
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Thu, 14 Nov 2013 09:28 AM IST
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आज बाल दिवस है। जगह-जगह कार्यक्रम होंगे। तो चलिए, हम भी संकल्प लें कि बच्चों को न तो लाड़-प्यार की कमी होने देंगे और न ही उनकी परवरिश में...।
भागदौड़ भरी जिंदगी में आजकल अभिभावक इतने व्यस्त हो गए हैं कि उनके पास बच्चों पर ध्यान देने के लिए भी समय नहीं है।
बच्चों की बिगड़ती लाइफ स्टाइल और बचपन में ही जरूरत से ज्यादा पढ़ाई के स्ट्रेस से उन्हें बचपन से ही बीमारियां जकड़ लेती हैं। खासकर स्किन की बीमारियां।
जैसे फैनाइटिश, हर्सोटिज्म, फेस पर अत्यधिक मुहासे, कास्मेटिक डर्मेटाइटिश, कान पर रेसा (कान के ऊपर लाल दाने का निकलना), फंगश इनफेक्शन आदि। इन बीमारियों की चपेट में 7 से 13 साल के बच्चे ज्यादा आने लगे हैं।
अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डालें तो अब युवाओं की तरह बच्चों में भी स्किन की बीमारियां होने लगी हैं। 10 साल से इसका ग्राफ 50 फीसदी तक बढ़ा है।
वजह यह है कि बड़ों की तुलना में बच्चों की त्वचा ज्यादा सेंसेटिव होती है। ऐसे में उनकी देखरेख का भी खास ख्याल रखना होगा।
ये बीमारियां हुईं आम
फंगश इन्फेक्शन (सफेद दाने निकलना)
सोराइसेज (शरीर पर सफेद दानों का निकलना)
फैनाइटिश (बाल का जल्दी सफेद होना)
हर्सोटिज्म (चेहरे पर अनचाहे बाल)
मुहासे (चेहरे पर दाग-धब्बे)
कास्मेटिक डर्मेटाइटिश (कास्मेटिक्स के धड़ल्ले प्रयोग से स्किन प्राब्लम)
फंगश इनफेक्शन
फंगश इनफेक्शन का सही समय पर इलाज नहीं कराया गया तो बच्चों में आगे चलकर गंजापन की समस्या आ जाती है।
सोराइसेज
सोराइसेज (शरीर पर सफेद दानों का निकलना) की चपेट में आने से लोग छुआछूत की बीमारी समझकर उनसे अलग-थलग रहने लगते हैं। ऐसे में बच्चे डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। लेकिन, हकीकत यह है कि सोराइसेज छुआछूत की बीमारी नहीं है।
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फैनाइटिश
बच्चों में फैनाइटिश (बाल का जल्दी सफेद होना) के केस सात साल से अस्पताल में आने लगे हैं। पहले यह बीमारी 18 साल की उम्र से शुरू होती थी।
हर्सोटिज्म
अब 12 से 13 साल की उम्र में ही बच्चियों के चेहरे पर अनचाहे बाल आने लगे हैं। स्किन स्पेशलिस्ट के अनुसार, अभिभावक बच्चियों का लेजर ट्रीटमेंट कराने अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन बच्चियों की स्किन सेंसिटिव होने के कारण यह ट्रीटमेंट उन्हें नहीं दिया जाता है।
ऐसे करें बचाव
फास्ट फूड से परहेज करें
ऑयली और मसालेदार चीजों का सेवन कम करें
बाजारों में बिकने वाले कटे फलों के सेवन से बचें
कम उम्र में बालों में जेल न लगाएं
पढ़ाई का स्ट्रेस ज्यादा न लें
ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं
चेहरे को दिन में तीन-चार बार साफ पानी से धोएं
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भागदौड़ भरी जिंदगी में आजकल अभिभावक इतने व्यस्त हो गए हैं कि उनके पास बच्चों पर ध्यान देने के लिए भी समय नहीं है।
बच्चों की बिगड़ती लाइफ स्टाइल और बचपन में ही जरूरत से ज्यादा पढ़ाई के स्ट्रेस से उन्हें बचपन से ही बीमारियां जकड़ लेती हैं। खासकर स्किन की बीमारियां।
जैसे फैनाइटिश, हर्सोटिज्म, फेस पर अत्यधिक मुहासे, कास्मेटिक डर्मेटाइटिश, कान पर रेसा (कान के ऊपर लाल दाने का निकलना), फंगश इनफेक्शन आदि। इन बीमारियों की चपेट में 7 से 13 साल के बच्चे ज्यादा आने लगे हैं।
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अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डालें तो अब युवाओं की तरह बच्चों में भी स्किन की बीमारियां होने लगी हैं। 10 साल से इसका ग्राफ 50 फीसदी तक बढ़ा है।
वजह यह है कि बड़ों की तुलना में बच्चों की त्वचा ज्यादा सेंसेटिव होती है। ऐसे में उनकी देखरेख का भी खास ख्याल रखना होगा।
ये बीमारियां हुईं आम
फंगश इन्फेक्शन (सफेद दाने निकलना)
सोराइसेज (शरीर पर सफेद दानों का निकलना)
फैनाइटिश (बाल का जल्दी सफेद होना)
हर्सोटिज्म (चेहरे पर अनचाहे बाल)
मुहासे (चेहरे पर दाग-धब्बे)
कास्मेटिक डर्मेटाइटिश (कास्मेटिक्स के धड़ल्ले प्रयोग से स्किन प्राब्लम)
फंगश इनफेक्शन
फंगश इनफेक्शन का सही समय पर इलाज नहीं कराया गया तो बच्चों में आगे चलकर गंजापन की समस्या आ जाती है।
सोराइसेज
सोराइसेज (शरीर पर सफेद दानों का निकलना) की चपेट में आने से लोग छुआछूत की बीमारी समझकर उनसे अलग-थलग रहने लगते हैं। ऐसे में बच्चे डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। लेकिन, हकीकत यह है कि सोराइसेज छुआछूत की बीमारी नहीं है।
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फैनाइटिश
बच्चों में फैनाइटिश (बाल का जल्दी सफेद होना) के केस सात साल से अस्पताल में आने लगे हैं। पहले यह बीमारी 18 साल की उम्र से शुरू होती थी।
हर्सोटिज्म
अब 12 से 13 साल की उम्र में ही बच्चियों के चेहरे पर अनचाहे बाल आने लगे हैं। स्किन स्पेशलिस्ट के अनुसार, अभिभावक बच्चियों का लेजर ट्रीटमेंट कराने अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन बच्चियों की स्किन सेंसिटिव होने के कारण यह ट्रीटमेंट उन्हें नहीं दिया जाता है।
ऐसे करें बचाव
फास्ट फूड से परहेज करें
ऑयली और मसालेदार चीजों का सेवन कम करें
बाजारों में बिकने वाले कटे फलों के सेवन से बचें
कम उम्र में बालों में जेल न लगाएं
पढ़ाई का स्ट्रेस ज्यादा न लें
ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं
चेहरे को दिन में तीन-चार बार साफ पानी से धोएं