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पंजाब में छठे वेतन आयोग ने कर्मचारियों के वेतन में दोगुनी वृद्धि करने की सिफारिश की

Tue, 04 May 2021 09:46 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 04 May 2021 09:46 PM IST
सार

आयोग की सिफारिशों के अनुसार, मुलाजिमों के वेतन और पेंशन में औसतन करीब 20 प्रतिशत का विस्तार हो सकता है, जो कि पांचवें वेतन आयोग की सिफारशों के मुकाबले वेतन में 2.59 गुना का विस्तार है। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत, कुछ भत्तों में रेशनलाइजेशन के साथ बड़े भत्तों को डेढ़ से दोगुना बढ़ाने का भी प्रस्ताव है।
 

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Sixth Pay Commission recommends Double hike in salary of employees in Punjab
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

विस्तार

छठे वेतन आयोग ने पंजाब सरकार के सभी मुलाजिमों के वेतन में दोगुनी से अधिक वृद्धि करने की सिफारिश की है। आयोग द्वारा हाल ही में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सौंपी गई रिपोर्ट में न्यूनतम वेतन 6950 रुपये से बढ़ाकर 18000 रुपये मासिक करने के साथ-साथ विभिन्न भत्तों में भी इजाफा करने को कहा है। आयोग ने नया वेतनमान पहली जनवरी, 2016 से लागू करने की सिफारिश भी की है। 

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आयोग की सिफारिशों के अनुसार, मुलाजिमों के वेतन और पेंशन में औसतन करीब 20 प्रतिशत का विस्तार हो सकता है, जो कि पांचवें वेतन आयोग की सिफारशों के मुकाबले वेतन में 2.59 गुना का विस्तार है। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत, कुछ भत्तों में रेशनलाइजेशन के साथ बड़े भत्तों को डेढ़ से दोगुना बढ़ाने का भी प्रस्ताव है।
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इस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री ने अध्ययन के लिए वित्त विभाग को भेज दिया है और यह निर्देश दिए हैं कि इस पर अगली करवाई के लिए इसी महीने कैबिनेट में पेश किया जाए। विधानसभा में राज्य सरकार की वचनबद्धता के मुताबिक छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट इस साल पहली जुलाई से लागू की जानी है। 

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संयोगवश यह रिपोर्ट उस समय आई है जब कोविड के चलते राज्य की आर्थिक हालात काफी खराब है और राज्य वित्तीय संकट से जूझ रहा है। सरकार ने टैक्सों में विस्तार नहीं किया है और जीएसटी मुआवजा भी अगले साल के अंत तक खत्म होना है। वित्त विभाग अगली कार्यवाही के लिए कैबिनेट में रिपोर्ट पेश करने से पहले इसे लागू करने के अलग-अलग प्रभावों की जांच करेगा।

पेंशन और डीए में प्रभावशाली बढ़ोतरी का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता के अनुसार, छठे वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार, पेंशन और डीए में प्रभावशाली वृद्धि का प्रस्ताव है, वहीं मेडिकल भत्ते और डेथ कम रिटायरमेंट ग्रेच्युटी भी दोगुनी करने का प्रस्ताव है। मुलाजिमों के साथ-साथ पेंशनरों के लिए भी एक समान 1000 रुपए मेडिकल भत्ते का प्रस्ताव है जबकि डेथ कम रिटायरमेंट ग्रेच्युटी को 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए करने का प्रस्ताव है।

सरकारी कर्मचारी की मौत पर एक्सग्रेशिया ग्रांट की दर बढ़ाने और ड्यूटी के दौरान कर्मचारी की मौत की स्थिति में दिए जाने वाले लाभ में इजाफा करने की सिफारिश की है। महामारी के चलते यह बहुत अहम है, क्योंकि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी फ्रंटलाइन वर्कर के तौर पर काम कर रहे हैं और कई की ड्यूटी करते हुए मौत भी हो गई है।

आयोग ने इंजीनियरिंग स्टाफ को डिजाइन भत्ता और पुलिस मुलाजिमों का किट संभाल भत्ता दोगुना करने और साथ ही मोबाइल भत्ता 375 रुपए से 750 रुपए करने का सुझाव भी दिया है।

आयोग ने सिफारिश की है कि केंद्रीय तर्ज पर महंगाई भत्ते की मौजूदा प्रणाली को जारी रखना चाहिए और हर बार सूचकांक में 50 प्रतिशत वृद्धि के साथ महंगाई भत्ते को महंगाई वेतन में तबदील किया जाना चाहिए। साथ ही इसे रिटायरमेंट लाभ समेत सभी उद्देश्यों के लिए लागू किया जाना चाहिए। 

आयोग ने पेंशन के लिए 2.59 के साधारण कारक के प्रयोग में संशोधन का सुझाव दिया है। इसके अलावा योग्यता पूरी करते हुए सेवाओं के 25 साल पूरे होने पर पेंशन के तौर पर आखिरी वेतन के 50 प्रतिशत का भुगतान जारी रखा जाए।

आयोग ने सुझाव दिया है कि पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों के लिए 65 साल की उम्र से 5 साल के मौजूदा अंतराल पर बुढ़ापा भत्ता संशोधित पेंशन अनुसार जारी रखा जाए। आयोग ने पेंशन की कम्युटेशन 40 प्रतिशत तक बहाल रखने की सिफ़ारिश भी की है।

मकान भत्ते (एचआरए) के लिए शहरों के मौजूदा वर्गीकरण को कायम रखने का प्रस्ताव किया गया है, जिसमें इस भत्ते की रेशनेलाइजेशन मौजूदा दरों के 0.8 प्रतिशत के हिसाब से तय की जानी है।

आयोग ने सिफ़ारिश की है कि भत्ते संबंधी नई श्रेणियां शुरू की जाएं, जिनमें उच्च शिक्षा भत्ता भी शामिल हो जोकि और ज्यादा उच्च योग्यता हासिल करने वाले सभी मुलाजिमों के लिए एकमुश्त दर के रूप में हो।

रेशनेलाइजेशन के तहत आयोग ने मूल वेतन के साथ अतिरिक्त कुछ जोड़ने और सभी प्रकार के विशेष वेतन ख़त्म करने की सिफ़ारिश की है। आयोग की तरफ से 2011 में कैबिनेट सब-कमेटी की सिफारिशों पर किए गए बदलाव भी रेशनेलाइज कर दिए गए हैं।

सिफारिशें एक जनवरी 2016 से और भत्ते नोटिफिकेशन की तिथि से
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि आयोग ने 1 जनवरी, 2016 से अपनी सिफारिशों को लागू करने को कहा है जबकि भत्तों से संबंधित सिफारिशों को सरकार द्वारा नोटिफिकेशन की तारीख से लागू करने की सिफारिश की गई है। उन्होंने आगे कहा कि आयोग की सिफारिशों को 01.01.2016 से लागू करने से संभावित तौर पर 3500 करोड़ रुपए सालाना अतिरिक्त खर्चा होगा।

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