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जानिए, कांग्रेस टिकट के इन 6 दावेदारों को
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 30 Jan 2014 01:21 PM IST
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पवन कुमार बंसल
चंडीगढ़ और पंजाब यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष और सचिव रह चुके हैं। चंडीगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। पहली बार 1984 में राज्य सभा के लिए चुने गए थे। 1991 में पहली बार चंडीगढ़ से लोक सभा का चुनाव जीता था। उसके बाद 1999, 2004 और 2009 में चंडीगढ़ से चुनाव जीता। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री, केंद्रीय संसदीय कार्य, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, जल संसाधन और रेल मंत्री रह चुके हैं। कई कमेटियों के सदस्य भी रहे हैं।
चंद्रमुखी शर्मा
चंडीगढ़ के पूर्व पार्षद हैं। एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष, चंडीगढ़ कांग्रेस के महासचिव और उपाध्यक्ष रह चुके हैं। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य भी रह चुके हैं। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मनीष तिवारी के करीबी हैं और उनके करीबी होने के कारण उन्हें सेंसर बोर्ड का सदस्य बनाया गया है।
चमन लाल शर्मा
पेशे से टैक्स कंसलटेंट हैं। 1980 से कांग्रेस से जुड़े हैं। 1991 में भी चंडीगढ़ से कांग्रेस की टिकट के लिए प्रबल दावेदार थे। पीयू सीनेट और सिंडीकेट के सदस्य रहे हैं। कई और कमेटियों के सदस्य भी रहे हैं। पवन बंसल के लिए चुनाव में प्रचार करते आए हैं।
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हरमोहिंदर सिंह लक्की
चंडीगढ़ के पूर्व डिप्टी मेयर हैं। चार साल एनएसयूआई के अध्यक्ष रहे। वर्ष 2001 से 2010 तक चंडीगढ़ यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। वर्तमान में जिला कांग्रेस कमेटी (अर्बन-1) के अध्यक्ष और पीयू सीनेट के सदस्य हैं। इससे पहले सिंडीकेट और बोर्ड ऑफ फाइनेंस के सदस्य भी रह चुके हैं। कई अन्य कमेटियों के सदस्य भी रहे हैं। पवन बंसल के करीबी थे।
भूपिंदर सिंह बडहेड़ी
लगभग 25 सालों से कांग्रेस से जुड़े हैं। चंडीगढ़ के पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर रहे हैं। दो बार (आठ साल) जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष रहे हैं। तीन बार (नौ साल) चंडीगढ़ मार्केट कमेटी के निदेशक रहे और इस दौरान कमेटी के चेयरमैन भी बने। चंडीगढ़ कांग्रेस के सचिव और महा सचिव भी रहे। विनोद शर्मा के करीबी माने जाते हैं।
केवल राम
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से सीनियर असिस्टेंट के पद से रिटायर हुए। उम्र 61 साल है। सेक्टर-45 में रहते हैं। कई सालों से उनका परिवार कांग्रेस से जुड़ा है। गरीबों के लिए आवाज उठाना चाहते हैं। बंसल से नाराज हैं और इसलिए चंडीगढ़ से खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं।
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चंडीगढ़ और पंजाब यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष और सचिव रह चुके हैं। चंडीगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। पहली बार 1984 में राज्य सभा के लिए चुने गए थे। 1991 में पहली बार चंडीगढ़ से लोक सभा का चुनाव जीता था। उसके बाद 1999, 2004 और 2009 में चंडीगढ़ से चुनाव जीता। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री, केंद्रीय संसदीय कार्य, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, जल संसाधन और रेल मंत्री रह चुके हैं। कई कमेटियों के सदस्य भी रहे हैं।
चंद्रमुखी शर्मा
चंडीगढ़ के पूर्व पार्षद हैं। एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष, चंडीगढ़ कांग्रेस के महासचिव और उपाध्यक्ष रह चुके हैं। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य भी रह चुके हैं। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मनीष तिवारी के करीबी हैं और उनके करीबी होने के कारण उन्हें सेंसर बोर्ड का सदस्य बनाया गया है।
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चमन लाल शर्मा
पेशे से टैक्स कंसलटेंट हैं। 1980 से कांग्रेस से जुड़े हैं। 1991 में भी चंडीगढ़ से कांग्रेस की टिकट के लिए प्रबल दावेदार थे। पीयू सीनेट और सिंडीकेट के सदस्य रहे हैं। कई और कमेटियों के सदस्य भी रहे हैं। पवन बंसल के लिए चुनाव में प्रचार करते आए हैं।
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हरमोहिंदर सिंह लक्की
चंडीगढ़ के पूर्व डिप्टी मेयर हैं। चार साल एनएसयूआई के अध्यक्ष रहे। वर्ष 2001 से 2010 तक चंडीगढ़ यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। वर्तमान में जिला कांग्रेस कमेटी (अर्बन-1) के अध्यक्ष और पीयू सीनेट के सदस्य हैं। इससे पहले सिंडीकेट और बोर्ड ऑफ फाइनेंस के सदस्य भी रह चुके हैं। कई अन्य कमेटियों के सदस्य भी रहे हैं। पवन बंसल के करीबी थे।
भूपिंदर सिंह बडहेड़ी
लगभग 25 सालों से कांग्रेस से जुड़े हैं। चंडीगढ़ के पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर रहे हैं। दो बार (आठ साल) जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष रहे हैं। तीन बार (नौ साल) चंडीगढ़ मार्केट कमेटी के निदेशक रहे और इस दौरान कमेटी के चेयरमैन भी बने। चंडीगढ़ कांग्रेस के सचिव और महा सचिव भी रहे। विनोद शर्मा के करीबी माने जाते हैं।
केवल राम
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से सीनियर असिस्टेंट के पद से रिटायर हुए। उम्र 61 साल है। सेक्टर-45 में रहते हैं। कई सालों से उनका परिवार कांग्रेस से जुड़ा है। गरीबों के लिए आवाज उठाना चाहते हैं। बंसल से नाराज हैं और इसलिए चंडीगढ़ से खुद चुनाव लड़ना चाहते हैं।