चंडीगढ़ प्रशासन ने जारी किया नोटिस: पॉलिथीन संग पकड़े गए तो जाना पड़ेगा जेल, समझदारी दिखाएं... अब झोला उठाएं
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम-1986 की धारा 15 के तहत जो भी इस आदेश का पालन नहीं करता उसे अधिकतम पांच साल की सजा या पांच हजार से एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
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एक जुलाई से शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति (सीपीसीसी) की तरफ से इस संबंध में एक नया नोटिस जारी किया गया है। कहा गया है कि एक जुलाई के बाद अगर कोई प्लास्टिक बेचता या इस्तेमाल करता पाया गया तो जुर्माना या जेल हो सकती है।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने पिछले साल कहा था कि एक जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक के उत्पादन, आयात, भंडारण, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लग जाएगा। हालांकि चंडीगढ़ प्रशासन ने करीब तीन साल पहले 27 सितंबर 2019 को ही ये रोक लगा दी थी। प्रशासन की तरफ से खूब प्रचार भी किया गया और चालान भी काटे गए लेकिन कुछ ही दिनों में अभियान ठंडा पड़ गया और सब कुछ पहले जैसा हो गया।
वर्तमान में सेक्टर-26 मंडी और अन्य बाजारों में पॉलिथीन की थैलियों में खुलेआम सामान बेचा जा रहा है। शहर के विभिन्न सेक्टरों में मौजूद रेस्टोरेंट, मार्केट, ठेलों आदि पर सिंगल यूज प्लास्टिक की खूब खपत है। सीपीसीसी के अधिकारी ने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक से बनने वाले उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े पक्षों को सख्त निर्देश दे दिए गए हैं। इनके अलावा स्टॉक रखने वालों, आपूर्तिकर्ताओं और वितरकों को भी इन उत्पादों के कारोबार को बंद करने को कहा गया है। इसका उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ जुलाई के पहले सप्ताह में कार्रवाई की जाएगी।
प्लास्टिक फ्री चंडीगढ़ के लिए तीन साल पहले सभी ने ली थी शपथ
11 सितंबर 2019 को सेक्टर-17 में एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें प्रशासक के तत्कालीन सलाहकार मनोज परिदा समेत तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर, मेयर समेत तमाम अधिकारियों ने चंडीगढ़ को प्लास्टिक फ्री बनाने की शपथ ली थी। इसके कुछ ही दिनों बाद 27 सितंबर को सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध की अधिसूचना जारी कर दी गई थी। सलाहकार ने सभी विभागों को आदेश दिए थे कि वो प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें लेकिन उनके ये आदेश ज्यादा दिन नहीं चल पाए थे और सरकारी कार्यक्रमों में सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल होना शुरू हो गया। वर्तमान में भी यही स्थिति है।
हो सकती है ये सजा
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम-1986 की धारा 15 के तहत जो भी इस आदेश का पालन नहीं करता उसे अधिकतम पांच साल की सजा या पांच हजार से एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। खास मामलों में दोनों एक साथ भी लगाए जा सकते हैं। फैक्ट्री आदि पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसके अलावा पानी की सप्लाई व बिजली का कनेक्शन या फिर कोई अन्य सेवा रोकी जा सकती है।
एक जुलाई से प्लास्टिक के इन सामानों पर रोक
- सिंगल यूज प्लास्टिक कटलरी (प्लेट, कप, गिलास, कटोरे, कांटे, चाकू, चम्मच, स्ट्रॉ)
- थर्मोकोल/स्टायरोफोम कटलरी (प्लेट, कप, गिलास, कटोरे, आदि)
- सिंगल यूज प्लास्टिक कंटेनर (डिश बाउल, ट्रे, गिलास, ढक्कन)
- खाद्य पदार्थों की पैकिंग के लिए प्लास्टिक बैग/पाउच
- प्लास्टिक मिनरल वाटर पाउच
- यूज एंड थ्रो रेजर्स और पेन
- सजावट के उद्देश्य से थर्माकोल और प्लास्टिक का उपयोग
- पॉलिथीन/प्लास्टिक कैरी बैग
- औद्योगिक पैकेजिंग (किसी भी प्रकार की) 50 माइक्रोन से कम
- कंटेनर 250 माइक्रोन से कम
- 30 मिली/30 ग्राम और उससे कम की पैकेजिंग क्षमता वाले प्लास्टिक के पाउच
- ईयर बड्स, गुब्बारों, झंडों और कैंडी के लिए प्लास्टिक की स्टिक
निगम ने चलाया था मंडी में अभियान, घंटे भर बाद लोग इस्तेमाल कर रहे थे पॉलिथीन
कुछ दिन पहले नगर निगम की ओर से सेक्टर-26 मंडी में पॉलिथीन को खत्म करने के लिए अभियान चलाया गया था। मेयर और आयुक्त दोनों ने ही कपड़े के थैले बांटे, साथ ही खुद ने भी कपड़े के थैले में सब्जी खरीदी थी। बड़े स्तर पर आयोजित हुए कार्यक्रम के एक घंटे बाद ही मंडी में लोग पॉलिथीन में सब्जी लेते दिखाई दिए थे। वहीं सब्जी बेचने वाले भी धड़ल्ले से पॉलिथीन बेचते दिखे।
आंकड़ा पूरा करने को होता है चालान, विभागों में भी तालमेल की कमी
वैसे तो चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति और नगर निगम दोनों को ही पॉलिथीन का उपयोग करने वालों पर सख्ती बरतने को कहा गया है लेकिन चालान सिर्फ आंकड़ों को पूरा करने तक ही सीमित है। ज्यादातर मार्केट व मंडी के दुकानदार का कर्मचारियों से तय होता है कि हर माह कितने के चालान होने हैं। यही कारण हैं कि उन्हें किसी भी विभाग का डर नहीं होता। मंडी में पुलिस, मंडी कमेटी, निगम के कर्मचारियों के सामने पॉलिथीन का उपयोग होता है और कार्रवाई के नाम पर मात्र खानापूर्ति होती है। कुछ दिन पहले निगम और सीपीसीसी ने मिलकर कुछ जगह कार्रवाई की थी, लेकिन शहर को पॉलिथीन मुक्त बनाने के लिए यह प्रयास नाकाफी है।