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एक अंब्रेला के नीचे आएंगे पीयू के छह म्यूजियम
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी अपने छह म्यूजियम को एक अंब्रेला के नीचे लाने जा रहा है। इसके पीछे मकसद है कि एक जगह विभागों की उपलब्धियां व रिसर्च आ जाएंगे तो आसानी से कोई भी व्यक्ति उन्हें एक जगह पर देख सकेंगे। म्यूजियम को नया आकार देने के लिए पीयू ने दिल्ली समेत कई जगह के विशेषज्ञों से संपर्क किया है। अगले माह में इस पर काम शुरू हो जाएगा। जरूरत पड़ी तो पीयू इसके लिए शुल्क भी लगा सकता है। फिलहाल प्रथम चरण में इंट्री फ्री होगी। ये म्यूजियम पीयू को एक नई पहचान दिलाएंगे।
पीयू के साइंस विभागों के म्यूजियम अलग हैं। इसमें एंथ्रोपोलॉजी का म्यूजियम काफी पुराना और अच्छा बना हुआ है। आदिमानव के अवशेषों से यहां पुतले बनाए गए हैं जो हूबहू हैं। इसके अलावा कई पहाड़ियों से मिले मानव अवशेष यहां लगाए गए हैं। सांस्कृतिक विरासत भी यहां संजोई गई है। इसी तरह बॉटनी, जंतु विज्ञान के म्यूजियम भी बने हैं। शिक्षकों ने रिसर्च के बाद कई अवशेष या सुबूत यहां दर्शाए हैं। भूगोल का म्यूजियम अपने में अलग है। विभिन्न प्रकार के पत्थर यहां रखे गए हैं। वैज्ञानिकों ने कई रिसर्च करके चौंकाया है। साथ ही भूकंप आदि पर काम कर रहे शिक्षकों ने भी कई महत्वपूर्ण आइटम अपने छोटे म्यूजियम में लगाए गए हैं। इसके अलावा गांधीयन स्टडीज व अन्य विभागों के पास भी अपने म्यूजियम हैं।
इन सभी म्यूजियम को एक किया जाएगा। बताया जाता है कि म्यूजियम की जिम्मेदारी एक अधिकारी को दी जाएगी और इस पर पैसे खर्च होंगे। रखरखाव पूरी तरह होगा। दिल्ली व अन्य जगहों से आने वाले वैज्ञानिकों के दिमाग से यह म्यूजियम विकसित होगा। बताया जाता है कि यह म्यूजियम अपने में देश में अलग होगा, जो पीयू की पहचान कराएगा। वीसी प्रो. राजकुमार कहते हैं कि छह म्यूजियम को एक करने का काम चल रहा है। जल्द ही इसके रिजल्ट सामने होंगे।
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पीयू के साइंस विभागों के म्यूजियम अलग हैं। इसमें एंथ्रोपोलॉजी का म्यूजियम काफी पुराना और अच्छा बना हुआ है। आदिमानव के अवशेषों से यहां पुतले बनाए गए हैं जो हूबहू हैं। इसके अलावा कई पहाड़ियों से मिले मानव अवशेष यहां लगाए गए हैं। सांस्कृतिक विरासत भी यहां संजोई गई है। इसी तरह बॉटनी, जंतु विज्ञान के म्यूजियम भी बने हैं। शिक्षकों ने रिसर्च के बाद कई अवशेष या सुबूत यहां दर्शाए हैं। भूगोल का म्यूजियम अपने में अलग है। विभिन्न प्रकार के पत्थर यहां रखे गए हैं। वैज्ञानिकों ने कई रिसर्च करके चौंकाया है। साथ ही भूकंप आदि पर काम कर रहे शिक्षकों ने भी कई महत्वपूर्ण आइटम अपने छोटे म्यूजियम में लगाए गए हैं। इसके अलावा गांधीयन स्टडीज व अन्य विभागों के पास भी अपने म्यूजियम हैं।
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इन सभी म्यूजियम को एक किया जाएगा। बताया जाता है कि म्यूजियम की जिम्मेदारी एक अधिकारी को दी जाएगी और इस पर पैसे खर्च होंगे। रखरखाव पूरी तरह होगा। दिल्ली व अन्य जगहों से आने वाले वैज्ञानिकों के दिमाग से यह म्यूजियम विकसित होगा। बताया जाता है कि यह म्यूजियम अपने में देश में अलग होगा, जो पीयू की पहचान कराएगा। वीसी प्रो. राजकुमार कहते हैं कि छह म्यूजियम को एक करने का काम चल रहा है। जल्द ही इसके रिजल्ट सामने होंगे।
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