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सुखना पर बत्तखों को बचाने के लिए हस्ताक्षर अभियान, आप भी करने आएं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 09 Oct 2016 07:36 PM IST
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सुखना लेक पर बत्तखों को बचाने के लिए हस्ताक्षर अभियान
- फोटो : अमर उजाला
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सुखना लेक की शान बत्तखों को बचाने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। आप भी लेक को बचाना चाहते हैं तो सिग्नेचर करने पहुंचें। एनवायरमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया ने एक सिग्नेचर कैंपेन शुरू किया है। इसके तहत वे शनिवार व रविवार को सुखना लेक पर आने वाले उन लोगों से हस्ताक्षर करवाए जाएंगे, जो बत्तखों की वापसी चाहते हैं।
शनिवार को 175 लोगों ने हस्ताक्षर किए, जबकि रविवार को 90 ने समर्थन जताया। हस्ताक्षर अभियान के दौरान लोगों ने बताया कि ‘बत्तखें सुखना की शान थी। बत्तखों के बिना सुखना सूनी जैसी लगती है।’ सोसायटी के सेक्रेटरी एनके झिंगन ने बताया है कि प्रत्येक शनिवार व रविवार को हस्ताक्षर अभियान चलेगा। हस्ताक्षरों का ज्ञापन बनाकर गवर्नर को सौंपा जाएगा और सुखना पर दोबारा से बत्तखों के लाने की मांग की जाएगी।
जिक्रयोग है कि दो साल पहले बर्ड फ्लू फैलने के कारण सुखना की सभी बत्तखों को मार दिया गया था। सुखना में आने वाले कई लोगों का बत्तखों के साथ विशेष लगाव था। लोगों का कहना था कि ‘जब बत्तखें होती थी तो लोगों का मन लगा रहता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब यहां पर आने का मन नहीं करता। बत्तखे फिर से लानी चाहिए।’
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एनके झिंगन के मुताबिक यदि बत्तखे होंगी तो सुखना का इको बैलेंस भी बना रहेगा। वीड जैसी दूसरी समस्याएं काफी कम रहेगी। अभियान के दौरान राधेश्याम शर्मा, राहुल महाजन, राकेश दहिया, महेंद्र कौर, एचएस कम्पानी, डॉ. परमजीत सिंह, डॉ. आरके चौहान सहित कई लोग मौजूद रहे।
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शनिवार को 175 लोगों ने हस्ताक्षर किए, जबकि रविवार को 90 ने समर्थन जताया। हस्ताक्षर अभियान के दौरान लोगों ने बताया कि ‘बत्तखें सुखना की शान थी। बत्तखों के बिना सुखना सूनी जैसी लगती है।’ सोसायटी के सेक्रेटरी एनके झिंगन ने बताया है कि प्रत्येक शनिवार व रविवार को हस्ताक्षर अभियान चलेगा। हस्ताक्षरों का ज्ञापन बनाकर गवर्नर को सौंपा जाएगा और सुखना पर दोबारा से बत्तखों के लाने की मांग की जाएगी।
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जिक्रयोग है कि दो साल पहले बर्ड फ्लू फैलने के कारण सुखना की सभी बत्तखों को मार दिया गया था। सुखना में आने वाले कई लोगों का बत्तखों के साथ विशेष लगाव था। लोगों का कहना था कि ‘जब बत्तखें होती थी तो लोगों का मन लगा रहता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब यहां पर आने का मन नहीं करता। बत्तखे फिर से लानी चाहिए।’
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एनके झिंगन के मुताबिक यदि बत्तखे होंगी तो सुखना का इको बैलेंस भी बना रहेगा। वीड जैसी दूसरी समस्याएं काफी कम रहेगी। अभियान के दौरान राधेश्याम शर्मा, राहुल महाजन, राकेश दहिया, महेंद्र कौर, एचएस कम्पानी, डॉ. परमजीत सिंह, डॉ. आरके चौहान सहित कई लोग मौजूद रहे।