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Chandigarh News: नौ बुक डिपो और वर्दी डीलर को जारी किया कारण बताओ नोटिस
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चंडीगढ़। पुस्तकों और वर्दी की लूट पर प्रशासन की ओर से अब विक्रेताओं पर कार्रवाई की जा रही है। आबकारी व कराधान विभाग ने शुक्रवार को नौ पुस्तक विक्रेता और वर्दी डीलरों को कारण बताओ नोटिज जारी किया है।
पुस्तक, स्टेशनरी विक्रेता और वर्दी डीलर उपभोक्ता को सामान खरीदने पर टैक्स सहित बिल दे रहे हैं या नहीं, जीएसटी प्रावधानों का पालन और कर की चोरी रोकने के लिए शिक्षा विभाग और आबकारी व कराधान विभाग की टीम ने दुकानों की जांच की। निरीक्षण के दौरान जिन पुस्तक विक्रेता और वर्दी डीलर के कर को लेकर स्पष्टता नहीं मिली उन्हें आबकारी व कराधान विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने सभी दुकानदारों को जीएसटी अधिनीयम 2017 का पालन करने के निर्देश जारी किए हैं। शहर के कुछ पुस्तक और स्टेशनरी विक्रेताओं द्वारा बिना बिल जारी किए अभिभावकों से अधिक पैसे वसूले जा रहे थे। कुछ बिल में स्टेशनरी पर लगे टैक्स की जानकारी नहीं दी जा रही थी और कुछ पुस्तकों की सूची पर ही पेड का ठप्पा लगाकर उसे बिल की तरह दे रहे थे। सेक्टर-22 स्थित एक पुस्तक विक्रेता ने पुस्तकों की सूची पर पेड का ठप्पा लगा कर उस दिन की तारीख डाल कर बिल बना कर दे दिया। उसमें न इनवोइस सीरियल नंबर, दुकान का नाम, पता, पुस्तकें खरीदने का समय कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई। 4000-5000 के सेट की पुस्तकें अभिभावकों ने बिना बिल के खरीद दी। पुस्तकों पर जीएसटी टैक्स नहीं लगता और स्टेशनरी पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। अभिभावक वर्दी, पुस्तकें और स्टेशनरी लेते समय बिल का इनवॉइस जरूर लें, जिसमें खरीद के सामान की सारी जानकारी हो। निजी स्कूल के अभिभावक को निश्चित दुकान से पुस्तकें, वर्दी लेने का दबाव बनाते हैं तो वह शिक्षा विभाग को शिकायत दे सकते हैं। पुस्तक विक्रेता व वर्दी डीलर द्वारा सामान खरीदने पर बिल न देने आबकारी व कराधान विभाग को शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
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पुस्तक, स्टेशनरी विक्रेता और वर्दी डीलर उपभोक्ता को सामान खरीदने पर टैक्स सहित बिल दे रहे हैं या नहीं, जीएसटी प्रावधानों का पालन और कर की चोरी रोकने के लिए शिक्षा विभाग और आबकारी व कराधान विभाग की टीम ने दुकानों की जांच की। निरीक्षण के दौरान जिन पुस्तक विक्रेता और वर्दी डीलर के कर को लेकर स्पष्टता नहीं मिली उन्हें आबकारी व कराधान विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने सभी दुकानदारों को जीएसटी अधिनीयम 2017 का पालन करने के निर्देश जारी किए हैं। शहर के कुछ पुस्तक और स्टेशनरी विक्रेताओं द्वारा बिना बिल जारी किए अभिभावकों से अधिक पैसे वसूले जा रहे थे। कुछ बिल में स्टेशनरी पर लगे टैक्स की जानकारी नहीं दी जा रही थी और कुछ पुस्तकों की सूची पर ही पेड का ठप्पा लगाकर उसे बिल की तरह दे रहे थे। सेक्टर-22 स्थित एक पुस्तक विक्रेता ने पुस्तकों की सूची पर पेड का ठप्पा लगा कर उस दिन की तारीख डाल कर बिल बना कर दे दिया। उसमें न इनवोइस सीरियल नंबर, दुकान का नाम, पता, पुस्तकें खरीदने का समय कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई। 4000-5000 के सेट की पुस्तकें अभिभावकों ने बिना बिल के खरीद दी। पुस्तकों पर जीएसटी टैक्स नहीं लगता और स्टेशनरी पर 18 प्रतिशत जीएसटी है। अभिभावक वर्दी, पुस्तकें और स्टेशनरी लेते समय बिल का इनवॉइस जरूर लें, जिसमें खरीद के सामान की सारी जानकारी हो। निजी स्कूल के अभिभावक को निश्चित दुकान से पुस्तकें, वर्दी लेने का दबाव बनाते हैं तो वह शिक्षा विभाग को शिकायत दे सकते हैं। पुस्तक विक्रेता व वर्दी डीलर द्वारा सामान खरीदने पर बिल न देने आबकारी व कराधान विभाग को शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
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