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कोरोना का दर्द याद रखें: सुखना पर बेपरवाह घूम रहे लोग, सेक्टर-17 आईएसबीटी के दुकानदारों की रोजी रोटी भी संकट में
Mon, 12 Jul 2021 05:21 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 12 Jul 2021 05:21 PM IST
सार
बस स्टैंड पर दुकान चलाने वाले दुकानदारों के अनुसार, काम बिल्कुल नहीं है। कारीगर को बैठाकर वेतन देना पड़ रहा है। खर्च नहीं चल पा रहा है। वहीं प्रशासक की अपील के बावजूद सुखना पर लोगों का खूब जमावड़ा लग रहा है।
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कोरोना की दूसरी लहर थमते ही सुखना पर उमड़े लोग और मंदे कारोबार से दुखी दुकानदार।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना की पहली लहर के कारण डूबा कारोबार ठीक से खड़ा भी नहीं हो पाया था कि दूसरी लहर ने सब कुछ ध्वस्त कर दिया। अब दूसरी लहर के कम होने पर भी जहां दुकानदारों के सामने रोजी रोटी का संकट आ गया है, वहीं लोगों की बेपरवाहियां बढ़ गई हैं। कोरोना नियमों को ताक पर रख दिया गया। दूसरी लहर के दर्द में डूबे लोगों को चिंता है कि कहीं नियमों को न मानने की भूल तीसरी लहर का सबब न बन जाए।
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चंडीगढ़ सेक्टर-17 आईएसबीटी के दुकानदार आर्थिक संकट में हैं। बस अड्डे पर 55 दुकानें हैं। कोरोना के कारण कई दुकान बंद हो गई हैं और दुकानदार कर्ज में डूब गए हैं। दुकानदारों का कहना है कि कोविड के चलते बस अड्डे पर यात्री नहीं पहुंचे। इस कारण उनका सामान नहीं बिका और घाटे में आ गए। हालत यह है कि दुकानों का किराया देना भी मुश्किल हो गया है। बस अड्डे पर 45 वर्ष से खुली बुकशॉप बंद होने के कगार पर हैं। इसके बंद हो जाने से न कोई किताब मिलेगी और न कोई समाचार पत्र।
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वहीं छुट्टी का दिन होने के कारण एक बार फिर रविवार को बड़ी संख्या में लोग सुखना लेक पर पहुंच गए। हालांकि यूटी प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल के निर्देश पर पुलिस यहां पूरी तरह मुस्तैद रही और नियम तोड़ने वालों के चालान काटे गए। लेक पर दिन भर में पुलिस ने कुल 78 चालान काटे। इसमें 33 बिना मास्क और 45 सामाजिक दूरी न रखने के चालान शामिल थे। वहीं, 45 चालान प्रशासन की टीम ने भी काटे।
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आमदनी न के बराबर, बुकशॉप बंद करना पड़ेगा
लॉकडाउन के दौरान ग्राहकों के नहीं आने से अब बुकशॉप चलाना मुश्किल हो रहा है। इस बारे में सीटीयू प्रबंधन को लिख कर दिया है। किराया बहुत है और आमदनी न के बराबर है। खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। मैं यहां पर पिछले 45 वर्षों से दुकान कर रहा हूं। -राकेश गुप्ता, मालिक राकेश न्यूज एजेंसी।
कारीगर को बैठाकर देना पड़ रहा है वेतन
काम बिल्कुल नहीं है। कारीगर को बैठाकर वेतन देना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए कि कहीं लॉकडाउन खुले और सभी बसें चलने लगे और यात्रियों की चहल पहल पहले जैसी हुई तो फिर कारीगर कहां से लाएंगे। खर्च नहीं चल पा रहा है। -बबलू चौरसिया, कैंटीन संचालक
कपड़ों की तरफ कोई देखता भी नहीं
दुकानदारी खत्म हो गई है। आज हालात यह हो गए हैं कि कपड़े खरीदना तो दूर कोई इनकी तरफ देखता तक नहीं। नाइट कर्फ्यू के कारण दुकानें जल्द बंद कर घर जाना पड़ता है। ऐसे में कुछ भी काम नहीं हुआ। किराया काफी के लिए सीटीयू प्रबंधन को पत्र लिखा है। -अनिल खन्ना, रेडीमेड गारमेंट मालिक
सीटीयू प्रबंधन ने दुकानदारों का 30 प्रतिशत किराया माफ किया है
कोविड लॉकडाउन के दौरान हालत को देखते हुए सीटीयू की ओर से सभी दुकानदारों का 30 प्रतिशत किराया माफ किया गया है। लेकिन वे और रियायत मांग रहे हैं। इसके लिए प्रशासन से जो आदेश आएगा उसका पालन होगा। -गुरराज सिंह, एसएस आईएसबीटी सेक्टर -17
प्रशासक की अपील भी बेअसर
कोरोना का असर कुछ कम होते ही रविवार को सुखना पर भारी भीड़ उमड़ी। पिछले सप्ताह भी ऐसी ही स्थितियां बनने पर समीक्षा बैठक में प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने लोगों से अपील की थी कि सुखना पर भीड़ न लगाएं। इस अपील के बावजूद लोग नहीं मान रहे हैं। बिना मास्क और सामाजिक दूरी पर अपने बच्चों को लेकर घूमने निकल रहे हैं। खासकर छुट्टी का दिन होने के कारण सुखना पर भीड़ और बढ़ जाती है। इस दौरान कोई गले में मास्क लगाए दिखता है तो कोई सामाजिक दूरियों की धज्जियां उड़ाता दिखता है। वहीं लोग अब पुलिस से भी उलझने से परहेज नहीं करते हैं।
कारीगर को बैठाकर देना पड़ रहा है वेतन
काम बिल्कुल नहीं है। कारीगर को बैठाकर वेतन देना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए कि कहीं लॉकडाउन खुले और सभी बसें चलने लगे और यात्रियों की चहल पहल पहले जैसी हुई तो फिर कारीगर कहां से लाएंगे। खर्च नहीं चल पा रहा है। -बबलू चौरसिया, कैंटीन संचालक
कपड़ों की तरफ कोई देखता भी नहीं
दुकानदारी खत्म हो गई है। आज हालात यह हो गए हैं कि कपड़े खरीदना तो दूर कोई इनकी तरफ देखता तक नहीं। नाइट कर्फ्यू के कारण दुकानें जल्द बंद कर घर जाना पड़ता है। ऐसे में कुछ भी काम नहीं हुआ। किराया काफी के लिए सीटीयू प्रबंधन को पत्र लिखा है। -अनिल खन्ना, रेडीमेड गारमेंट मालिक
सीटीयू प्रबंधन ने दुकानदारों का 30 प्रतिशत किराया माफ किया है
कोविड लॉकडाउन के दौरान हालत को देखते हुए सीटीयू की ओर से सभी दुकानदारों का 30 प्रतिशत किराया माफ किया गया है। लेकिन वे और रियायत मांग रहे हैं। इसके लिए प्रशासन से जो आदेश आएगा उसका पालन होगा। -गुरराज सिंह, एसएस आईएसबीटी सेक्टर -17
प्रशासक की अपील भी बेअसर
कोरोना का असर कुछ कम होते ही रविवार को सुखना पर भारी भीड़ उमड़ी। पिछले सप्ताह भी ऐसी ही स्थितियां बनने पर समीक्षा बैठक में प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने लोगों से अपील की थी कि सुखना पर भीड़ न लगाएं। इस अपील के बावजूद लोग नहीं मान रहे हैं। बिना मास्क और सामाजिक दूरी पर अपने बच्चों को लेकर घूमने निकल रहे हैं। खासकर छुट्टी का दिन होने के कारण सुखना पर भीड़ और बढ़ जाती है। इस दौरान कोई गले में मास्क लगाए दिखता है तो कोई सामाजिक दूरियों की धज्जियां उड़ाता दिखता है। वहीं लोग अब पुलिस से भी उलझने से परहेज नहीं करते हैं।