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Chandigarh News: दुकानदार अपने कर्मचारी रख बाजारों से इकट्ठा करवा रहे कूड़ा, डेडलाइन तक ही सीमित कूड़े का पहाड़ हटाने का काम

Sat, 19 Jul 2025 01:29 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jul 2025 01:29 AM IST
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Shopkeepers are getting the garbage collected from the markets by hiring their own employees, the work of removing the garbage mountain is limited to the deadline
चंडीगढ़। स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 की सुपर लीग 3 से 10 लाख वाले शहरों की श्रेणी में चंडीगढ़ ने दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। लेकिन गार्बेज फ्री सिटी, मौके से सूखा और गीला कूड़ा अलग उठाना और डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन में चंडीगढ़ नगर निगम पीछे रह गया। ऐसे में अगर इन तीन सेक्टर में काम बेहतर रहता तो चंडीगढ़ को पहला स्थान मिल सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। यह कमियां क्यों रह गईं, इसको लेकर अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि जमीनी स्तर पर काम बेहतर नहीं हो पाया और बड़े अधिकारी इसकी मॉनिटरिंग भी ठीक से नहीं कर पाए। डेडलाइन समाप्त होने के बाद कूड़े का पहाड़ नहीं हट पाया है।
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डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के रखना पड़ा खुद का कर्मचारी
चंडीगढ़ व्यापार मंडल के चेयरमैन और सेक्टर-21 मार्केट के कारोबारी चरणजीव सिंह ने बताया कि उनके बाजार में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाले कर्मचारी नियमित नहीं आते है। खुद कारोबारियों ने अपने पैसे से कर्मचारी रखा है, जो सभी दुकानों से कूड़ा एकत्र करता है। चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव चड्डा ने बताया कि शहर के ज्यादातर बाजारों में डोर टू डोर कूड़ा एकत्र नहीं किया जाता है। कूड़ा उठाने वालों की कोई टाइमिंग नहीं है। कर्मचारी कूड़ा उठाने कभी सुबह 9 या 10 बजे आ जाते हैं जब बाजार नहीं खुला रहता तो कभी दोपहर बाद आते हैं। नगर निगम की कई बैठकों में यह बात रखी गई है।
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गीला-सूखा कूड़ा अलग नहीं लिया जाता

मौके से ही गीला और सूखा कूड़ा एकत्र करने का प्रावधान है। इसके लिए सख्त निर्देश है कि आवासीय और कॉमर्शियल इलाके में लोग दोनों ही कूड़े को अलग रखें। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। निगम ने इसको लेकर सख्ती भी नहीं है। सिटी फोरम ऑफ रेजिडेंट्स वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के संयोजक विनोद वशिष्ठ का कहना है कि शहर के कुछ इलाकों को मानक को पूरा किया जा रहा है। हालांकि बाजार, छोटी सोसाइटी और ग्रामीण इलाके जो चंडीगढ़ के सीमा में आ गए हैं वहां पर इस मानक को पूरा नहीं किया जा रहा है। कई इलाकों में तो अघोषित डंपिंग जोन तैयार होने लगा है। नगर निगम की ओर से जो कर्मचारी डोर टू डोर कूड़ा उठा रहा है उसको मौके पर ही आपत्ति जतानी चाहिए। लोगों को मना करना चाहिए। अगर नहीं सुनते हैं तो दंड का प्रावधान है। इसके साथ ही नगर निगम को अभियान भी चलाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।
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गार्बेज फ्री सिटी में हर बार 3 स्टार नंबर मिल रहा


गार्बेज फ्री सिटी को लेकर पिछले कई साल से चंडीगढ़ के प्रदर्शन में सुधार नहीं हो रहा है। इस बार भी निगम ने इस श्रेणी में पांच स्टॉर रैंक के लिए आवेदन किया था लेकिन 3 स्टार मिला है। पिछली बार भी चंडीगढ़ को तीन स्टार ही मिले थे। मौजूदा समय में चंडीगढ़ में हर दिन करीब 500 टन कचरा निकलता है, जिसे नगर निगम घर-घर जाकर इकट्ठा करता है और प्रोसेस करता है। डड्डूमाजरा के डंपिंग ग्राउंड में मौजूद पुराने कचरे को हटाने के लिए पहले मई उसके बाद जुलाई में डेड लाइन तय की गई लेकिन वह काम नहीं हुआ। अब एक बार फिर सितंबर तक इसको हटाने की डेड लाइन तय की गई है। एनजीटी नगर निगम को कई बार फटकार लगा चुका है। उसके बाद भी कूड़े का पहाड़ अभी तक नहीं हटा, अगर यह हट जाए तो गॉर्बेज फ्री सिटी में रैकिंग अच्छी मिलेगी। नगर निगम ने प्रस्ताव भी तैयार किया था कि कूड़े हो हटाने के बाद यहां 32 लाख रुपये की लागत को पेड़ लगाए जाएंगे , जिससे कि इस इलाके में ज्यादातर हरियाली दिखे।





पूर्व मेयर ने कहा अधिकारियों की नीयत ठीक नहीं

पूर्व मेयर कुलदीप का कहना है कि कूड़े का पहाड़ उनके वार्ड में है। अगर अधिकारी चाहे तो इसका निस्तारण हो सकता है। लेकिन उनकी मंशा इसको लेकर ठीक नहीं लगती है। इसमें आए दिन नए टेंडर निकाले जाते हैं, जिसका बजट करोड़ों रुपये का होता है। ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लोग निजी लाभ के लिए इसका निस्तारण नहीं कर रहे है। जिसका नुकसान पूरा चंडीगढ़ भुगत रहा है।
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