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स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पर मांगी RTI, चौंकाने वाले सच का खुलासा

Fri, 01 Jul 2016 01:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 01 Jul 2016 01:37 AM IST
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shocking truth on Swaminathan Commission report in RTI
RTI - फोटो : demo pics

किसानों के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लेकर मांगी थी आरटीआई, सामने आया चौंकाने वाला सच।केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।

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केंद्र सरकार ने जहां यह सिफारिशें अस्वीकार करने की बात कही है वहीं हरियाणा कृषि निदेशालय का कहना है कि प्रदेश में यह सिफारिशें लागू करने के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है। यह खुलासा वीरवार को पानीपत के आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर को आरटीआई के तहत दोनों सरकारों से मिले जवाब से हुआ है। उल्लेखनीय है कि केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकार ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने का वादा किया था।
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इसके साथ ही कृषि मंत्रालय द्वारा यह भी कहा गया है कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट केंद्र सरकार को 2006 में मिली थी, जिस पर 2007 में केंद्र (कांग्रेस) सरकार ने किसान नीति-2007 बनाई थी। मौजूदा केंद्र सरकार भी 2007 की किसान नीति पर ही काम कर रही है।
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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की उप-सचिव एवं केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी सुशीला अनन्त ने आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना का जवाब देते हुए लिखा है- ‘स्वामीनाथन आयोग द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से संबंधित सिफारिश को सरकार द्वारा इस आधार पर अस्वीकार कर दिया गया है क्योंकि एमएसपी की सिफारिश कृषि लागत और मुल्य आयोग द्वारा संबद्ध घटकों की किस्म पर विचार करते हुए वस्तुपरक मानदंड पर की जाती है। अतऱ् लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत की वृद्धि निर्धारित करने से मंडी में विकृति आ सकती है।’

दूसरी ओर, हरियाणा सरकार के कृषि निदेशालय ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लेकर आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में यह लिखकर आश्चर्य में डाल दिया है कि निदेशालय को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें हरियाणा में लागू किए जाने के बारे में कोई लेखा जोखा उपलब्ध नहीं है।


आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने गत 7 मार्च को प्रधानमंत्री कार्यालय व मुख्य सचिव हरियाणा को अलग-अलग आरटीआई आवेदन भेजकर सूचना मांगी थी। यह पूछा गया था कि किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य देने बारे स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए केन्द्र व हरियाणा सरकार ने क्या कार्रवाई की है।

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