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Chandigarh News: जिस्मफरोशी की गलियों से रंगमंच पर आई फिर चमकती दुनिया छोड़ गुम हो गई

Fri, 31 Jan 2025 02:14 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jan 2025 02:14 AM IST
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She came to the stage from the streets of prostitution and then left the shining world and got lost
चंडीगढ़। सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर में वीरवार को नाटक नटी बिनोदनी का मंचन किया गया। चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी और हरियाणा कला परिषद की ओर से करवाए जा रहे हरियाणा रंग उत्सव के चौथे दिन सुचेतक रंगमंच मोहाली ने नाटक पेश किया। बंगाली रंगमंच की जिंदा शहीद नटी बिनोदनी की प्रेम कहानी है। नटी बिनोदनी, जिन्होंने 1876 में नाटक की दुनिया में कदम रखा था। 12 साल के बाद ही रंगमंच को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था, क्योंकि कला की दुनिया में उन्हें उनका बनता मान-सम्मान नहीं मिला। यह नाटक बता रहा है कि कला की दुनिया भी बहुत बदल नहीं सकी।
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यह नाटक बंगाली रंगमंच की अदाकारा बिनोदनी दासी की आत्मकथा पर आधारित है। अनीता शब्दीश ने इसका निर्देशन किया है। इसमें दिखाया कि वह जिस्मफरोशी की गलियों से रंगमंच पर किस तरह आईं फिर किन हालातों में चमकती दुनिया को छोड़कर गुम हो गईं।
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अनीता शब्दीश ने नटी बिनोदनी की मुख्य भूमिका निभाई। वह रंगमंच को पूजा मानती हैं। इसलिए अपना प्यार तक ठुकरा देती हैं। थिएटर कंपनी को बचाने के लिए हवसी किस्म के अमीरजादे से बिक जाती है। इस तन-मन न्योछावर करने वाले के दर्द ने संवेदनशील दर्शकों को कई बार भावुक किया। जब वह देखते हैं कि उसके सहयोगी कलाकार थिएटर कंपनी ऊपर कब्जा करने के लिए हर प्रकार की साजिशें रचते हैं। उनके सामने सर्वोत्तम अदाकारा दर्शकों के लिए वेश्या की पोती या बेटी नहीं बल्कि सीता, सावित्री, द्रौपदी थी, जिनकी भूमिका उन्होंने अदा की थी।
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नटी बिनोदनी ने अपने पुरुष साथियों की साजिशें और पुरुष प्रधान रुख के कारण दुखी होकर हमेशा के लिए रंगमंच से विदा होकर दर्शकों की भीड़ में गुम हो जाती है। उसका सवाल दर्शकों के मन में हलचल पैदा करता है कि वह उसे सम्मान के साथ स्वीकार करेंगे या फिर नाटक की टीम के कलाकारों के जैसे रखैल बनकर जीने की सलाह देंगे।
इन परिस्थितियों को निर्देशक अनीता शब्दीश ने अभिनेत्री के रूप में जीवंत किया है। सनी गिल ने उस समय की टीम के निर्देशक गिरीश घोष की भूमिका निभाई, जो दिल तो नटी बिनोदनी का हमदर्द है पर पुरुष प्रधान समाज की मनोदशा के कारण बहुत अलग नहीं सोच सकता है। वह टीम को बचाने के लिए सहयोगी कलाकारों का साथ देता है।

हरमनपाल सिंह ने नटी बिनोदनी के प्रेमी राजा बाबू की भूमिका अदा की, जो प्यार तो करता है लेकिन पत्नी की जगह रखैल समझता है। उसके बूढ़े और हवसी आशिक गुरमुख बाबू की भूमिका दलजिंदर बसरा ने निभाई। नटी बिनोदनी की नानी की भूमिका सोनिया ने अदा की। उसकी मां की भूमिका नवनीत कौर ने अदा की। नटी बिनोदनी के बचपन का रोल जैसलीन ने निभाया। इसमें गुरमुख गिन्नी, सुषमा गांधी, गोर्की सिंह, युवराज बाजवा, गुरजंट सिंह, हरमनपाल सिंह ने अलग-अलग भूमिकाएं अदा की। नाटक का सेट डॉ. लक्खा लहरी ने डिजाइन किया। संगीत दिलखुश ने तैयार किया। गीत सलीम सिकंदर और मिन्नी दिलखुश ने गाए हैं। करण गुलजार ने प्रकाश व्यवस्था पर काम किया है।
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