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शिअद अपने शताब्दी समारोह के बाद ‘पंजाब से पंथ’ का सफर करे शुरू : जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह
Tue, 17 Nov 2020 10:10 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब )
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब )
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 17 Nov 2020 10:10 PM IST
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एसजीपीसी शताब्दी समारोह।
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब के अमृतसर में मंगलवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के शताब्दी समागम समारोह का आयोजन किया गया। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि एसजीपीसी शिरोमणि अकाली दल की मां है। शिअद अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष के समागम दिसंबर में आयोजित करने जा रही है। शताब्दी समागमों के बाद शिअद ‘पंजाब से पंथ’ तक का सफर शुरू करे। आगामी समय में कोई भी सिख विरोधी ताकत बेटे को मां से और मां से बेटे अलग नहीं कर सकेगी।
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जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सचखंड श्री हरमंदिर साहिब व एसजीपीसी परिसर में धरना लगाने व तलवारें लहराने वालों के बारे में कहा कि वे पूरी दुनिया में सिखों की छवि को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार भाई रणजीत सिंह की ओर से सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य प्रवेश द्वार पर धरना लगाने पर भी रोष जताया। जत्थेदार ने कहा कि धरना लगाना है तो नेताओं के घरों के बाहर लगाएं।
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उन्होंने एसजीपीसी के मुख्य गेट पर ताला लगाने वाले सिख संगठनों को पंथक कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उन्होंने एसजीपीसी के गेट पर ताले नहीं लगाए। पंथक संस्था पर ताले जड़ने की साजिश रची गई थी। जत्थेदार ने एसजीपीसी के पुत्र शिअद को आदेश दिए कि यदि भविष्य में कोई एसजीपीसी के गेट पर ताले मारने का दु:साहस करे तो वह (शिअद वर्कर) गांवों में न बैठे रहें। उन ताकतों का पता लगाएं जो श्री हरमंदिर साहिब में धरना-प्रदर्शन के लिए लोगों को भेज रहे हैं।
सिख अपने नाम के आगे जात-गोत्र न लगाएं
जत्थेदार हरप्रीत सिंह ने कहा कि एसजीपीसी अब तक के पूरे सिख इतिहास, सिख रहित मर्यादा, जितनी भी पंथक किताबें लिखी गईं है सभी एक वर्ष के भीतर वेबसाइट पर अपलोड करे। गांवों, कस्बों व शहरों में बैठे सिखों को आहत होने की जरूरत नहीं है।
एसजीपीसी के अस्तित्व को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। सिख अपने नाम के पीछे जाति व गोत्र लगाने लगे हैं। श्री अकाल तख्त साहिब ने कई बार इस संदर्भ में सिखों को आदेश दिए हैं कि वह अपने नाम के पीछे जाति-गोत्र न लगाएं। सिख अपने नाम के पीछे सिंह शब्द जोड़ना भूल गए हैं।
लापता पावन स्वरूपों का मामला प्रबंधकीय नाकामी व भ्रष्टाचार से जुड़ा
जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि लापता पवन स्वरूपों के मामले में संगत के मन में कुछ प्रश्न हैं। जब वह गांवों में प्रचार के लिए जाते है संगत उनसे इस बाबत सवाल करती है। संगत का सवाल पूछना लाजमी है। जो विरोधी जवाब लेना चाहते हैं एसजीपीसी उनको जवाब देने में समर्थ है लेकिन उनके सवाल करने का तरीका गलत है।
लापता स्वरूपों का मामला प्रबंधकीय नाकामी व भ्ष्टाचार से जुड़ा है। कुछ कर्मचारियों ने पावन स्वरूप संगत व गुरुद्वारा कमेटियों को दिए। भेंट एसजीपीसी के खातों में जमा नहीं करवाई। यह बड़ा घपला है। इस भ्रष्टाचार को धार्मिक मसला बनाने की साजिश रची जा रही है।
श्री अकाल तख्त साहिब ने मामले की जांच करवाई। जांच रिपोर्ट वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई। अब सवाल करने वाले पूछ रहे हैं कि 328 स्वरूप कहां है। वह जांच रिपोर्ट पढ़ लें, सारी जानकारी मिल जाएगी। ये लोग सवाल कर रहे हैं कि 328 स्वरूपों का रिकॉर्ड दिया जाए। 2008 से पहले कई फर्में पावन स्वरूपों को प्रकाशित करती रही हैं तो क्या उनसे भी 100 वर्ष का रिकॉर्ड मांगा जाएगा।