SGPC ने रद्द किए 'सरबत खालसा' के सभी प्रस्ताव
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एसजीपीसी की आंतरिक कमेटी की बैठक में दस नवंबर को पंथक संगठनों की ओर से आयोजित किए गए सरबत खालसा के प्रस्तावों को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।
यह बैठक अमृतसर में एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ की ओर से बुलाई गई थी, हालांकि सेहत ठीक न होने के कारण मक्कड़ बैठक में नहीं पहुंचे। बैठक की अध्यक्षता एसजीपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क ने की।
यह बैठक दस नवंबर को कुछ संगठनों की ओर से आयोजित किए गए सरबत खालसा कार्यक्रम का रिव्यू करने के लिए बुलाई गई थी। बैठक में चर्चा की गई कि सरबत खालसा कुछ लोगों ने पंजाब के हालातों को खराब करने के लिए आयोजित किया था।
वहीं सरबत खालसा बुलाने के लिए नियमों को भी नहीं अपनाया गया है। यह सरबत खालसा एसजीपीसी की शक्ति को कमजोर करने की भी साजिश है। इसलिए एसजीपीसी की आंतरिक कमेटी इस सरबत खालसा के प्रस्तावों को रद्द करती है और सरबत खालसा की ओर से नियुक्त किए गए तख्तों के अलग-अलग जत्थेदारों की नियुक्ति को भी समर्थन नहीं करती है।
एक युवक की ओर से पाइपों से ऊपर चढ़कर श्री अकाल तख्त साहिब की पहली मंजिल पर बैठकर विचार कर रहे श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह की पास वाली खिड़की को टांगे मारने की घटना की भी निंदा की गई। विर्क ने कहा कि कमेटी महसूस करती है कि यह सरबत खालसा पंजाब के हालातों को दोबारा खराब करने के लिए कुछ शरारती लोगों ने आयोजित किया था।
सरबत खालसा बुलाने वालों पर देशद्रोह का केस
पंजाब सरकार के आदेशों पर पुलिस ने सरबत खालसा बुलाने वाले पंथक नेताओं के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार सरकार चाहती है कि जो आरोपी पहले ही गिरफ्तार है, वे जल्दी जेल से बाहर न आ सकें। इसलिए उनके खिलाफ पहले से दर्ज मामलों में देशद्रोह की धारा भी जोड़ दी गई है।
आरोपी ध्यान सिंह मंड, मोहकम सिंह, सिमरनजीत सिंह मान (इस समय रिहा हैं), जसकरण सिंह काहन सिंह वाला, सतनाम सिंह मनावा, वस्सन सिंह जफरवाल और सिकंदर सिंह के खिलाफ धारा 124 ए, 153ए और 66-6 आईटी एक्ट की वृद्धि कर दी गई है।
पहले उनको धारा 107 और 131 के तहत गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों की माने तो सरकार ने देशद्रोह की धाराएं बढ़ाकर साबित कर दिया है कि वह पंथक नेताओं की गतिविधियों को किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगी। सरकार को डर है कि अगर यह नेता जेल से बाहर आ जाते हैं तो शिअद के राजनीतिक भविष्य के लिए खतरा बन सकते हैं।