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Chandigarh News: 12 साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न, सजा के खिलाफ अपील हाईकोर्ट ने की खारिज
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बच्ची के साथ क्या हुआ, उसे समझने में लग सकता है समय, एफआईआर में देरी का कारण
एफआईआर में 7 दिन की देरी की दलील हाईकोर्ट ने की खारिज, कहा-जैसा-जैसा हुआ पूरा सच बताया
चंडीगढ़। 12 साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के मामले में पोक्सो एक्ट में दोषी करार व्यक्ति की सजा के खिलाफ अपील को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर उसकी पांच साल की सजा बरकरार रखी है। हाईकोर्ट ने सात दिन की देरी से एफआईआर दर्ज होने की दलील को खारिज करते हुए कहा कि इस उम्र में उसके साथ क्या हुआ यह समझने में उसे समय लग सकता है, जो देरी का कारण हो सकता है।
मामला फरीदाबाद का है। शिकायत के अनुसार पीड़िता को बाथरूम में घसीट कर एक सप्ताह में तीन बार यौन उत्पीड़न किया गया। उसे धमकी दी गई कि यदि उसने किसी को बताया तो उसके मां-बाप को मार दिया जाएगा। इस मामले में सजा के फैसले के खिलाफ अपील पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह समझना होगा कि यौन उत्पीड़न पर 12 वर्षीय पीड़ित बालिका मानसिक रूप से यह समझने में सक्षम नहीं होगी कि उसके साथ क्या किया गया था। हालांकि पीड़िता यह बता सकती है कि उसके साथ क्या किया गया था, क्योंकि उस उम्र में इस कृत्य से जुड़ी कोई शर्म की भावना नहीं होती है। लेकिन अपराध को मानसिक रूप से समझना संभव नहीं होगा। यह देरी का संभव कारण हो सकता है। यौन उत्पीड़न के बाद पीड़िता उदास रहने लगी थी और जब मां को यह अजीब लगा और पूछताछ की, तब जाकर घटना का खुलासा किया। याची ने बर्थ सर्टिफिकेट न होने की दलील देकर यह तर्क दिया कि पीड़िता की उम्र का कोई सबूत नहीं था और वह नाबालिग नहीं थी। हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल का रिकार्ड साफ बताता है कि वह 12 साल 7 माह की थी। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में साफ था कि उसके साथ शारीरिक संबंध होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। पीड़िता ट्रायल के दौरान अपनी कहानी पर अड़ी रही है और उसने ईमानदारी से, बेबाकी से लगातार घटनाओं को वैसे ही बताया है जैसे वे घटित हुई थीं।
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एफआईआर में 7 दिन की देरी की दलील हाईकोर्ट ने की खारिज, कहा-जैसा-जैसा हुआ पूरा सच बताया
चंडीगढ़। 12 साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के मामले में पोक्सो एक्ट में दोषी करार व्यक्ति की सजा के खिलाफ अपील को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर उसकी पांच साल की सजा बरकरार रखी है। हाईकोर्ट ने सात दिन की देरी से एफआईआर दर्ज होने की दलील को खारिज करते हुए कहा कि इस उम्र में उसके साथ क्या हुआ यह समझने में उसे समय लग सकता है, जो देरी का कारण हो सकता है।
मामला फरीदाबाद का है। शिकायत के अनुसार पीड़िता को बाथरूम में घसीट कर एक सप्ताह में तीन बार यौन उत्पीड़न किया गया। उसे धमकी दी गई कि यदि उसने किसी को बताया तो उसके मां-बाप को मार दिया जाएगा। इस मामले में सजा के फैसले के खिलाफ अपील पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह समझना होगा कि यौन उत्पीड़न पर 12 वर्षीय पीड़ित बालिका मानसिक रूप से यह समझने में सक्षम नहीं होगी कि उसके साथ क्या किया गया था। हालांकि पीड़िता यह बता सकती है कि उसके साथ क्या किया गया था, क्योंकि उस उम्र में इस कृत्य से जुड़ी कोई शर्म की भावना नहीं होती है। लेकिन अपराध को मानसिक रूप से समझना संभव नहीं होगा। यह देरी का संभव कारण हो सकता है। यौन उत्पीड़न के बाद पीड़िता उदास रहने लगी थी और जब मां को यह अजीब लगा और पूछताछ की, तब जाकर घटना का खुलासा किया। याची ने बर्थ सर्टिफिकेट न होने की दलील देकर यह तर्क दिया कि पीड़िता की उम्र का कोई सबूत नहीं था और वह नाबालिग नहीं थी। हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल का रिकार्ड साफ बताता है कि वह 12 साल 7 माह की थी। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में साफ था कि उसके साथ शारीरिक संबंध होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। पीड़िता ट्रायल के दौरान अपनी कहानी पर अड़ी रही है और उसने ईमानदारी से, बेबाकी से लगातार घटनाओं को वैसे ही बताया है जैसे वे घटित हुई थीं।
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