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Chandigarh News: घाव भरने के बाद भी तीव्र दर्द का होना, गंभीर मर्ज का संकेत, रहें सावधान

Sun, 22 Oct 2023 04:34 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Sun, 22 Oct 2023 04:34 PM IST
सार

प्रो. बबीता ने बताया कि जो दर्द सर्जरी के बाद होता है, उसे एक्यूट पेन कहते हैं। ऐसे में दर्द घाव भरने के साथ ही खत्म हो जाता है लेकिन जब बिना घाव के ही दर्द हो तो यह एक बीमारी हो सकती है। यह जीवन को प्रभावित करता है।

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Severe pain even after wound healing is a sign of serious infection.
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : istock

विस्तार

यात्रा के दौरान या भारी वजन उठाने पर कमर दर्द शुरू हो जाए और चार हफ्ते से ज्यादा समय तक रहे तो इसे हल्के में मत लीजिए। ठीक इसी तरह दर्द वाले एरिया में सुन्नपन आना, बार-बार यूरिन पास होना, उस एरिया में ठंडा महसूस हो, चुभन हो तो सचेत हो जाइए क्योंकि ये क्रॉनिक पेन के लक्षण हैं। ये ऐसा दर्द है जो बिना घाव के या किसी घाव के भरने के बाद भी बेहद तीव्र गति से होता है। यह जानकारी चंडीगढ़ पीजीआई पेन क्लीनिक की प्रभारी प्रो. बबीता घई ने चिकित्सा कार्यशाला इनप्रोन्यूरोमॉड 2023 में दी।

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उन्होंने बताया कि दर्द होने पर अप्रशिक्षित लोगों से मालिश कराना भी खतरनाक साबित हो सकता है इसलिए लक्षण सामने आने पर देरी किए बिना विशेषज्ञ के पास जाएं। प्रो. बबीता ने बताया कि क्रॉनिक पेन 3 महीने से 30 साल तक हो सकता है। इसके इलाज के लिए दवाओं के साथ ही अहग-अलग थेरेपी का उपयोग किया जाता है।

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दर्द के साथ मानसिक तनाव भी

प्रो. बबीता ने बताया कि जो दर्द सर्जरी के बाद होता है, उसे एक्यूट पेन कहते हैं। ऐसे में दर्द घाव भरने के साथ ही खत्म हो जाता है लेकिन जब बिना घाव के ही दर्द हो तो यह एक बीमारी हो सकती है। यह जीवन को प्रभावित करता है। इससे मानसिक तनाव बढ़ जाता है। सामाजिक संपर्क खत्म होने लगता है।

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उन्होंने बताया कि बदलती जीवनचर्या इसका मुख्य कारण है। ऐसे मरीजों के लिए पीजीआई के पेन क्लीनिक में मल्टीमॉडल में से इलाज का उचित तरीका तय किया जाता है। इसमें फिजियोथेरेपिस्ट, मनोचिकित्सक की भी भूमिका अहम है। इस बीमारी को सिर्फ एक विशेषज्ञ की मदद से ठीक नहीं किया जा सकता है।

इर्स दर्द का मर्ज युवाओं में ज्यादा

युवाओं में इसकी ज्यादा शिकायत है। प्रो. बबीता ने बताया कि पीजीआई के पेन क्लीनिक में क्राॅनिक लो बैक पेन के मामले ज्यादा हैं। कुल मरीजों में इनकी संख्या 80 प्रतिशत है। युवाओं में जीवनचर्या के कारण यह मर्ज बढ़ रहा है। घंटों स्क्रीन पर काम करना है। इस दौरान वे गलत तरीके से बैठते हैं। मोबाइल के कारण गर्दन का दर्द बढ़ रहा है। धूम्रपान के कारण खून की नलियां ब्लॉक हो जाती हैं, उससे भी दर्द होता है। जंक और फास्ट फूड के कारण वजन बढ़ने से भी इस तरह की परेशानी बढ़ रही है। पहले 60 साल से ज्यादा वाले मरीज आते थे लेकिन अब युवाओं का क्लीनिक में आना एक गंभीर संकेत है।

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