आखिरकार नौ साल बाद टूट गया अंबाला नगर निगम, हरियाणा कैबिनेट के अन्य फैसले पढ़ें
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नौ साल बाद आखिरकार अंबाला नगर निगम सियासत की भेंट चढ़ गया। कैबिनेट में मुहर लगने के बाद अंबाला नगर निगम टूट गया है। अब अंबाला सदर नगर परिषद रहेगा और अंबाला शहर नगर निगम बनेगा। निगम के लिए पर्याप्त आबादी के मद्देनजर अंबाला शहर में 12 समीपवर्ती गांवों को भी शहर नगर निगम की हद में शामिल किया जाएगा।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस संदर्भ के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। जिन 12 गांवों को नगर निगम अंबाला शहर की सीमाओं में शामिल किया गया है, उनमें डंगडेहरी, मानकपुर, लोहगढ़, डडियाना, देवी नगर, निजामपुर, घेल कलां, घेल खुर्द, कौलां, कांवली, कालू माजरा और लहारसा शामिल हैं।
अंबाला सदर जोन के क्षेत्र को मौजूदा नगर निगम, अंबाला की सीमाओं से निकाला गया है और इस क्षेत्र को अब अलग नगर परिषद अर्थात अंबाला सदर घोषित किया जाएगा। अंबाला सदर अंबाला शहर के मुख्य नगर निगम कार्यालय से लगभग 11.6 किलोमीटर की दूर स्थित है।
अब नगर निगम अंबाला की सीमाओं में इन गांवों को शामिल करने और अंबाला सदर जोन को इसकी सीमाओं से निकालने के बाद 3 लाख की आवश्यक जनसंख्या (जैसा कि हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 3 (2) के परंतुक में दिया गया है) पूरी हो गई है।
निगम तोड़ने के आधार
- जिला मुख्यालय अंबाला शहर में ही स्थित है और निगमायुक्त समेत सभी शाखा प्रमुखों के कार्यालय भी अंबाला शहर में हैं।
- अंबाला सदर क्षेत्र को निगम सदर जोन कहा जाता है और दोनों शहरों के बीच लंबी दूरी है
- लोगों को अपनी समस्याओं के लिए अंबाला सदर से अंबाला सिटी जाना पड़ता है, जिससे लोग बहुत परेशान होते हैं
- भौगोलिक रूप से ही अंबाला सदर और अंबाला शहर दो अलग-अगल सिटी है।
मंत्री विज ने उठाई थी मांग
अंबाला नगर निगम को तोड़ने की मांग अंबाला से ताल्लुक रखने वाले कैबिनेट मंत्री अनिल विज लंबे अरसे से उठाते रहे हैं। इसके पीछे कुछ सियासी कारण भी हैं। मार्च 2010 में बने अंबाला नगर निगम में 20 पार्षदों में से 4 पार्षद ही भाजपा के थे और मेयर भी कांग्रेस का था।
वर्ष 2013 में अंबाला नगर निगम के पहली बार चुनाव हुए थे और इसका कार्यकाल 2018 में खत्म हो गया था। लेकिन मंत्री विज इसे तोड़ने पर ही अड़े हुए थे, जिसके चलते पिछले साल हुए नगर निगमों के चुनाव के बाजवूद अंबाला नगर निगम के चुनाव नहीं करवाए गए। जबकि इसी संदर्भ में मामला हाईकोर्ट में भी लंबित है। मगर अब कैबिनेट ने अंबाला नगर निगम तोड़ने पर मुहर लगा दी है।
आवासीय योजनाओं को मिलेगी और रफ्तार
हरियाणा में अब आवासीय योजनाओं को और रफ्तार मिलेगी। सरकार ने अब प्रदेश में दीन दयाल जन आवास योजना के विस्तार को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इतना ही नहीं हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1975 के तहत प्रदान किए गए लाइसेंसों के क्षेत्र मानदंडों में भी संशोधन किया गया है। इससे विभिन्न श्रेणी की कॉलोनियों को डेवलप करने में आसानी होगी।
इस संदर्भ में प्रस्ताव को हरियाणा कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। आवासीय प्लॉटिड कॉलोनी के लिए संशोधित न्यूनतम क्षेत्र मानदंड हाइपर जोन के लिए 25 एकड़, उच्च के लिए 20 एकड़, मध्यम के लिए 15 एकड़ और निम्न के लिए 10 एकड़ हैं। इससे पहले, यह हाइपर एवं उच्च के लिए प्रत्येक 100-100 एकड़, मध्यम के लिए 15 एकड़ और निम्न के लिए 10 एकड़ था।
आवासीय समूह आवास के लिए क्षेत्र मानदंड को हाइपर जोन के लिए 5 एकड़, उच्च के लिए 4 एकड़, मध्यम के लिए दो एकड़ और निम्न के लिए एक एकड़ संशोधित किया गया है। इससे पहले, यह हाइपर एवं उच्च के लिए 10-10 एकड़, मध्यम के लिए दो एकड़ और निम्न के लिए एक एकड़ था।
इसी तरह औद्योगिक प्लॉटिड कॉलोनी के लिए क्षेत्र मानदंड को हाइपर जोन के लिए 25 एकड़, उच्च के लिए 20 एकड़, मध्यम के लिए 15 एकड़ और निम्न के लिए 10 एकड़ तक संशोधित किया गया है। इससे पूर्व, यह हाइपर और उच्च जोन के लिए 50-50 एकड़, मध्यम के लिए 15 एकड़ और निम्न के लिए 10 एकड़ था।
कम घनत्व की पर्यावरण अनुकूल कॉलोनी के लिए क्षेत्र मानदंड हाइपर जोन एवं उच्च के लिए 25-25 एकड़, मध्यम के लिए 15 एकड़ और निम्र के लिए 10 एकड़ तक संशोधित किये गये हैं। इससे पहले, यह हाइपर, उच्च, मध्यम और निम्न के लिए 100-100 एकड़ थे।
दीन दयाल जन आवास योजना के लिए क्षेत्र मानदंडों को संशोधित करते हुए हाइपर जोन के लिए 10 एकड़ और उच्च, मध्यम एवं निम्न के लिए पांच-पांच एकड़ किया गया है जबकि पहले, उच्च, मध्यम एवं निम्न के लिए यह पांच-पांच एकड़ था। जबकि किफायती समूह आवा, वाणिज्यिक, साइबर पार्क और साइबर सिटी के लिए न्यूनतम क्षेत्र मानदंडों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
गुरुग्राम तक बढ़ा जन आवास योजना का दायरा
दीन दयाल जन आवास योजना का दायरा अब गुरुग्राम तक बढ़ गया है। इसके अलावा सरकार ने अब किसी सेक्टर में किफायती समूह आवास कॉलोनी के लिए कुल सीमा मौजूदा 15 एकड़ से बढ़ाकर अब 30 एकड़ की गई है।
इस प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। मंत्रिमंडल द्वारा हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) जारी करने के लिए भी एक नीति को स्वीकृति प्रदान की गई जिसके माध्यम से अवसंरचना तथा जनसुविधाओं के निर्माण हेतु भूमि संग्रह आसान हो जाएगा।
मिलेगा अतिरिक्त वेतन
विधानसभा और सचिवालय के ड्राइवरों को अब एक माह का अतिरिक्त वेतन भी मिलेगा। सरकार 12 महीने के वेतन के अलावा इन चालकों को एक माह का वेतन और देगी। इस आशय के संदर्भ में प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
कैबिनेट के अन्य फैसले
कर्मचारी राज्य बीमा स्वास्थ्य देखभाल निदेशालय, हरियाणा ग्रुप डी (फील्ड स्टाफ) सेवा नियम, 2019, ग्रुप डी (मुख्यालय) और कर्मचारी राज्य बीमा स्वास्थ्य देखभाल निदेशालय हरियाणा, ‘निदेशालय लिपिकीय’, ग्रुप बी, सेवा नियम, 2019 तैयार करने को मंजूरी। इन नियमों को हरियाणा ग्रुप डी कर्मचारी (भर्ती एवं सेवा शर्तें), अधिनियम, 2018 के साथ संरेखित किया गया है।
जिससे विभागों में आयु, शैक्षणिक योग्यता और भर्ती की विधि समान रूप से लागू होगी। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कर्मचारी राज्य बीमा स्वास्थ्य देखभाल निदेशालय को वर्ष 2007 में स्वास्थ्य विभाग से अलग कर बनाया गया था। तब से तत्कालीन स्वास्थ्य विभाग के सेवा नियम ही नवगठित विभाग के कर्मचारियों पर लागू थे। ईएसआई विभाग ग्रुप सी और ग्रुप ए कर्मचारियों के लिए सेवा नियम बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
प्रबंधन प्रशिक्षु, प्रबंधक (विपणन) के दो पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) अपने स्तर पर और अपनी आवश्यकतानुसार भरेगा। ताकि व्यावसायिक योग्यता एवं युवा ऊर्जावान पेशेवरों की आवश्यकता को पूरा किया जा सके।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक चयन कमेटी गठित की गई है। एचएसआईआईडीसी के चेयरमैन, एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के निदेशक इसके सदस्य होंगे। प्रबंधन प्रशिक्षु, प्रबंधक (विपणन) के पद के लिए अनुभव एवं शैक्षणिक योग्यता एमबीए (मार्केटिंग) और इसके समकक्ष रहेगी।
हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन नियम 1976 के नियम 13 में संशोधन को स्वीकृति। संशोधन के अनुसार, डिफॉल्ट अवधि के लिए प्रस्तावित नवीकरण लाइसेंस फीस की लागू दर पर साधारण ब्याज, यदि प्रभार्य योग्य है, लिया जाएगा। संशोधन का उद्देश्य एकीकृत कॉलोनियों पर समान सिद्धांत का विस्तार करना है। इसे 7 मार्च 1976 से पूर्व प्रभावी करने की संभावना है।
बाजार शुल्क माफ करेगी सरकार
हरियाणा सरकार ने कृषि व्यवसाय तथा खाद्य प्रसंस्करण नीति- 2018 में संशोधन कर प्रदेश में स्थित खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में कच्चे माल के रूप में प्रयोग की जाने वाली दलहनों/दालों पर बाजार शुल्क माफ करने का निर्णय लिया है। कृषि विभाग ने हरियाणा कृषि उत्पाद मार्केट्स (सामान्य) नियम, 1962 के नियम 30 (6) के अनुरूप इस माफी को पहले ही स्वीकृति प्रदान कर दी है।
इस आशय का निर्णय मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। दलहनों/दालों पर बाजार शुल्क माफ करने के इस निर्णय से प्रदेश में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। जिससे रोजगार सृजित होगा तथा राज्य की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा तथा किसानों को उनके उत्पाद का अच्छा खरीद मूल्य मिलने से अंतत: किसानों को भी लाभ होगा।