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Chandigarh News: मरीजों की सेवा में जीवन समर्पित कर कायम की मानवता की मिसाल

Mon, 13 May 2024 06:32 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 13 May 2024 06:32 AM IST
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Set an example of humanity by dedicating his life to serving patients.
चंडीगढ़। अस्पताल में मरीजों की देखभाल में 24 घंटे लगी रहने वाली नर्सिंग ऑफिसर के लिए उनके मरीज के चेहरे पर आने वाली एक छोटी सी मुस्कान बेशकीमती उपहार से बढ़कर होती है। अपने मरीजों की सेवा में अपने दुख दर्द को भुलाकर जुटे रहने का उनका गुण उन्हें मानवता के असली सेवक के रूप में परिभाषित कर रहा है। इस नर्सिंग डे पर अमर उजाला ने मरीजों की सेवा में अपना जीवन गुजार देने वाली कुछ ऐसी ही नर्सिंग ऑफिसरों से बात की। पेश है एक
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जीएमएसएच-16 की सीनियर नर्सिंग ऑफिसर शोभना पठानिया (57) ने पूरा जीवन मरीजों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है। वह घर परिवार की जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए मानवता के सच्चे सेवक के रूप में मरीजों की सेवा कर रही हैं। कोविड के दौरान उन्होंने महीनों परिवार से दूर रहकर मरीजों की देखभाल की। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए शोभना पठनिया को इससे पहले पांच दिसंबर 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी फ्लोरेंस नाइटेंगल अवार्ड से सम्मानित कर चुके हैं।
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स्टेट अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है परमिंदर जीत थिंड को : जीएमएसएच 16 की सीनियर नर्सिंग ऑफिसर (52) परमिंदर जीत थिंड मौजूदा समय में अस्पताल के आईसीयू के प्रभारी हैं। बतौर नर्सिंग ऑफिसर मरीजों का दर्द दूर करने के लिए लगातार प्रयासरत रहने वाली परमिंदर नर्सिंग ऑफिसरो के समस्याओं के समाधान के लिए भी काफी सजग रहती है। उनकी कर्तव्य निष्ठा और मेहनत को देखते हुए ही उन्हें स्टेट अवाॅर्ड से भी नवाजा जा चुका है। परमिंदर का कहना है कि मरीज से उनका परिवार जैसा रिश्ता जुड़ जाता है। वह उनके दर्द से परेशान होती है और खुशी में साथ हंस पड़ती है।
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विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बखूबी निभा रहीं जिम्मेदारी : मोहाली के एक निजी अस्पताल में कार्डिएक ओटी में कार्यरत (51) वर्षीय सीनियर नर्स इकबाल कौर समर्पण और अनुशासन का प्रतीक हैं। स्तन कैंसर (स्टेज 3) से पीड़ित होने और वर्तमान में कीमोथेरेपी और रेडिएशन सहित उपचार से गुजरने के बावजूद, कौर असाध्य रूप से बीमार मरीजों की देखभाल कर रही हैं। इकबाल का कहना है कि जीवन की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मैंने अपनी मरीज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को कभी प्रभावित नही होने दिया। कभी-कभी, मैं अस्वस्थ महसूस करती हूं, लेकिन भगवान ने मुझे स्वास्थ्य की स्थिति से निपटने की ताकत दी है।
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