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परेशानी का समाधानः दर्शक अब बीच में बोल नहीं पाएंगे डॉयलॉग, बदली गई रामलीला की स्क्रिप्ट

Wed, 28 Aug 2019 11:39 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 28 Aug 2019 11:39 AM IST
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Sector 7 Chandigarh Navyug Committee Changed Ramlila Script
फाइल फोटो
अब रामलीला मंचन के दौरान दर्शक बीच-बीच में डायलॉग नहीं बोल पाएंगे। चंडीगढ़ सेक्टर 7 की नवयुग रामलीला एवं दशहरा कमेटी ने पूरी स्क्रिप्ट बदल दी है। पिछले 40 साल से हो रही रामलीला में एक जैसे ही डायलॉग होने के कारण दर्शकों ने उन्हें पूरी तरह से याद कर लिया था। इस वजह से जब रामलीला मंचन के दौरान कलाकार अपने डायलॉग बोलते थे तो उनका उत्तर दर्शकों के बीच से ही कोई न कोई बोल देता था।
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इसके कारण कलाकारों को परेशानी होती थी। साथ ही दर्शक जोर के ठहाके लगा देते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नवयुग रामलीला एवं दशहरा कमेटी के असिस्टेंट डायरेक्टर विकास सूद ने बताया कि इस साल रामलीला के संवाद और दृश्य में परिवर्तन करने का मुख्य उद्देश्य यह था कि वर्ष 1974 में जब रामलीला के डायलॉग लिखे गए उसमें अधिकतर उर्दू के थे। दर्शक भी धीरे-धीरे इन संवादों से भली भांति परिचित हो चुके थे।
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पिछले कई वर्षों से हम महसूस कर रहे थे कि जब मंच पर हमारे कलाकारों में संवाद आरंभ होता था दर्शकों में बैठे हुए बच्चे डायलॉग पहले ही बोल देते थे। इस वजह से कलाकार को अपनी प्रतिभा दिखाने का भरपूर आनंद नहीं आता था।
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उदाहरण के तौर पर कोप भवन में जब महाराजा दशरथ के संवाद का पहला डायलॉग इस तरह से था- ‘आज हसरत छा रही क्यों दरो दीवार पर, खाक उड़ती जा रही क्यों रानी के शृंगार पर’। जब दशरथ जी कहते थे ‘आज हसरत छा रही क्यों दरो दीवार पर’ और सामने बैठे बच्चे कह दिया करते थे ‘खाक उड़ती जा रही क्यों रानी के शृंगार पर’।

दूसरा कारण डायलॉग में बहुत से ऐसे शब्द थे जो उर्दू के थे। इसी चीज को ध्यान में रखते हुए निर्देशक प्रदीप कुमार ने सारी पटकथा को ही बदल डाला। इस नई पटकथा लिखने में निर्देशक प्रदीप कुमार का विकास सूद ने भरपूर साथ दिया। विकास सूद पिछले 22 वर्षों से संस्था के साथ जुड़े हुए हैं।

निर्देशक प्रदीप कुमार ने 34 साल तक किया रावण का रोल
नवयुग रामलीला एवं दशहरा कमेटी की स्थापना वर्ष 1979 में हुई थी तब निर्देशक प्रदीप कुमार ने इस कमेटी का नाम स्वयं रखा। खुद स्क्रिप्ट लिखी। 34 साल तक रावण का रोल किया। अब रावण का रोल उनका बेटा कर रहा है। प्रदीप कुमार अभी भी निर्देशन कर रहे हैं। संस्था के साथ करीब 70 लोग जुड़े हुए हैं और सब के सब अलग-अलग व्यवसाय से जुड़े हैं।
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