{"_id":"679f294c54c78409f509f43f","slug":"sector-38-firing-on-police-case-drugs-smuggler-bala-daughter-in-law-involved-2025-02-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेक्टर-38 फायरिंग मामला:रिकॉडिंग से पुलिस की मिलीभगत का खुलासा, ड्रग्स तस्कर बाला की बहू के संपर्क में था दीपक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सेक्टर-38 फायरिंग मामला:रिकॉडिंग से पुलिस की मिलीभगत का खुलासा, ड्रग्स तस्कर बाला की बहू के संपर्क में था दीपक
Sun, 02 Feb 2025 01:44 PM IST
अंकेश ठाकुर
संदीप खत्री, चंडीगढ़
संदीप खत्री, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Sun, 02 Feb 2025 01:44 PM IST
सार
चंडीगढ़ के सेक्टर-38 में पुलिस पर फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी दीपक के मोबाइल से पुलिस को एक ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली है, जिसमें पुलिस की मिलीभगत का खुलासा हुआ है।
विज्ञापन
पुलिस पर फायरिंग करता आरोपी।
- फोटो : संवाद (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ड्रग्स तस्कर बाला की बहू की रिकॉर्डिंग से पुलिसकर्मियों का ड्रग्स तस्कर से मिलीभगत का खुलासा हुआ। बाला की बहु की वॉयस रिकॉर्डिंग ड्रग्स तस्कर दीपक के फोन में मिली। सूत्रों की मानें तो इस रिकॉर्डिंग के बाद अफसरों ने सिपाही प्रदीप और सिपाही सुरेंद्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे।
सूत्रों ने बताया कि ड्रग्स तस्कर दीपक ने जिला क्राइम सेल को एक रिकॉर्डिंग दी है। यह रिकॉर्डिंग बाला की बहू ने दीपक को व्हाट्सएप पर भेजी थी, जिसमें महिला बोल रही है कि दीपक तेरा फोन आ गया है, फोन ले जा। लेकिन इस रिकॉर्डिंग में प्रदीप और सुरेंद्र का नाम नहीं लिया गया। हैरानी इस बात की है कि विभाग ने अपने पुलिसकर्मियों के खिलाफ तो कार्रवाई कर दी, लेकिन बाला की बहू के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि वह सीधे तौर पर ड्रग्स तस्कर बाला की बहू के संपर्क में था।
सूत्रों ने बताया कि गोली चलने की घटना से एक दिन पहले भी दीपक बाला के पास क्रैक बॉल (ड्रग्स) लेने आया था। जहां उसे बाला का लड़का मिला था। बाला जेल में थी, जिसके चलते उसे क्रैक बॉल नहीं मिल पाई। दीपक ने कहा था कि जैसे मर्जी उसे क्रैक बॉल का इंतजाम कर दें, वह दोबारा आएगा। इसके बाद जब दोबारा क्रैक बॉल लेने आया तो गोलियां चलने की घटना हो गई।
विज्ञापन
डिस्क्लोजर रिपोर्ट में नहीं था सुरेंद्र का नाम
डिस्ट्रिक्ट सेल में हुई दीपक से पूछताछ के बाद ड्रग्स तस्कर दीपक की डिस्क्लोजर रिपोर्ट पर सेक्टर-39 थाने में एफआईआर दर्ज की गई। रिपोर्ट में प्रदीप का नाम था, लेकिन सुरेंद्र का नहीं। दीपक ने बताया था कि प्रदीप के साथ एक और मुलाजिम था। दीपक उसका नाम नहीं जानता था। वहीं, दीपक ने तीसरे मुलाजिम का भी खुलासा किया था, जो ट्रैक सूट में था। अभी तक पुलिस उस मुलाजिम का पता नहीं लगा पाई। दूसरी बार उससे झपटमारी करने में दो पुलिसकर्मी वर्दी में गाड़ी में बैठे थे। तीसरा पुलिसकर्मी सूट में था।
दीपक का आरोप प्रदीप ने छीना था मोबाइल
दीपक ने पूछताछ में खुलासा किया था कि गोली चलने की घटना से पहले प्रदीप उसे दो बार पकड़ छोड़ चुका था। पहली बार उससे 35 हजार रुपये, क्रैक बॉल (ड्रग्स) और मोबाइल छीन लिया गया।। दूसरी बार उससे सोने की चेन छीन ली थी। दोनों बार उसे पकड़ कर छोड़ दिया गया। दीपक ने कहा था कि बाला ने उसका मोबाइल वापस करवा दिया था।
तीन दिन के रिमांड के बाद प्रदीप और सुरेंद्र को भेजा जेल
पुलिस ने तीन दिन के रिमांड के बाद प्रदीप और सुरेंद्र को शुक्रवार को जिला अदालत में पेश किया गया। जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वहीं, जब इस मामले में अदालत में प्रदीप और सुरेंद्र से बात की गई तो उन्होंने कहा वह ड्रग्स तस्कर दीपक को नहीं जानते। गोली चलने की घटना से पहले कभी दीपक को मिले भी नहीं थे। उन्होंने कहा गोलियां चलने से उनकी जान भी जा सकती थी। अगर उन्हें पकड़ने की कोशिश न करते तो दीपक की पहचान भी न होती और वह पकड़ा भी नहीं जाता। वहीं, प्रदीप और सुरेंद्र ने कहा कि एक वांटेड क्रिमिनल जो भगोड़ा था, उसके कहने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया। अगर दीपक ने उनके ऊपर आरोप लगाए थे तो उनके खिलाफ विभागीय जांच भी खोली जा सकती थी। जांच में दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ अधिकारी कुछ भी कार्रवाई कर सकते थे।
विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि ड्रग्स तस्कर दीपक ने जिला क्राइम सेल को एक रिकॉर्डिंग दी है। यह रिकॉर्डिंग बाला की बहू ने दीपक को व्हाट्सएप पर भेजी थी, जिसमें महिला बोल रही है कि दीपक तेरा फोन आ गया है, फोन ले जा। लेकिन इस रिकॉर्डिंग में प्रदीप और सुरेंद्र का नाम नहीं लिया गया। हैरानी इस बात की है कि विभाग ने अपने पुलिसकर्मियों के खिलाफ तो कार्रवाई कर दी, लेकिन बाला की बहू के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि वह सीधे तौर पर ड्रग्स तस्कर बाला की बहू के संपर्क में था।
विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि गोली चलने की घटना से एक दिन पहले भी दीपक बाला के पास क्रैक बॉल (ड्रग्स) लेने आया था। जहां उसे बाला का लड़का मिला था। बाला जेल में थी, जिसके चलते उसे क्रैक बॉल नहीं मिल पाई। दीपक ने कहा था कि जैसे मर्जी उसे क्रैक बॉल का इंतजाम कर दें, वह दोबारा आएगा। इसके बाद जब दोबारा क्रैक बॉल लेने आया तो गोलियां चलने की घटना हो गई।
विज्ञापन
डिस्क्लोजर रिपोर्ट में नहीं था सुरेंद्र का नाम
डिस्ट्रिक्ट सेल में हुई दीपक से पूछताछ के बाद ड्रग्स तस्कर दीपक की डिस्क्लोजर रिपोर्ट पर सेक्टर-39 थाने में एफआईआर दर्ज की गई। रिपोर्ट में प्रदीप का नाम था, लेकिन सुरेंद्र का नहीं। दीपक ने बताया था कि प्रदीप के साथ एक और मुलाजिम था। दीपक उसका नाम नहीं जानता था। वहीं, दीपक ने तीसरे मुलाजिम का भी खुलासा किया था, जो ट्रैक सूट में था। अभी तक पुलिस उस मुलाजिम का पता नहीं लगा पाई। दूसरी बार उससे झपटमारी करने में दो पुलिसकर्मी वर्दी में गाड़ी में बैठे थे। तीसरा पुलिसकर्मी सूट में था।
दीपक का आरोप प्रदीप ने छीना था मोबाइल
दीपक ने पूछताछ में खुलासा किया था कि गोली चलने की घटना से पहले प्रदीप उसे दो बार पकड़ छोड़ चुका था। पहली बार उससे 35 हजार रुपये, क्रैक बॉल (ड्रग्स) और मोबाइल छीन लिया गया।। दूसरी बार उससे सोने की चेन छीन ली थी। दोनों बार उसे पकड़ कर छोड़ दिया गया। दीपक ने कहा था कि बाला ने उसका मोबाइल वापस करवा दिया था।
तीन दिन के रिमांड के बाद प्रदीप और सुरेंद्र को भेजा जेल
पुलिस ने तीन दिन के रिमांड के बाद प्रदीप और सुरेंद्र को शुक्रवार को जिला अदालत में पेश किया गया। जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वहीं, जब इस मामले में अदालत में प्रदीप और सुरेंद्र से बात की गई तो उन्होंने कहा वह ड्रग्स तस्कर दीपक को नहीं जानते। गोली चलने की घटना से पहले कभी दीपक को मिले भी नहीं थे। उन्होंने कहा गोलियां चलने से उनकी जान भी जा सकती थी। अगर उन्हें पकड़ने की कोशिश न करते तो दीपक की पहचान भी न होती और वह पकड़ा भी नहीं जाता। वहीं, प्रदीप और सुरेंद्र ने कहा कि एक वांटेड क्रिमिनल जो भगोड़ा था, उसके कहने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया। अगर दीपक ने उनके ऊपर आरोप लगाए थे तो उनके खिलाफ विभागीय जांच भी खोली जा सकती थी। जांच में दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ अधिकारी कुछ भी कार्रवाई कर सकते थे।