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सेक्टर-17 नाइलिट हादसा: 2 साल बाद भी धधक रहीं दर्द की लपटें

Wed, 08 Jun 2016 01:37 AM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 08 Jun 2016 01:37 AM IST
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Sector 17 NIELIT incident: reminisce of 2 years of brutal fire
सेक्टर-17 नाइलिट हादसा - फोटो : amar ujala

साल 2014 का 8 जून की रात नाइलिट की इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। 2 साल बाद भी यहां धधक रहीं दर्द की लपटें। दरअसल सिटी के हार्ट सेक्टर-17 स्थित नाइलिट की इमारत हादसा कई वर्षों में शहर का सबसे बड़ा हादसा था। इसमें फायर विभाग के दो कर्मचारी शहीद हो गए थे।

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हैरानी की बात यह है कि स्मार्ट सिटी बनाने का दावा करने वाला प्रशासन अभी तक इमारत के मलबे को भी नहीं उठा पाया है। इस हादसे में एयरफोर्स कर्मचारी रविंदर और फायर विभाग के अमनदीप शहीद हो गए थे। शहीद रविंदर शर्मा का परिवार बड़े बेटे के लिए नौकरी की मांग कर रहा है, लेकिन अभी तक धीरज को नौकरी नहीं मिली है।
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इमारत गिरने के बाद प्रशासन और नगर निगम की ओर से सुधार के लिए कई दावे किए गए थे, लेकिन अधिकांश दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए। हादसे के बाद प्रशासन की ओर से सेक्टर-17 की कई इमारतों को अनसेफ घोषित किया गया लेकिन खस्ता हाल इमारतों की हालत सुधारने के लिए अभी तक कुछ नहीं किया गया है। अब भी कई इमारतों की दीवारों में दरारें हैं और कंटीलिवर गिर रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर फायर विभाग सेक्टर-17 की इमारतों को नोटिस ही जारी करके चुप्पी साध लेता  है। किसी को जागरूक करने का भी कदम नहीं उठाता है।
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नाइटिल ढहने के बाद प्रशासन ने सेक्टर-17 की ब्यूटीफिकेशन को बढ़ाने के साथ -साथ वहां की वायलेशन दूर करने और खुले तारों की व्यवस्था सुधारने का दावा किया था।  यह भी निर्देश दिया गया था कि इमारत के नीचे डीजल नहीं रखेगा लेकिन यह भी इस तरह के वायलेशन अब भी जारी हैम। इमारतों के बाहर लगे अवैध विज्ञापन बोर्ड भी नहीं हटाए गए हैं।

अनसेफ कहते हुए पैसेज तोड़ दिए
इस घटना के बाद ली कार्बूजिए के डिजाइन के अनुसार सेक्टर-17 के 34 कनेक्टिंग पैसेज को अनसेफ घोषित कर दिया गया, और उनमें से 10 को तोड़ दिया गया लेकिन दोबारा इनका निर्माण नहीं कराया गया है। ऐसे में अब पैदल चलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दोपहर में हादसा होने पर नहीं पहुंचेगी गाड़ी

Sector 17 NIELIT incident: reminisce of 2 years of brutal fire
सेक्टर-17 नाइलिट हादसा - फोटो : amar ujala

इतनी बड़ी वारदात के बावजूद सेक्टर-17 में पार्किंगों की हालत सुधारने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। अगर दोपहर में कोई हादसा हो जाए तो दमकल विभाग की गाड़ी भीतर इमारतों तक नहीं पहुंच पाएगी। पिछले साल जब वारदात हुई थी तो आग बुझाने में कर्मचारी कई दिन लगे रहे थे। सेक्टर-17 में किसी भी इमारत के नीचे वाटर सेफ्टी टैंक रनहीं है। 
मलबा उठाने की जिम्मेवारी संपदा विभाग की
नाइलिट की इमारत गिरने के बाद प्रशासन की ओर से एक कमेटी का गठन किया गया था। पहले यह कहा गया कि मलबा उठाने से अन्य इमारतों को खतरा हो सकता है लेकिन कुछ माह बीत जाने के बाद कमेटी ने रिपोर्ट दी कि मलबा एक्सपर्ट की सुपरविजन में उठाया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि इमारत के मालिक मलबा को उठाए, लेकिन अगर वह नहीं उठाते है तो संपदा विभाग इस मलबे को उठाएगा और खर्च इमारत के मालिक से वसूलेगा। लेकिन एक साल बाद भी मलबा नहीं हटाया गया है। इस कारण यह एरिया डेड हो रहा है।

मामूली आग भड़की थी
नाइलिट में एसी प्लांट से शाम 4.45 बजे आग भड़की, लेकिन दमकल विभाग के कर्मचारियों के प्रयास के बावजूद आग ऊपर की मंजिलों तक बढ़ गई। आग बढ़ते- बढ़ते रात 10 बजे तक इतनी भयानक हो चुकी थी कि इमारत के भीतर लगा सरिया बुरी तरह से गल गया और इमारत ध्वस्त हो गई। आग की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके कारण पूरे उत्तरी सेक्टर में धुआं फैल गया था। आग फैलने का एक बड़ा कारण बेसमेंट में रखा डीजल था। घटना के एक माह बाद तक बाजार के सभी शो रूम बंद रखे गए थे।

इमारत के मलबे को उठाने के लिए इंजीनियरिंग विंग को लिखा

Sector 17 NIELIT incident: reminisce of 2 years of brutal fire
सेक्टर-17 नाइलिट हादसा - फोटो : amar ujala

राजीव गुप्ता, ज्वाइंट कमिश्नर, नगर निगम ने बताया कि नगर निगम ने मंगलवार को ही शहीद रविंदर शर्मा के बेटे को नौकरी देेन का निर्णय लिया है। उसको फायर कर्मचारी में नौकरी नहीं दी जा सकती। चपड़ासी की नौकरी दी जा रही है। शहीद के बेटा दसवीं पास है जबकि फायर कर्मचारी के लिए बारहवी पढ़ा होना जरूरी है।

मुकेश आनंद,चीफ इंजीनियर के मुताब‌िक मलबा उठाने की जिम्मेवारी प्रशासन और नगर निगम की नहीं, बल्कि संपदा विभाग की है। क्योंकि सेक्टर-17 की सभी इमारतें संपदा विभाग के अंतर्गत आती हैं।

अजीत बाला जी जोशी, डीसी ने बताया कि नाइलिट इमारत के मलबे को उठाने के लिए इंजीनियरिंग विंग को लिखा है। जल्द ही कोई न कोई कदम उठाया जाएगा।

डड्डूमाजरा के पार्षद सतप्रकाश अग्रवाल का कहना है कि शहीद रविंदर का परिवार उनके वार्ड में रहता है। रविंदर के बेटे धीरज को फायर विभाग में ही नौकरी दी जानी चाहिए। इसके लिए वह अलग से कमिश्नर और मेयर से बात करेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो सदन में भी मामला उठाएंगे। नौकरी मिलने में पहले ही काफी देरी हो चुकी है।

तुरंत नौकरी दी जाए: हरजिंदर
इंटक उपाध्यक्ष हरजिंदर सिंह का कहना है कि पंजाब में अगर किसी की ड्यूटी के दौरान मौत होती है तो उसके परिवार के सदस्य को तुरंत प्रभाव से नौकरी दे दी जाती है। चंडीगढ़ में पंजाब के रूल्स लागू होने के बावजूद यहां पर नौकरी नहीं दी जाती है। फायर कर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाते हैं।

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