हरियाणा की सियासत: 2021 में किसान आंदोलन के इर्द गिर्द घूमती रही राजनीति, कांग्रेस और भाजपा में लंबी चली जद्दोजहद के बाद हुई शांति
किसान आंदोलन के बीच ही हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मुख्यमंत्री मनेाहर लाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार किसान विरोधी है। इसलिए किसानों की सुनवाई नहीं हो रही है।
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हरियाणा में लगातार दूसरी बार सत्ता में आई भाजपा का दूसरा साल 2021 सियासी उलझनों में बीता। हरियाणा की धरती वर्ष 2021 में किसान आंदोलन का केंद्र रही। आंदोलन इतना प्रभावी रहा कि देश विदेश में लोग आंदोलन के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहने लगे। अंतत: केंद्र सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े। इसके बाद आंदोलन खत्म हो गया। जिसके बाद हरियाणा सरकार ने भी राहत की सांस ली।
2020 के अंतिम दिनों में किसान आंदोनल परवान चढ़ा। केंद्र को इस आंदोलन की भनक लग गई थी, लेकिन पंजाब में भाजपा सरकार नहीं थी। इसलिए हरियाणा के नेताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी गई कि कृषि कानूनों के फायदे के बार में लोगों को अवगत करवाया जाए। कृषि कानूनों के प्रचार का माध्यम इतना सशक्त होना चाहिए कि पंजाब के किसानों को यह समझ में आ जाए कि यह कानून उनके हित के लिए हैं।
लेकिन सरकार की बात किसानों को रास नहीं आई। इसी बीच कुरुक्षेत्र में किसानों पर हुए लाठीचार्ज ने उनके हौसले और बढ़ा दिए। चिंगारी धीरे धीरे सुलगती रही और किसान नेताओं की बयानबाजी शुरू हुई। इस बीच पंजाब की किसान जत्थेबंदियों ने हरियाणा का रुख शुरू कर दिया। पुलिस ने रोकने की कोशिश की लेकिन कोशिशें नाकाम रहीं। कुंडली बार्डर पर किसानों ने मोर्चा लगा दिया। पंजाब के किसानों का साथ हरियाणा के किसानों ने दिया और मोर्चा पक्का हो गया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की वार्ता के बावजूद कोई हल नहीं निकला।
किसानों ने हरियाणा सरकार के मंत्रियों और मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों का विरोध शुरू कर दिया। सियासत तेज होती गई और करनाल में मुख्यमंत्री की एक सभा का विरोध कर दिया गया। किसानों ने सीएम का हेलीकाप्टर नहीं उतरने दिया। समय बीतता गया और आंदोलन लंबा होता गया। सैकड़ों किसानों की जान गई, लेकिन आंदोलनकारियों का हौसला नहीं टूटा। गुरुपर्व पर केंद्र सरकार ने अचानक कृषि कानून वापस लेने का एलान किया और आंदोलन वापस हुआ।
हुड्डा और मनोहर के बीच छिड़ी सियासी जंग
किसान आंदोलन के बीच ही हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मुख्यमंत्री मनेाहर लाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार किसान विरोधी है। इसलिए किसानों की सुनवाई नहीं हो रही है। यह कहते हुए हुडडा मैदान में आ गए और विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव ले आए। हालांकि उनका अविश्वास प्रस्ताव सरकार के सामने टिक नहीं पाया, लेकिन हुड्डा ने सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
अभय चौटाला का इस्तीफा चर्चा में रहा
ऐलनाबाद से विधायक अभय सिंह चौटाला का इस्तीफा चर्चा में रहा। अभय चौटाला ने जजपा के खिलाफ किसान आंदोलन को लेकर मोरचा खोल दिया और जजपा को किसान विरोधी करार दे दिया। उनके इस्तीफे ने जजपा पर दबाव बनाने का काम तो किया ही साथ ही भाजपा की भी मुश्किलें बढ़ाईं। ऐलनाबाद सीट पर उपचुनाव हुआ और अभय चौटाला यहां से दोबारा जीते।
लखीमपुर कांड ने बढ़ाई हलचल
किसान आंदोलन अंतिम चरण में था कि लखीमपुर में घटी घटना ने आंदोलन को हवा दे दी। पंजाब हरियाणा के नेता सियासत करने लखीमपुर पहुंच गए। जिसमें सांसद दीपेंद्र हुड्डा प्रियंका गांधी के साथ सबसे आगे थे। दीपेंद्र ने यहां से एक नए सफर की शुरुआत की और उन्हें हरियाणा की राजनीति के अलावा उत्तर प्रदेश के कांग्रेस नेताओं में भी लोकप्रिय होने का मौका मिला।
जब मुख्यमंत्री को देना पड़ा एमएसपी का भरोसा
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा और पंजाब के किसानों को समझाने के अथक प्रयास किए। तीन कृषि कानूनों को विस्तार से समझाने के अलावा उन्होंने एमएसपी पर भी केंद्र सरकार का रुख साफ किया, लेकिन किसानों को उनकी बात रास नहीं आई। हालात यहां तक आ गए कि बरोदा उपचुनाव में मनोहर लाल ने यह दावा किया कि एमएसपी खत्म नहीं की जाएगी। अगर ऐसा होगा तो वे राजनीति छोड़ देंगे, लेकिन किसानों को यह भी रास नहीं आया और भाजपा को इस चुनाव से हाथ धोने पड़े।