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पीयू के रिसर्च ब्लॉक व छात्रावासों के लिए नई जमीन की तलाश
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय अपने विस्तार लिए तेजी से जुटा हुआ है लेकिन रिसर्च ब्लॉक व छात्रावासों के लिए जमीन नहीं मिल रही। अब अफसर संभावनाएं तलाश रहे हैं। बताया जाता है कि पीयू को दूसरी जगह सस्ते दर पर जमीन मिलेगी तो उस पर ये निर्माण हो सकेंगे। हालांकि सीनेट व सिंडिकेट की ओर से पहले इस प्रस्ताव को पास किया जाएगा। प्रस्ताव मार्च तक की बैठक में लाया जा सकता है।
वर्ष 2013 में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से मास्टर प्लान 2030 तैयार किया गया था। इस प्लान में पीयू ने 140 एकड़ जमीन मांगी और वह प्लान के मुताबिक दे दी गई। इस जमीन को चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से उसी समय पीयू को हैंडओवर (सौंपा जाना) करना चाहिए था, लेकिन पैसे के अभाव में ऐसा नहीं किया गया जबकि शिक्षण संस्थान के लिए जमीन मुफ्त में मिलनी थी। पीयू के पास वैसे ही पैसे की किल्लत थी। दो साल बाद पीजीआई को भी अपने नए कैंपस के लिए जगह चाहिए थी और 2015 में पीयू की 135 एकड़ भूमि में से 50 एकड़ जमीन पीजीआई को दे दी गई।
बताते हैं कि पीजीआई को केंद्र से इस जमीन के लिए रकम मिली थी जो चुका दी गई। अब पीयू के खाते में 85 एकड़ जमीन ही बची, जो कम है। हालांकि यह जमीन हाल ही में मिल जाती है तो पीयू इस जमीन को ले सकती है। पीयू यह भी चाहती है कि पीजीआई की तरह इस जमीन के लिए पैसे केंद्र सरकार दे।
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दो बार प्रस्ताव तैयार हुआ पर मुहर नहीं लगी
उसी दौरान पीयू से एक प्रोजेक्ट मांगा गया कि वह 85 एकड़ भूमि पर क्या करेंगे। पीयू ने विस्तृत प्लान दिया। चार नए हॉस्टल खोलने के अलावा 500 शिक्षक आवास व रिसर्च ब्लॉक शुरू करने की योजना दी। कैंपस को जोड़ने के लिए बसें भी चलाने की बात कही। यह प्लान दो बार प्रशासन को दिया गया, लेकिन इस पर मुहर नहीं लग पाई, पर पीयू के शिक्षकों व छात्रों को बताया गया कि उन्हें जल्द ही पश्चिम कैंपस मिलेगा।
पीयू की आय बढ़ाने की योजना नहीं चढ़ी सिरे
पीयू में हर साल रिसर्च के लिए 500 से अधिक विद्यार्थी दाखिला लेते हैं। इतने ही शोधार्थी पहले से कार्य कर रहे होते हैं। इनके अलावा विदेशी विद्यार्थी भी आते हैं। पीयू की योजना थी कि रिसर्च ब्लॉक तैयार होगा तो विदेशी शोधार्थियों को आकर्षित किया जा सकेगा। वे केवल अपने सूटकेस के साथ आएंगे और शोध करके अपने देश चले जाएंगे। हर सुविधा उनको रिसर्च ब्लॉक में मिलनी थी। इससे पीयू की आय कई गुना बढ़ती और शोध पेपर देश-दुनिया में छा जाते। इससे रैंकिंग भी बढ़ती लेकिन यह सभी योजना धरी रह गई।
क्या कहता है पीयू प्रशासन
चंडीगढ़ प्रशासन के मास्टर प्लान में पीयू के लिए जो जमीन है, उसे अभी हैंडओवर नहीं किया गया है। हम जमीन का इंतजार कर रहे हैं। अगर जमीन नहीं मिलती है तो दूसरी संभावनाएं तलाशेंगे। तैयारियां चल रही हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
पीयू ने सारंगपुर कैंपस के लिए दो बार प्रस्ताव तैयार करके प्रशासन को भेजा गया, लेकिन जमीन नहीं दी गई। पीयू को मास्टर प्लान में आवंटित की गई जमीन का एक हिस्सा पीजीआई को दे दिया गया। - प्रो. एके ग्रोवर, पूर्व वीसी पीयू
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वर्ष 2013 में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से मास्टर प्लान 2030 तैयार किया गया था। इस प्लान में पीयू ने 140 एकड़ जमीन मांगी और वह प्लान के मुताबिक दे दी गई। इस जमीन को चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से उसी समय पीयू को हैंडओवर (सौंपा जाना) करना चाहिए था, लेकिन पैसे के अभाव में ऐसा नहीं किया गया जबकि शिक्षण संस्थान के लिए जमीन मुफ्त में मिलनी थी। पीयू के पास वैसे ही पैसे की किल्लत थी। दो साल बाद पीजीआई को भी अपने नए कैंपस के लिए जगह चाहिए थी और 2015 में पीयू की 135 एकड़ भूमि में से 50 एकड़ जमीन पीजीआई को दे दी गई।
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बताते हैं कि पीजीआई को केंद्र से इस जमीन के लिए रकम मिली थी जो चुका दी गई। अब पीयू के खाते में 85 एकड़ जमीन ही बची, जो कम है। हालांकि यह जमीन हाल ही में मिल जाती है तो पीयू इस जमीन को ले सकती है। पीयू यह भी चाहती है कि पीजीआई की तरह इस जमीन के लिए पैसे केंद्र सरकार दे।
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दो बार प्रस्ताव तैयार हुआ पर मुहर नहीं लगी
उसी दौरान पीयू से एक प्रोजेक्ट मांगा गया कि वह 85 एकड़ भूमि पर क्या करेंगे। पीयू ने विस्तृत प्लान दिया। चार नए हॉस्टल खोलने के अलावा 500 शिक्षक आवास व रिसर्च ब्लॉक शुरू करने की योजना दी। कैंपस को जोड़ने के लिए बसें भी चलाने की बात कही। यह प्लान दो बार प्रशासन को दिया गया, लेकिन इस पर मुहर नहीं लग पाई, पर पीयू के शिक्षकों व छात्रों को बताया गया कि उन्हें जल्द ही पश्चिम कैंपस मिलेगा।
पीयू की आय बढ़ाने की योजना नहीं चढ़ी सिरे
पीयू में हर साल रिसर्च के लिए 500 से अधिक विद्यार्थी दाखिला लेते हैं। इतने ही शोधार्थी पहले से कार्य कर रहे होते हैं। इनके अलावा विदेशी विद्यार्थी भी आते हैं। पीयू की योजना थी कि रिसर्च ब्लॉक तैयार होगा तो विदेशी शोधार्थियों को आकर्षित किया जा सकेगा। वे केवल अपने सूटकेस के साथ आएंगे और शोध करके अपने देश चले जाएंगे। हर सुविधा उनको रिसर्च ब्लॉक में मिलनी थी। इससे पीयू की आय कई गुना बढ़ती और शोध पेपर देश-दुनिया में छा जाते। इससे रैंकिंग भी बढ़ती लेकिन यह सभी योजना धरी रह गई।
क्या कहता है पीयू प्रशासन
चंडीगढ़ प्रशासन के मास्टर प्लान में पीयू के लिए जो जमीन है, उसे अभी हैंडओवर नहीं किया गया है। हम जमीन का इंतजार कर रहे हैं। अगर जमीन नहीं मिलती है तो दूसरी संभावनाएं तलाशेंगे। तैयारियां चल रही हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
पीयू ने सारंगपुर कैंपस के लिए दो बार प्रस्ताव तैयार करके प्रशासन को भेजा गया, लेकिन जमीन नहीं दी गई। पीयू को मास्टर प्लान में आवंटित की गई जमीन का एक हिस्सा पीजीआई को दे दिया गया। - प्रो. एके ग्रोवर, पूर्व वीसी पीयू