पंजाबः कीमत पर अटका करतारपुर कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण का काम
करतारपुर कॉरिडोर के लिए श्री डेरा बाबा नानक के जिन किसानों की जमीन अधिगृहित की जानी है, उनके साथ एसडीएम अशोक कुमार शर्मा ने मंगलवार को मीटिंग की। मीटिंग सिरे नहीं चढ़ी, क्योंकि किसान अधिक मुआवजे की मांग कर रहे थे। इसके बाद एसडीएम ने दोबारा 5 किसान प्रतिनिधियों को मीटिंग के लिए अपने दफ्तर में बुलाया, लेकिन इसमें भी कोई हल नहीं निकला।
दर्शन स्थल पर किसानों के साथ मीटिंग करने आए एसडीएम अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा कोशिश की जा रही है कि जल्द से जल्द करतारपुर कॉरिडोर का काम शुरू हो। जमीन अधिगृहित करने के लिए किसानों के साथ मीटिंग की गई थी। किसानों के मन में भ्रम है कि उन्हें उनकी जमीन का मुआवजा कम मिलेगा। किसान तरनतारन, जंडियाला गुरु आदि में जो जमीनों का रेट किसानों को मिला है, उसी के हिसाब से अपनी जमीन का मूल्य मांग रहे हैं।
प्रशासन ने पिछले 3 साल की औसत निकाली है, जिसमें पता चला है कि बार्डर के किनारे जमीनों की रजिस्ट्रियां बहुत कम रेट पर हुई हैं। जमीन का जो सही रेट है, वह भी यहां पर कम है। किसान अपनी जमीनों के लिए करोड़ों रुपये के मुआवजे की मांग कर रहे हैं। एसडीएम ने बताया कि जिन जिलों में जमीन के रेट के हिसाब से किसान अपनी जमीनों के मूल्यों की मांग कर रहे हैं, उनका रिकॉर्ड भी उन्होंने मंगवाया है, ताकि देखा जाए कि किस हिसाब से जमीनों का मूल्य है।
एसडीएम ने बताया कि क्षेत्र में 25-30 लाख रुपये प्रति किले जमीन की कीमत है, मगर किसान इसे उचित नहीं मान रहे। वहीं किसानों ने कहा कि सरकार उन्हें मार्केट रेट के हिसाब से उनकी जमीनों का मोल दे। उनके लिए सरकार पहले ही प्रबंध करे। सरकार ने अभी तक जमीनों का कोई मूल्य तय नहीं किया है। आज की मीटिंग में जमीनों के रेट संबंधी बातचीत की जानी थी, जो सिरे नहीं चढ़ी है।
किसानों की मांग है कि जो तरनतारन से जंडियाला को रोड निकला है, उसमें आती जमीनों का जो मूल्य किसानों को मिला है, उसके हिसाब से श्री डेरा बाबा नानक में भी किसानों को उनकी जमीनों का मूल्य दिया जाए। किसानों ने कहा कि वह सरकार से प्रति किला कम से कम 88 लाख रुपये देने की मांग करते हैं। किसानों ने कहा कि अगर उनकी इस संबंधी सरकार से सहमति नहीं होती तो वह अगली रुपरेखा तैयार करेंगे।