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उपलब्धि: एचएयू हिसार के वैज्ञानिकों ने खोजी बाजरे की नई बीमारी, अमेरिकन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी ने दी मान्यता

Fri, 15 Oct 2021 01:10 PM IST
प्रमोद कुमार अमर उजाला ब्यूरो, हिसार
अमर उजाला ब्यूरो, हिसार Published by: प्रमोद कुमार Updated Fri, 15 Oct 2021 01:10 PM IST
सार

एचएयू हिसार के वैज्ञानिकों ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। वैज्ञानिकों ने बाजरे की नई बीमारी की खोज की है। जिसका नाम स्टेम रोट है। खास बात यह भी है कि इस अमेरिकन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी ने मान्यता दे दी है। दुनिया में यह पहली बार खोजी गई बीमारी है।

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Scientists of Haryana Agricultural University Hisar discovered new disease of millet
शोध करने वाले वैज्ञानिकों की टीम के साथ वीसी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के वैज्ञानिकों ने एक बार फिर नया कीर्तिमान बनाया है। वैज्ञानिकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजरे की नई बीमारी और इसके कारक जीवाणु क्लेबसिएला एरोजेंस की खोज की है। अब तक विश्व स्तर पर इस तरह की बाजरे की किसी बीमारी की खोज नहीं की गई है। वैज्ञानिकों ने इस रोग के प्रबंधन के कार्य शुरू कर दिए हैं। जल्द से जल्द आनुवांशिक स्तर पर प्रतिरोध स्रोत को खोजने की कोशिश करेंगे। पौधों में नई बीमारी को मान्यता देने वाली अमेरिकन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी (एपीएस), यूएसए द्वारा प्रकाशित प्रतिष्ठित जर्नल प्लांट डिजीज में वैज्ञानिकों की इस नई बीमारी की रिपोर्ट को प्रथम शोध रिपोर्ट के रूप में जर्नल में स्वीकार कर मान्यता दी गई है।
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स्टेम रोट बीमारी पर शोध रिपोर्ट की प्रस्तुत
एपीएस पौधों की बीमारियों के अध्ययन के लिए सबसे पुराने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संगठनों में से एक है, जो विशेषत: पौधों की बीमारियों पर विश्वस्तरीय प्रकाशन करती है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक दुनिया में इस बीमारी की खोज करने वाले पहले वैज्ञानिक हैं। इन वैज्ञानिकों ने बाजरे में स्टेम रोट बीमारी पर शोध रिपोर्ट प्रस्तुत की है। कुलपति डॉ. बीआर कांबोज ने बताया कि अब बीमारियों की सही, शीघ्र पहचान और उसके वास्तविक कारण का पता लगाना अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। इस मौके पर ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा एवं पादपरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. हवासिंह सहारण मौजूद रहे।
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हिसार, भिवानी और रेवाड़ी के खेत अधिक प्रभावित
अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत ने बताया कि पहली बार 2018 में बाजरे में नई तरह की बीमारी दिखाई देने पर वैज्ञानिकों ने तत्परता से काम किया। तीन साल की कठोर मेहनत के बाद वैज्ञानिकों ने इस बीमारी की खोज की है। हिसार, भिवानी और रेवाड़ी के खेतों में यह बीमारी 70 प्रतिशत तक देखने को मिली है। रोग को खोजने में विश्वविद्यालय के पादप रोग वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार मलिक मुख्य शोधकर्ता रहे। विश्वविद्यालय की डॉ. पूजा सांगवान, डॉ. मनजीत सिंह, डॉ. राकेश पूनियां, डॉ. देवव्रत यादव, डॉ. पम्मी कुमारी और डॉ. सुरेंद्र कुमार पाहुजा का इस प्रोजेक्ट में विशेष योगदान रहा है।


 
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