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Hindi News ›   Chandigarh ›   School teachers will no longer be able to become school heads without leadership training in Haryana

बदलाव: हरियाणा में अब बिना प्रशिक्षण स्कूल मुखिया नहीं बन पाएंगे शिक्षक, नए सत्र से नेतृत्व प्रशिक्षण होगा अनिवार्य

Sun, 20 Mar 2022 11:44 AM IST
निवेदिता वर्मा यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 20 Mar 2022 11:44 AM IST
सार

इस कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को स्कूल प्रबंधन और नेतृत्व कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। स्कूल मुखिया बनने पर उन्हें स्कूल के प्रशासनिक कार्य बेहतर तरीके से करने में मदद मिलेगी।

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School teachers will no longer be able to become school heads without leadership training in Haryana
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में 2022-23 से शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। स्कूली शिक्षक बिना नेतृत्व प्रशिक्षण के अब स्कूल मुखिया नहीं बन पाएंगे। प्रशिक्षण हासिल करने के बाद ही पदोन्नति की राह खुलेगी। प्रदेश सरकार नए शैक्षणिक सत्र में शैक्षणिक संस्थान नेतृत्व विकास कार्यक्रम की शुरूआत करने जा रही है।

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सरकार का मानना है कि सभी शिक्षक अच्छे प्राचार्य नहीं हो सकते। शैक्षणिक संस्थानों को चलाना आसान कार्य नहीं है। शिक्षकों को मुख्य शिक्षक, मुख्याध्यापक और प्राचार्य की भूमिका निभाने के लिए नेतृत्व प्रशिक्षण देने की जरूरत है। इसलिए नए सत्र से स्कूल मुखिया नियुक्त होने वाले शिक्षकों के लिए यह अनिवार्य होगा। प्रशिक्षण प्रमाण पत्र हाथ में होने पर ही पदोन्नति मिल पाएगी।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कहना है कि इस कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को स्कूल प्रबंधन और नेतृत्व कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। स्कूल मुखिया बनने पर उन्हें स्कूल के प्रशासनिक कार्य बेहतर तरीके से करने में मदद मिलेगी। अभी शिक्षकों को पदोन्नत होने के बाद मुख्य शिक्षक, मुख्याध्यापक व प्राचार्य पद का काम सीखना पड़ता है। जिससे शुरूआत में प्रशासनिक, वित्तीय कार्य करने में कठिनाई आती है। नेतृत्व प्रशिक्षण पहले मिलने से काम करने में कोई मुश्किल नहीं आएगी।

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विवि में भारतीय भाषाओं, कला एवं संस्कृति, आयुर्वेद पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम

सीएम ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा का अंतरराष्ट्रीयकरण किया जाएगा। प्रदेश की उच्च शिक्षा को विश्व के मानचित्र पर लाने के लिए विश्वविद्यालयों में भारतीय भाषाओं, भारतीय कला एवं संस्कृति, ज्योतिषशास्त्र, आयुर्वेद इत्यादि पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इनमें अध्ययन के लिए विदेशी विद्यार्थियों को आकर्षित किया जाएगा। प्रदेश की प्राचीन भाषाओं, हस्तलिपि में सीखने, अध्ययन और शोध को प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालयों को सरकार अनुदान भी देगी।

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