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गर्मियों की छुट्टियों के बाद खुला स्कूल, पहले दिन पहुंचे काफी कम बच्चे
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चंडीगढ़। गर्मियों की छुट्टियों के बाद शुक्रवार से स्कूल खुल गए। पहले दिन सरकारी स्कूलों में काफी कम बच्चे आए। प्राइमरी कक्षा के बच्चों की हाजिरी 9.71 प्रतिशत और अपर प्राइमरी की 8.67 प्रतिशत रही। सभी सरकारी स्कूलों में छात्रों की कुल हाजिरी 8.11 प्रतिशत रही।
स्कूलों में शुक्रवार को कोरोना महामारी के कारण दो साल बाद मिड-डे मील शुरू की गई। पहले दिन बच्चों के स्वागत के तौर पर उन्हें पीले मीठे चावल और हलवा खिलाया गया। कोरोना महामारी के कारण पिछले दो सालों से बच्चों को सूखा राशन दिया जा रहा था। पहले सरकारी स्कूलों में सेंट्रलाइज्ड किचन थी, लेकिन पिछले दो सालों में लगभग 15 स्कूलों में मिड-डे मील किचन शुरू की गई है। जिनसे शुक्रवार को ट्रायल के तौर पर नजदीकी स्कूलों में खाना पहुंचाया गया। इस दौरान सभी स्कूलों ने अपने स्तर पर खाने की फीडबैक रिपोर्ट भी बनाई, जिसे संबंधित किचन को भेजा जाएगा और खाने में रही कमी में सुधार के बारे में जानकारी दी जाएगी। बच्चों के लिए उनके उम्र वर्ग के अनुसार न्यूट्रिशयन आधारित पौष्टिक खाने का मैन्यू तैयार करवाया जाएगा। स्कूलों की ओर से आगामी हफ्ते में मैन्यू तैयार कर मिड-डे मील को फिर से स्ट्रीम लाइन कर लिया जाएगा।
कई स्कूलों में सिर्फ छह-सात छात्र ही पहुंचे
पहले दिन स्कूलों में बहुत कम छात्र पहुंचे थे। कई स्कूलों में सिर्फ छह-सात छात्र ही पहुंचे हुए थे। कई ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों की हाजिरी ठीक थी। शिक्षकों ने पहले दिन बच्चों को कोई होमवर्क नहीं दिया। स्कूल में आने पर पहले उनका स्वागत किया गया। इसके बाद बच्चों को उनकी कक्षा और पाठ्यक्रम का बेसिक समझाया गया।
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सरकारी स्कूलों का ट्विटर हैंडल किया शुरू :
शिक्षा विभाग की ओर से शहर के सभी सरकारी स्कूलों की गतिविधियों और स्कूलों की सभी जानकारी को लोगों तक पहुंचाने के लिए शुक्रवार सुबह को सरकारी स्कूलों का ट्विटर हैंडल शुरू किया गया। शिक्षा निदेशक एचपीएस बराड़ ने बताया कि स्कूलों को स्ट्रीमलाइन करने के साथ ये नई शुरूआत है। ट्विटर के जरिए स्कूलों की सभी जानकारी को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। वहीं शहरवासी स्कूलों में किसी कमी को लेकर ट्विटर पर भी संपर्क कर सकेंगे।
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स्कूलों में शुक्रवार को कोरोना महामारी के कारण दो साल बाद मिड-डे मील शुरू की गई। पहले दिन बच्चों के स्वागत के तौर पर उन्हें पीले मीठे चावल और हलवा खिलाया गया। कोरोना महामारी के कारण पिछले दो सालों से बच्चों को सूखा राशन दिया जा रहा था। पहले सरकारी स्कूलों में सेंट्रलाइज्ड किचन थी, लेकिन पिछले दो सालों में लगभग 15 स्कूलों में मिड-डे मील किचन शुरू की गई है। जिनसे शुक्रवार को ट्रायल के तौर पर नजदीकी स्कूलों में खाना पहुंचाया गया। इस दौरान सभी स्कूलों ने अपने स्तर पर खाने की फीडबैक रिपोर्ट भी बनाई, जिसे संबंधित किचन को भेजा जाएगा और खाने में रही कमी में सुधार के बारे में जानकारी दी जाएगी। बच्चों के लिए उनके उम्र वर्ग के अनुसार न्यूट्रिशयन आधारित पौष्टिक खाने का मैन्यू तैयार करवाया जाएगा। स्कूलों की ओर से आगामी हफ्ते में मैन्यू तैयार कर मिड-डे मील को फिर से स्ट्रीम लाइन कर लिया जाएगा।
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कई स्कूलों में सिर्फ छह-सात छात्र ही पहुंचे
पहले दिन स्कूलों में बहुत कम छात्र पहुंचे थे। कई स्कूलों में सिर्फ छह-सात छात्र ही पहुंचे हुए थे। कई ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों की हाजिरी ठीक थी। शिक्षकों ने पहले दिन बच्चों को कोई होमवर्क नहीं दिया। स्कूल में आने पर पहले उनका स्वागत किया गया। इसके बाद बच्चों को उनकी कक्षा और पाठ्यक्रम का बेसिक समझाया गया।
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सरकारी स्कूलों का ट्विटर हैंडल किया शुरू :
शिक्षा विभाग की ओर से शहर के सभी सरकारी स्कूलों की गतिविधियों और स्कूलों की सभी जानकारी को लोगों तक पहुंचाने के लिए शुक्रवार सुबह को सरकारी स्कूलों का ट्विटर हैंडल शुरू किया गया। शिक्षा निदेशक एचपीएस बराड़ ने बताया कि स्कूलों को स्ट्रीमलाइन करने के साथ ये नई शुरूआत है। ट्विटर के जरिए स्कूलों की सभी जानकारी को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। वहीं शहरवासी स्कूलों में किसी कमी को लेकर ट्विटर पर भी संपर्क कर सकेंगे।