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स्कूली बच्चे अब पढ़ाई के साथ बन सकेंगे आत्मनिर्भर

Mon, 09 May 2022 02:00 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 09 May 2022 02:00 AM IST
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School children will now be able to become self-reliant with studies
चंडीगढ़। शहर में सरकारी स्कूलों के बच्चे अब पढ़ाई के साथ आत्मनिर्भर भी बन सकेंगे। शहर के 20 से अधिक सरकारी स्कूलों में नौंवी और दसवीं कक्षा में वोकेशनल कोर्स का विकल्प दिया जाएगा। इसमें पांच विषयों के अतिरिक्त विषय में छात्र वोकेशनल कोर्स या भाषा का अपने अनुसार चयन कर सकता है। इसे लेकर स्कूलों ने कॉन्ट्रैक्ट पर शिक्षकों की नियुक्ति कर ली है। पिछले हफ्ते स्कूली स्तर पर शिक्षकों के लिए साक्षात्कार लिए गए हैं।
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शहर के जीएमएसएसएस-23, 47, 45, 27, 40, 8, 20बी, 37डी, 22, 33, 19, 37बी, 18, 32, 28, 46, 44, 10, 21, 35, 15, 16, 20डी, 39, 56, 26 टीएम, 38 वेस्ट, जीएमएसएसएस मलोया, जीएसएसएस रायपुर खुर्द, जीएसएसएस खुड्डा लाहौरा, खुड्डा अलीशेर, मौलीजागरां, सारंगपुर, धनास, कैंबवाला, करसान, एमएमटी, एमएमसी इत्यादि स्कूलों में नौंवी और दसवीं में वोकेशनल कोर्स का विकल्प है। विद्यार्थी अपनी इच्छानुसार विषयों का चयन कर सकते हैं।
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सरकारी स्कूलों में वोकेशनल कोर्स में फूड प्रोडक्शन, आईटी, ब्यूटी एंड वेलनेस, रिटेलिंग, सिक्योरिटी, इंट्रोडक्शन टू फाइनेंस मार्केट, एग्रीकल्चर, फ्रंट ऑफिस ऑपरेशंस, बैंकिंग एंड इश्योरेंस, मार्केटिंग एंड सेल्स, हेल्थ केअर, मल्टीमीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इत्यादि कोर्स हैं। कई स्कूलों में पिछले दो से तीन वर्ष से नौंवी दसवीं में वोकेशनल कोर्स करवाए जा रहे हैं। वहीं, बहुत से स्कूलों में इसी सत्र से वोकेशनल कोर्स की शुरुआत की गई है।
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समग्र शिक्षा के तहत नियुक्त किए शिक्षक
शिक्षा विभागों के निर्देशों के बाद समग्र शिक्षा के तहत पिछले हफ्ते सरकारी स्कूलों में वोकेशनल कोर्स के लिए शिक्षकों के साक्षात्कार के बाद उन्हें नियुक्त किया गया है। शिक्षकों को कांट्रैक्ट पर दस माह के लिए रखा गया है। शिक्षकों को पार्ट टाइम के हिसाब से प्रति घंटे के लिए 333 रुपये और महीने का अधिकांश 20 हजार रुपये वेतन दिया जाएगा।

11वीं और 12वीं कक्षा में पहले से ही हैं वोकेशनल कोर्स
छात्रों के कौशल और व्यक्तित्व निखार के लिए वोकेशनल एजुकेशन शहर के सरकारी स्कूलों में वर्ष 1995 से शुरू की गई है। इसमें 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए कौशल से जुड़े विषयों की पढ़ाई और प्रैक्टिकल की शुरुआत की गई थी। ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा में वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई करने के बाद बहुत से विद्यार्थी संबंधित विषय में इंटर्नशिप या ट्रेनिंग कर साधारण नौकरी लग जाते हैं। बारहवीं कक्षा में स्कूलों की ओर से भी कई बार बच्चों को ट्रेनिंग करवाई जाती है, जिससे बच्चों को आगे कौशल के आधार पर काम मिल सके और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
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