{"_id":"578bb2494f1c1b167cc4b570","slug":"sawan-month-worship-in-sawan-happiness-wellness-chandigarh","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस वर्ष सावन में 27 साल बाद बेहद शुभ संयोग, ऐसे करें पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस वर्ष सावन में 27 साल बाद बेहद शुभ संयोग, ऐसे करें पूजा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 17 Jul 2016 09:59 PM IST
विज्ञापन
शिव का रुद्राभिषेक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुख शांति समृद्धि और उल्लास लेकर आएगा यह महीना 27 वर्षों के बाद बन रहा हैं सावन में ऐसा संयोग। सावन के महीनें का शुभारंभ बुधवार से हो रहा है। इस दिन सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश कर रहा है। अश्लेषा का स्वामी बुध है। बुधवार के दिन ही सावन का महीना प्रारंभ हो रहा है। शुक्र भी श्रावण महीना के पहले दिन अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश कर रहा है। इन संयोग के कारण इस वर्ष सावन में वर्गोंत्तम महाजयंती योग बन रहा है।
ऐसा योग 27 वर्षों के बाद बन रहा है। यह कहना है सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का। इस प्रकर के योग से सुख समृद्धि, शांति और उल्लास की प्राप्ति होगी। बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि चंद्रमा भी मकर राशि और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। श्रावण मास में शिव की आराधना करने से उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
इन चीजों से करें अभिषेक...
बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार रोग की शांति के लिए कुशा से, लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस और पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। शत्रुओं के नाश के लिए सरसों के तेल से अभिषेक करना लाभकारी होता है। विद्या की प्राप्ति के लिए दूध और शहद से भगवान शिव का अभिषेक करना शुरू होता है।
विज्ञापन
सावन में पार्थिव पूजा का विशेष महत्व...
जय श्री राम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख स्वामी राम बहादुर मिश्र के अनुसार श्रावण के महीना में पार्थिव रुद्र पूजन का विशेष महत्व है। पार्थिव रुद्र पूजन कराने के बाद 108 शिव के नाम पर वेलपत्र से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
ऐसे करें पूजा...
देवालय पूजा परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ लाल बहादुर दुबे के अनुसार सबसे पहले स्नान के बाद संकल्प लेकर ध्यान करना होता है।
उन्होंने कहा कि भगवान का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराने के बाद जल से स्नान कराना चाहिए। वस्त्र , जनेऊ, सफेद चंदन या पीला चंदन, चावल, सफेद फूल, धतूरा, आक का पत्र, भांग, धतूरा, दूर्वा चढ़ाने के बाद धूप दीप से पूजन करें। पूजा के बाद भगवान की आरती क्षमा प्रार्थना भी अनिवार्य रूप से करनी चाहिए।
विज्ञापन
ऐसा योग 27 वर्षों के बाद बन रहा है। यह कहना है सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का। इस प्रकर के योग से सुख समृद्धि, शांति और उल्लास की प्राप्ति होगी। बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि चंद्रमा भी मकर राशि और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। श्रावण मास में शिव की आराधना करने से उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
विज्ञापन
इन चीजों से करें अभिषेक...
बीरेंद्र नारायण मिश्र के अनुसार रोग की शांति के लिए कुशा से, लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस और पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। शत्रुओं के नाश के लिए सरसों के तेल से अभिषेक करना लाभकारी होता है। विद्या की प्राप्ति के लिए दूध और शहद से भगवान शिव का अभिषेक करना शुरू होता है।
विज्ञापन
सावन में पार्थिव पूजा का विशेष महत्व...
जय श्री राम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख स्वामी राम बहादुर मिश्र के अनुसार श्रावण के महीना में पार्थिव रुद्र पूजन का विशेष महत्व है। पार्थिव रुद्र पूजन कराने के बाद 108 शिव के नाम पर वेलपत्र से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
ऐसे करें पूजा...
देवालय पूजा परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ लाल बहादुर दुबे के अनुसार सबसे पहले स्नान के बाद संकल्प लेकर ध्यान करना होता है।
उन्होंने कहा कि भगवान का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराने के बाद जल से स्नान कराना चाहिए। वस्त्र , जनेऊ, सफेद चंदन या पीला चंदन, चावल, सफेद फूल, धतूरा, आक का पत्र, भांग, धतूरा, दूर्वा चढ़ाने के बाद धूप दीप से पूजन करें। पूजा के बाद भगवान की आरती क्षमा प्रार्थना भी अनिवार्य रूप से करनी चाहिए।