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सावन 2019: देखिए भगवान भोलेनाथ का 250 साल पुराना खेड़ा शिव मंदिर, यहां पहले बसा था गांव
Tue, 23 Jul 2019 03:00 PM IST
खुशबू गोयल
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 23 Jul 2019 03:00 PM IST
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शिव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में सेक्टर- 28 स्थित खेड़ा शिव मंदिर ढाई सौ साल पुराना है। यह स्थान तब गांव गुरदासपुरा का हिस्सा था। यह कहना है कि सेक्टर- 28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी और श्री देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष ईश्वर चंद्र शास्त्री का। मंदिर में दो शिवालय हैं। सावन में बड़ी संख्या में भक्त शिव मंदिर में जलाभिषेक के लिए आते हैं।
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जब चंडीगढ़ नहीं बना था तब यह स्थान गांव गुरदासपुरा के नाम से जाना जाता था। पुजारी ईश्वर चंद्र शास्त्री का कहना है कि जब चंडीगढ़ बना तो गांव के लोग दूसरे जगहों पर जाकर बस गए। लेकिन साल में एक बार गांव के लोग जरूर इस मंदिर में आकर माथा टेकते हैं। मंदिर में देवी देवताओं की कई प्रतिमाएं हैं। इनमें खेड़ा मुख्य देवता हैं।
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इसके अलावा अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं हैं। सावन के महीने में मुख्य पुजारी ईश्वर चंद्र शास्त्री हर रोज शिव महापुराण की कथा सुनाते हैं। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। शिव महापुराण कथा के दौरान हर रोज नए सामाजिक संदेश भी देते हैं, ताकि समाज में समानता बनी रहे। सब एक दूसरे का सत्कार करें। ऐसे में समाज मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा।
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मंदिर में 27 वनस्पतियां हैं पूजा के लिए
जब विशेष प्रकार की पूजा होती है तो इसमें 27 प्रकार की वनस्पतियों की जरूरत होती है। इसलिए इस मंदिर में 27 प्रकार के पेड़-पौधे लगाए गए हैं। इन पेड़ और पौधों की देखभाल करने के लिए माली और सेवादार तो हैं ही मुख्य पुजारी ईश्वर चंद्र शास्त्री भी इसकी पूरी तरह से देखभाल करते हैं।
पूजा के लिए इन वनस्पतियों को लेने के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। मंदिर के सेवादार ही इन पेड़ों और पौधों से जरूरी टहनियां या लकड़ियों को तोड़ते हैं ताकि पेड़ों और पौधों को नुकसान न हो। इन पौधों में अनार, नींबू, रुद्राक्ष, लुकाठ, बेल, लीची, शहतूत, आंवला, जामुन, आम सहित अन्य वनस्पतियां उगाई गई हैं।
पूजा के लिए इन वनस्पतियों को लेने के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। मंदिर के सेवादार ही इन पेड़ों और पौधों से जरूरी टहनियां या लकड़ियों को तोड़ते हैं ताकि पेड़ों और पौधों को नुकसान न हो। इन पौधों में अनार, नींबू, रुद्राक्ष, लुकाठ, बेल, लीची, शहतूत, आंवला, जामुन, आम सहित अन्य वनस्पतियां उगाई गई हैं।