Satish Kaushik: हरियाणवी बोली में आपराधिक वारदातों पर धारावाहिक बनाना चाहते थे सतीश, अधूरा रह गया सपना
सतीश ने छह माह पूर्व हरियाणा के सनसनीखेज अपराधों पर इंडियाज मोस्ट वांटेंड की तर्ज पर धारावाहिक बनाने की योजना अनिल के साथ साझा की थी। उन्होंने अनिल से कहा था कि वह हरियाणा के बड़े अपराधों में दर्ज हुई एफआईआर की कॉपी लेकर रखें।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अभिनेता-निर्देशक सतीश कौशिक के दिल में हर समय हरियाणा और महेंद्रगढ़ धड़कता था। इसीलिए जब राज्य सरकार और उनके मित्रों ने हाथ बढ़ाया तो वह राज्य की भाषा और संस्कृति को बड़े स्तर पर पहचान दिलाने में जुट गए। उनके नजदीकी अनिल कौशिक ने बताया कि सतीश कौशिक अपनी मां बोली यानी हरियाणवी में राज्य की बड़ी आपराधिक घटनाओं पर केंद्रित धारावाहिक बनाने वाले थे। इस प्रोजेक्ट पर सितंबर 2023 से काम शुरू करने की उन्होंने तैयारी भी कर ली थी।
हरियाणा कला परिषद के निदेशक और सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के राज्य नोडल अधिकारी महेंद्रगढ़ निवासी अनिल कौशिक ने बताया कि सतीश कौशिक से उनका 15 वर्षों से ज्यादा का जुड़ाव रहा। सतीश ने छह माह पूर्व हरियाणा के सनसनीखेज अपराधों पर इंडियाज मोस्ट वांटेंड की तर्ज पर धारावाहिक बनाने की योजना अनिल के साथ साझा की थी। उन्होंने अनिल से कहा था कि वह हरियाणा के बड़े अपराधों में दर्ज हुई एफआईआर की कॉपी लेकर रखें।
दर्द को दवा में बदलकर प्रयोग करने से जीवन की राहें होंगी आसान : निशांत
सतीश कौशिक की सीख आज भी फिल्म लेखक एवं निर्देशक निशांत भारद्वाज को याद है। उनका कहना था कि दर्द को ही दवा में बदलकर प्रयोग किया जाए तो जीवन की राहें आसान हो जाएंगी। निशांत ने बताया कि जब सतीश कौशिक और पंकज कपूर फिलिप्स टॉप 10 की शूटिंग कर रहे थे तो पास ही में वह भी अपने शो 'क्या आप जानते हैं' की शूटिंग कर रहे थे। लंच के समय उनकी मुलाकात हुई। हालांकि सतीश निशांत को पहले से जानते थे।
निशांत को यह मुलाकात इसलिए याद है क्योंकि इसमें उन्हें पता चला था कि सतीश हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के धनौंदा से हैं और उनके गांव के पास ही निशांत का ननिहाल गांव गाहड़ा है। उस दिन पूरे लंच समय में गांव धनौंदा, गाहड़ा औप वहां की संस्कृति पर चर्चा चलती रही। उन्होंने अपने घर पर लंच के लिए आने का निमंत्रण दिया। निशांत बताते हैं कि सतीश कौशिक के अनुभव से एक महत्वपूर्ण बात यह सीखी कि संघर्ष ही सफलता का रास्ता है और संघर्ष हंसते-हंसते पूरे मन से होना चाहिए।
गांव के प्रवेश राजपूत को तराश कर बनाया हीरा
गांव धनौंदा के ही प्रवेश राजपूत को सतीश कौशिक ने फिल्मी दुनिया के गूढ़ रहस्यों और सफलता के गुर देकर तैयार किया। हाल ही में रिलीज हुई हरियाणवी फिल्म 'म्हारी छोरी के छोरां तै कम सै के' लेखक भी प्रवेश राजपूत हैं। प्रवेश राजपूत ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि कनीना कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद एक कार्यक्रम में उनकी सतीश कौशिक से मुलाकात हुई।
प्रवेश ने गांव का जिक्र किया तो उन्होंने गले लगा लिया। इसके बाद जब वह गांव आए तो उसे बुलाया। फिल्मी दुनिया में कदम रखने में हरसंभव सहायता की। उनके मार्गदर्शन से लगातार सफलता मिलती गई। फिल्मी कहानियां लिखने के भी गुर बताए। प्रवेश बताते हैं कि उन्होंने ग्रामीण स्तर से उठे कलाकारों को तराश कर तैयार किया है। जल्द ही उनके शिष्य फिल्मों में नजर आएंगे।
धनौंदा में सतीश के नाम है चार एकड़ भूमि, पुश्तैनी मकान और दो प्लाट
गांव धनौंदा में अभिनेता सतीश कौशिक के नाम पर चार एकड़ भूमि, पुश्तैनी मकान और दो प्लाट हैं। उनके चचेरे भाई सुभाष कौशिक ने बताया कि पुश्तैनी मकान और भूमि के साथ प्लाटों की देखरेख सतीश स्वयं करते थे। समय-समय पर परिवार के सदस्यों से बातचीत भी करते थे। जब भी कभी वह गांव में आते थे तो अपने खेतों में जरूर जाते थे। साथ ही वह ग्रामीणों को परंपरागत खेती से हटकर आधुनिक तरीके से खेती करने के लिए भी प्रेरित करते थे। सुभाष ने बताया कि सतीश हमेशा उन्हें जैविक खेती के लिए जागरूक करते थे। वह अपने खेतों में किसी भी रासायनिक खाद या कीटनाशकों का प्रयोग न करने की सलाह देते थे।