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बाजार में उतरी सतिंदर सरताज की 'रंगरेज'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 20 Jun 2014 04:51 PM IST
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सतिंदर सरताज को कविता, लेखन और गायकी से बेहद लगाव है। चंडीगढ़ पार्क प्लाजा में एलबम रंगरेज के रिलीज के मौके पर पहुंचे सतिंदर सरताज ने कहा कि कई बार उन्हें तेज बुखार था, डॉक्टरों ने गाने से मना किया पर स्टेज पर चढ़े और फैंस को देखते ही बुखार गायब हो गया।
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सतिंदर सरताज ने कहा कि कविता हो या गीत, उसकी रचना के लिए कोई खास समय नहीं होता। उन्होंने बताया वीरवार सुबह सवा नौ बजे ही उन्होंने कविता लिखी... सोते रहन दे पंक्षी मेरी यादा दे... उठ गए तो अंबर भर देंगे...। फिर सतिंदर बोले, कविता एक अहसास है जो कभी भी कहीं भी हो सकता है।
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कश्मीर से है खास लगाव
सतिंदर बताया यह एलबम कश्मीर में शूट किया गया है। वहां की वादियों से खास लगाव है। उन्होंने बताया हाल ही में वह लंदन और कनाडा में कंसर्ट करके लौटे हैं। उनको वहां जबरदस्त रिस्पांस मिला।
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सतिंदर सरताज का रंगरेज रिलीज
इहो रंत हुंदे जे ना जग ते, फिर फुला दें विच किनां फरक हुंदा... नीले अंबर ते दूधिया बदलां दा, फिर किस तरां आपस विच तरक हुंदा... रंगा कारन ई धरती सबरग जापे, नई ते रंग विहुणा इह नरक हुंदा... सरताज दे कम नई चलने सी, इस रंगरेज दा बेड़ा गरक हुंदा... यह है पंजाबी सूफी सिंगर सतिंदर सरताज के नए एलबम रंगरेज का गीत।
वीरवार को इसका वीडियो एलबम जिकर तेरा और ऑडियो एलबम रंगरेज को चंडीगढ़ के होटल पार्क प्लाजा में रिलीज किया गया। गीतों की रचना खुद सरताज ने की है। इसमें दस गीत हैं। भूली मुहब्बत, कुदरत और लोक कहानियों को शायरी और पंजाब की मिट्टी से जुड़ी लोक धुनों को पिरोया गया है।
रंगरेज को पार्टनर इन राइम यूके की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर के संगीत के संग सजाया गया है। एलबम की मानीटरिंग न्यूयार्क स्थित कैन लिउस स्टूडियो में की गई।
सतिंदर का साज सरताज
सतिंदर ने बताया जब वह अभ्यास करते थे या फिर स्टेज पर चढ़ते हुए आते थे तो अक्सर कुछ कमी खटकती थी, इसीलिए उन्होंने साज सरताज बनाया। साज सरताज हिमाचल में पाई जाने वाली दयाल लकड़ी पर चमड़े को मढ़कर बनाया गया है। यह कुछ-कुछ ढपली की तरह है। रंगरेज में यह दिखाई देगा।