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Chandigarh News: चंडीगढ़ से खेलने का निर्णय किया सार्थक, मात्र चार दिन बाद ही हरमिलन कौर ने जीत लिया स्वर्ण
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चंडीगढ़। एशियन गेम्स मेडलिस्ट एथलीट हरमिलन कौर बैंस ने बीते मंगलवार को पंजाब छोड़कर चंडीगढ़ से खेलने का निर्णय लिया था। इसके चार दिन बाद ही शनिवार को इस होनहार खिलाड़ी ने तेहरान में आयोजित एशियन इंडोर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत कर देश के साथ शहर का नाम रोशन कर दिया। हरमिलन बैंस ने 1500 मीटर रेस में 4.29.55 का समय लेकर पहला स्थान हासिल किया। उनके प्रदर्शन से परिवार में खुशी का माहौल है। स्वर्ण पदक जीतने पर चंडीगढ़ एथलेटिक्स एसोसिएशन अध्यक्ष हरजिंदर सिंह गिल और जनरल सेक्रेटरी जसपिंदर सिंह ने हरमिलन कौर को बधाई देते हुए कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि इसी सप्ताह इस खिलाड़ी ने पंजाब से एनओसी लेकर चंडीगढ़ से खेलने का निर्णय लिया और शहर के लिए पहला स्वर्ण पदक भी लेकर दिखा दिया। हरमिलन कौर बैंस पंजाब के होशियारपुर की रहने वाली हैं। वह एथलेटिक्स में 800 मीटर, 1500 मीटर और 3000 मीटर की धावक हैं। हरमिलन चंडीगढ़ में आरबीआई में जॉब कर रही हैं। चंडीगढ़ से खेलने का निर्णय लेते समय उन्होंने कहा था, ‘मैं चंडीगढ़ में जॉब कर रही हूं अधिकतम समय चंडीगढ़ में रहती हूं, जिस वजह से मैंने चंडीगढ़ की तरफ से खेलने का फैसला किया है।’
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माता-पिता भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट
हरमिलन बैंस की मां माधुरी सिंह बुसान में आयोजित 2002 एशियाई खेल में महिलाओं की 800 मीटर रेस में रजत पदक जीता। माधुरी को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए साल 2003 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हरमिलन के पिता अमनदीप बैंस भी अपने जमाने के मशहूर धावक रहे हैं। अमनदीप साउथ एशियन गेम्स के पदक विजेता और 1500 मीटर के पूर्व चैंपियन भी रह चुके हैं।
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हरमिलन बैंस की उपलब्धियां
-साल 2015 में रांची में आयोजित अंडर-18 नेशनल चैंपियनशिप के 800 मीटर और 1500 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता।
-साल 2016 में वियतनाम के हो ची-मिन्ह में एशियाई जूनियर चैंपियनशिप की 1500 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर पहला अंतरराष्ट्रीय पदक अपने नाम किया।
-उन्होंने इंडियन ग्रांप्री में भी 800 मीटर स्पर्धा में रजत पदक जीता। साल 2017 में घुटने की चोट के कारण उन्हें कई इवेंट को छोड़ना पड़ा।
साल 2019 में वापसी करते हुए पटियाला में आयोजित फेडेरशन कप के 1500 मीटर इवेंट में कांस्य पदक अपनी झोली में डाला।
मूदबिदरी में आयोजित इंटर-यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में स्वर्ण (1500 मीटर) और कांस्य (800 मीटर) पदक जीतकर नाम रोशन किया।
-2020 में हरमिलन ने भुवनेश्वर में आयोजित खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के 800 मीटर और 1500 मीटर के दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीता।
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माता-पिता भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट
हरमिलन बैंस की मां माधुरी सिंह बुसान में आयोजित 2002 एशियाई खेल में महिलाओं की 800 मीटर रेस में रजत पदक जीता। माधुरी को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए साल 2003 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हरमिलन के पिता अमनदीप बैंस भी अपने जमाने के मशहूर धावक रहे हैं। अमनदीप साउथ एशियन गेम्स के पदक विजेता और 1500 मीटर के पूर्व चैंपियन भी रह चुके हैं।
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हरमिलन बैंस की उपलब्धियां
-साल 2015 में रांची में आयोजित अंडर-18 नेशनल चैंपियनशिप के 800 मीटर और 1500 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता।
-साल 2016 में वियतनाम के हो ची-मिन्ह में एशियाई जूनियर चैंपियनशिप की 1500 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर पहला अंतरराष्ट्रीय पदक अपने नाम किया।
-उन्होंने इंडियन ग्रांप्री में भी 800 मीटर स्पर्धा में रजत पदक जीता। साल 2017 में घुटने की चोट के कारण उन्हें कई इवेंट को छोड़ना पड़ा।
साल 2019 में वापसी करते हुए पटियाला में आयोजित फेडेरशन कप के 1500 मीटर इवेंट में कांस्य पदक अपनी झोली में डाला।
मूदबिदरी में आयोजित इंटर-यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में स्वर्ण (1500 मीटर) और कांस्य (800 मीटर) पदक जीतकर नाम रोशन किया।
-2020 में हरमिलन ने भुवनेश्वर में आयोजित खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के 800 मीटर और 1500 मीटर के दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीता।