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संतूरवादक तरुण व ओडिशी नृत्यांगना सुजाता ने जमाया रंग

Thu, 18 Mar 2021 02:04 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 18 Mar 2021 02:04 AM IST
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Santurist Tarun and Odissi dancer Sujata showed talent
चंडीगढ़। टैगोर थिएटर में आयोजित 50वें भास्कर राव नृत्य एवं संगीत सम्मेलन के दूसरे दिन प्रसिद्ध संतूर वादक तरुण भट्टाचार्य और ओडिशी नृत्यांगना सुजाता महापात्रा ने शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। सेक्टर-18 में आयोजित कार्यक्रम में प्राचीन कला केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर एवं सचिव सजल कौसर भी मौजूद रही।
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कार्यक्रम के पहले भाग में पंडित तरुण भट्टाचार्य नेसंतूर वादन के जरिए राग जनसम्मोहिनी से की। पारंपरिक आलाप से शुरू करके जोड़ प्रस्तुत किया और इसी राग में झपताल एवं तीन ताल में रचनाएं पेश कीं। कार्यक्रम का समापन इन्होंने भटियाली धुन से किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इनके साथ तबले पर जाने-माने तबलावादक पंडित रामदास पलसुले ने संगत की। संगीत नाटक अवार्ड से सम्मानित पंडित तरुण भट्टाचार्य ने संगीत की शिक्षा अपने पिता रवि भट्टाचार्य एवं पंडित दुलाल राय से ली। इसके बाद पंडित रविशंकर से भी संगीत की बारीकियां सीखीं। इन्होंने एक नए राग गंगा की रचना भी की है। इन्होंने देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी प्रस्तुतियां दी हैं।
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वहीं कार्यक्रम के दूसरे भाग में ओडिशी नृत्यांगना सुजाता महापात्रा ने अपने ग्रुप के साथ प्रस्तुति दी। सुजाता ने सबसे पहले भगवान जगन्नाथ को अर्पित रचना सृतकमला पेश की। इसमें पारंपरिक अभिनय पक्ष पर आधारित मंगलाचरण पेश किया। इसके पश्चात ओडिशी नृत्य पल्लवी की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के अंत में सुजाता ने अपने ग्रुप के साथ ‘मोक्ष’ प्रस्तुत किया, जिसमें आत्मा के ब्रह्म के साथ मिलन को नृत्य के माध्यम से पेश कर खूब तालियां बटोरीं। सुजाता महापात्रा गुरु केलूचरण महापात्रा की पुत्रवधू है। वह देश-विदेश में अपनी कला की शानदार प्रस्तुति दे चुकी हैं।
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जरूरतमंदाें की मदद करना पहला कर्तव्य : भट्टाचार्य
पंडित तरुण भट्टाचार्य ने बताया कि वह और उनकी संस्था हमेशा ही जरूरतमंदाें की मदद करते रहते हैं। हम सभी अपने पेशे में तो काम कर रहे हैं, लेकिन इससे हटकर समाज के प्रति भी हमारा फर्ज बनता है कि हम अधिक से अधिक जरूरतमंदों की सहायता करें। कोरोना महामारी ने देश को काफी नुकसान पहुंचाया है। इससे बचाव के लिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
‘काफी प्यार देते हैं यहां के दर्शक’
पंडित तरुण भट्टाचार्य ने बताया कि चंडीगढ़ में पांच साल बाद प्रस्तुति देने पहुंचा हूं। यहां पर आकर मन को काफी सुकून मिलता है। इस शहर में रहने वाले कलाकारों को काफी प्यार देते हैं। यहीं वजह है कि मुझे यहां प्रस्तुति देना अच्छा लगता है।

मैंने जो सीखा, उसे दूसरों को देना है : सुजाता
ओडिशी नृत्यांगना सुजाता महापात्रा ने कहा कि मैंने अपने गुरुओं से जो भी सीखा है, वह मेरे लिए अनमोल है। जो शिक्षा मुझे मिली, उसे अब मैं नई पीढ़ी को भी देना चाहती हूं। पारंपरिक ओडिशी नृत्य को सीखना ही मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य है। इसके लिए मैंने नृत्य को सिखाना भी शुरू कर दिया है।
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