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संत गोपालदास ने खून से लिखा राष्ट्रपति कोविंद को पत्र, जानिए क्या अपील की?
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Wed, 27 Sep 2017 01:23 PM IST
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संत गोपालदास
आमरण अनशन पर बैठे संत गोपालदास ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और राज्यपाल को खून से पत्र लिखकर भेजा है और उसमें उन्होंने बेहद मार्मिक अपील की। गोचारान भूमि के लिए अनशन कर रहे संत गोपाल दास ने पत्र में गोचारान भूमि की स्थिति व गो माता की दयनीय स्थिति के बारे में लिखा। साथ ही संत को धर्म गुरुओं से भी गायों की रक्षा करने की अपील की है।
वहीं संत ने गायों का हक मांगते हुए सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू करवाने की गुहार लगाई है। संत गोपालदास ने कहा है कि पूर्वजों ने गोचारान भूमि दान स्वरूप दी थी, इसका कुल रकबा तीन करोड़ 32 लाख 50 हजार एकड़ है। जो लगातार घटती चली गई, लेकिन मामला यहीं समाप्त नहीं होता। सरकार ने सरेआम सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करते हुए बची-खुची जमीन को भी अन्य कार्यों में उपयोग कर लिया। इसमें स्कूल, खेल-स्टेडियम, बीपीएल के लिए घर बनवाए गए।
इतना ही नहीं सरकार ने पूंजीपतियों को गोचारान भूमि भी ओने-पोने दामों पर बेच दी। संत ने कहा कि किसी सरकार को गाय का हक छिनने का अधिकार नहीं है। गौरतलब है कि पीजीआईएमएस में भर्ती संत गोपालदास का स्वास्थ्य स्तर स्थिर बना हुआ है। संत के शरीर में किटोन लेवल बढ़ा हुआ है। इसके अलावा ब्लड शुगर लेवल में कभी कम तो कभी अधिक हो रहा है। इसके आलाव लंबे अनशन से संत के शरीर में रोग से लड़ने की क्षमता कम होती जा रही है।
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वहीं संत ने गायों का हक मांगते हुए सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू करवाने की गुहार लगाई है। संत गोपालदास ने कहा है कि पूर्वजों ने गोचारान भूमि दान स्वरूप दी थी, इसका कुल रकबा तीन करोड़ 32 लाख 50 हजार एकड़ है। जो लगातार घटती चली गई, लेकिन मामला यहीं समाप्त नहीं होता। सरकार ने सरेआम सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करते हुए बची-खुची जमीन को भी अन्य कार्यों में उपयोग कर लिया। इसमें स्कूल, खेल-स्टेडियम, बीपीएल के लिए घर बनवाए गए।
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इतना ही नहीं सरकार ने पूंजीपतियों को गोचारान भूमि भी ओने-पोने दामों पर बेच दी। संत ने कहा कि किसी सरकार को गाय का हक छिनने का अधिकार नहीं है। गौरतलब है कि पीजीआईएमएस में भर्ती संत गोपालदास का स्वास्थ्य स्तर स्थिर बना हुआ है। संत के शरीर में किटोन लेवल बढ़ा हुआ है। इसके अलावा ब्लड शुगर लेवल में कभी कम तो कभी अधिक हो रहा है। इसके आलाव लंबे अनशन से संत के शरीर में रोग से लड़ने की क्षमता कम होती जा रही है।
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