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BJP सरकार का संत गोपालदास ने लिया आड़े हाथों, बोले- मैं ले लूंगा भू समाधि
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Wed, 19 Apr 2017 04:01 PM IST
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संत गोपालदास
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लावारिस घूम रही ढाई लाख गो माताओं के लिए साढ़े 4 लाख एकड़ भूमि को खाली करने के लिए संघर्ष कर रहे गोपालदास ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि वे गोचरान भूमि और गोवंश को लेकर जनता की अदालत में सरकार से बहस करने को तैयार हैं।
अगर सरकार ने गोवंश के लिए गोचरान भूमि को खाली नहीं कराया तो वे अब भू-समाधि ले लेंगे। संत ने मंगलवार को मैना टूरिस्ट कांप्लेक्स में पत्रकारों से बातचीत की। जिसमें उन्होंने प्रदेश में गो मां की हो रही बेकद्री के लिए खट्टर सरकार को जमकर कोसा।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से गोशाला के नाम पर दिया गया बजट पर्याप्त नहीं है, इतना तो सीएम मनोहर लाल खट्टर अपनी निजी सेवाओं में ही खर्च कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ तो गोचरान भूमि को खाली कराने की बात कर रही है, वहीं, इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। भले ही सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, गो बचाओ का नारा दे रही हो, पर आज भी बेटियों और गो की दुर्दशा किसी से भी छुपी हुई नहीं है।
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आज केंद्र और प्रदेश सरकार संवेदनहीन हो चुकी है, कानून बनाकर जनता को केवल गुमराह किया जा रहा है। इसका एक उदाहरण यह है कि वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु से सात एकड़ भूमि गोचरान के लिए देने को लेकर एक व्यक्ति उनसे मिले। जिसमें वित्तमंत्री का रवैया काफी निराशाजनक रहा।
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अगर सरकार ने गोवंश के लिए गोचरान भूमि को खाली नहीं कराया तो वे अब भू-समाधि ले लेंगे। संत ने मंगलवार को मैना टूरिस्ट कांप्लेक्स में पत्रकारों से बातचीत की। जिसमें उन्होंने प्रदेश में गो मां की हो रही बेकद्री के लिए खट्टर सरकार को जमकर कोसा।
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उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से गोशाला के नाम पर दिया गया बजट पर्याप्त नहीं है, इतना तो सीएम मनोहर लाल खट्टर अपनी निजी सेवाओं में ही खर्च कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ तो गोचरान भूमि को खाली कराने की बात कर रही है, वहीं, इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। भले ही सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, गो बचाओ का नारा दे रही हो, पर आज भी बेटियों और गो की दुर्दशा किसी से भी छुपी हुई नहीं है।
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आज केंद्र और प्रदेश सरकार संवेदनहीन हो चुकी है, कानून बनाकर जनता को केवल गुमराह किया जा रहा है। इसका एक उदाहरण यह है कि वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु से सात एकड़ भूमि गोचरान के लिए देने को लेकर एक व्यक्ति उनसे मिले। जिसमें वित्तमंत्री का रवैया काफी निराशाजनक रहा।
रेवेन्यू तो देना ही पड़ेगा
संत गोपालदास
- फोटो : bureau
वित्तमंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति गोशाला या अन्य सामाजिक कार्य के लिए भूमि देता है तो दे, लेकिन रेवेन्यू तो देना ही पड़ेगा। अब उन्होंने गोचरान भूमि के रेवेन्यू को खर्च करने के बारे में आरटीआई लगाई है। संत ने कहा कि प्रदेश के अंदर हर गांव में गोचरान भूमि है और इसी को खाली कराने के लिए वे पिछले कई वर्षों से आंदोलन कर रहे हैं। वे लगातार 152 दिन तक भूख हड़ताल पर बैठे।
जिसमें सरकार ने उन्हें ठोस आश्वासन भी दिया था कि जहां-जहां भी गोचरान भूमि है, उसे खाली कराया जाएगा। इसी वजह से उन्होंने अपनी भूख हड़ताल खत्म की थी, लेकिन आज सरकार अपने वादों से मुकर रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में जिस तरह से गो माता को तड़पाया जा रहा है। आने वाले समय में संवेदनहीन सरकार के नेता भी इसी तरह से तड़पते हुए नजर आएंगे।
संत भी नहीं आ रहे आगे
संत ने कहा कि उन्हें साधु संतों को लेकर भी हैरानी हो रही है कि वह गो माता के मुद्दे को लेकर आगे नहीं आ रही है। अब तो भगवे का प्रभाव भी राजनीति के कारण कम हो गया है। उन्होंने कहा कि जहां साधु संतों को भी गाय के मुद्दे पर आगे आना चाहिए। वहीं, जनता को भी सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।
जिसमें सरकार ने उन्हें ठोस आश्वासन भी दिया था कि जहां-जहां भी गोचरान भूमि है, उसे खाली कराया जाएगा। इसी वजह से उन्होंने अपनी भूख हड़ताल खत्म की थी, लेकिन आज सरकार अपने वादों से मुकर रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में जिस तरह से गो माता को तड़पाया जा रहा है। आने वाले समय में संवेदनहीन सरकार के नेता भी इसी तरह से तड़पते हुए नजर आएंगे।
संत भी नहीं आ रहे आगे
संत ने कहा कि उन्हें साधु संतों को लेकर भी हैरानी हो रही है कि वह गो माता के मुद्दे को लेकर आगे नहीं आ रही है। अब तो भगवे का प्रभाव भी राजनीति के कारण कम हो गया है। उन्होंने कहा कि जहां साधु संतों को भी गाय के मुद्दे पर आगे आना चाहिए। वहीं, जनता को भी सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।